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भ्रष्टाचार के आरोपी कुलपति का फरमान: मेरी अनुमति के बिना किसी एजेंसी या थर्ड पार्टी को नहीं दी जाएगी ऑफिसियल फाइल

Sun, 21 Nov 2021 12:49 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 21 Nov 2021 12:49 PM IST
सार

भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी मगध विश्वविद्यालय के कुलपति ने विभागीय फरमान जारी करते हुए विश्वविद्यालय के अधिकारियों को चेतावनी दी है कि इस आदेश का आप सभी को और आपके अधीनस्थों को अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। उल्लंघन हुआ तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होगी।

 

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Vice Chancellor of Magadha University accused in corruption case issued departmental decree
प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र प्रसाद। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

भ्रष्टाचार के आरोपों में जांच का सामना कर रहे मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने फरमान जारी किया है कि बिना उनकी अनुमति के कोई भी ऑफिशियल फाइल किसी भी एजेंसी या थर्ड पार्टी को नहीं दी जाएगी। अजब यह है कि यह आदेश उन्होंने गोरखपुर में अपने आवास समेत अन्य ठिकानों पर पड़े एसवीयू (स्पेशल विजिलेंस यूनिट) के छापे के बाद ठीक दूसरे दिन जारी किया है।  
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भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी द्वारा इस तरह का आदेश जारी करने का संभवत: यह पहला मामला हो। वह भी आय से अधिक संपत्ति के मामले में मुकदमा दर्ज होने और छापे की कार्रवाई के बाद। एसवीयू राज्य सरकार की एजेंसी है और ऐसे किसी मुकदमे में आरोपी लोक सेवक के खिलाफ जरूरी सुबूत जुटाने के लिए जरूरी दस्तावेज कहीं से भी हासिल करने का अधिकार है। लेकिन, इस पत्र के मुताबिक विवि के अधिकारियों ने दस्तावेज देने से हाथ खड़े किए तो एसवीयू को आरोपी से जुड़ी फाइलों को हासिल करने के लिए उसकी ही अनुमति लेनी जैसी हास्यास्पद स्थिति पैदा हो जाएगी।
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इस अजीबोगरीब मामले में कुलपति ने मगध विश्वविद्यालय के प्रो. वीसी, रजिस्ट्रार, वित्तीय सलाहकार, वित्त पदाधिकारी और कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन को पत्र लिख कर यह आदेश दिया है। कुलपति ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि किसी भी एजेंसी को लिखित आग्रह और उनकी पूर्वानुमति के बाद ही कोई दस्तावेज दिया जा सकता है। इतना ही नहीं कुछ मामलों में तो दस्तावेज सौंपने के लिए बिहार के कुलाधिपति की अनुमति अनिवार्य होगी। दस्तावेजों की कॉपी अगर दी भी जाएगी तो उसकी मूल प्रति नहीं दी जाएगी। कुलपति ने अपने पत्र में विश्वविद्यालय के अधिकारियों को चेतावनी भी दी है कि इस आदेश का आप सभी को और आपके अधीनस्थों को अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। उल्लंघन हुआ तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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कुलपति और अन्य सह आरोपियों पर लगे हैं ये आरोप
एसवीयू के मुताबिक करीब 30 करोड़ रुपए की सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोप में वीसी के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। वीसी डॉ.राजेन्द्र प्रसाद के अलावा स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने मगध विश्वविद्यालय में वीसी के पीए-सह-सहायक सुबोध कुमार, लखनऊ की निजी कंपनी मेसर्स पूर्वा ग्राफिक्स एंड ऑफसेट प्रिंटर्स, मेसर्स एक्सएलआईसीटी सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा के वित्तीय पदाधिकारी ओम प्रकाश और पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार जीतेन्द्र कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी एवं आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि भ्रष्टाचार के खेल में सभी वीसी के साथ शामिल थे। वीसी के पीए सुबोध कुमार को पूछताछ के लिए एसवीयू ने शुक्रवार को तलब किया गया था, लेकिन वे नहीं आए।
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