फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   vaccinated against smallpox reduced risk of monkeypox

सलाह: चेचक का टीका लगवाने वालों को मंकी पॉक्स का खतरा कम, इन मरीजों को है अधिक खतरा

Wed, 27 Jul 2022 02:29 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 27 Jul 2022 02:29 PM IST
सार

डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बीएसएल-थ्री (बॉयो सेफ्टी लैब) बनकर तैयार है। इसमें ब्लैक फंगस से लेकर कोरोना तक की जांच की जा रही है। लैब में मंकी पॉक्स की जांच हो सकती है। इसके लिए केवल किट की जरूरत है। अगर किट मिलती है तो जांच की जाएगी।

विज्ञापन
vaccinated against smallpox reduced risk of monkeypox
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : ANI

विस्तार

जिन लोगों ने चेचक (मिजिल्स और रुबेला) का टीका लगवाया है, उन्हें मंकी पॉक्स का खतरा 80 फीसदी तक कम है। इसकी वजह यह है कि मंकी पॉक्स के लक्षण चेचक से मिलते-जुलते हैं। लेकिन, जिन लोगों को शुगर, उच्च रक्तचाप, दमा, निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी है, उन्हें सावधान रहने की जरूरत है।

विज्ञापन


बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि गंभीर बीमारी वाले मरीज और छोटे बच्चों को सतर्क रहने की जरूरत है। बताया कि मंकी पॉक्स होने पर गंभीरता बढ़ जाती है। इसकी वजह से अन्य बीमारियां भी हो जाती हैं। इनमें ब्रांको निमोनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारियां शामिल हैं।
विज्ञापन


इस रोग में छाले फूटने पर अगर खुला छोड़ देते हैं, तो बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा 90 फीसदी बढ़ जाता है। हालांकि जिले में अब तक एक भी केस नहीं मिला है। यह राहत की बात है, लेकिन जिस तरह से दिल्ली सहित अन्य राज्यों में केस बढ़ रहे हैं, उससे सावधान रहने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

10 बेड आरक्षित

सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने बताया कि मंकी पॉक्स के संबंध में अलर्ट जारी किया गया है। शासन के निर्देश पर 10 बेड कोरोना वार्ड में आरक्षित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस बीमारी में छाले चेचक जैसे होते हैं, लेकिन लक्षण एकदम अलग है। चेचक होने पर सबसे पहले पेट में दाने निकलते हैं। जबकि, मंकी पॉक्स में सबसे पहले बुखार, उल्टी और दर्द होता है। इसके एक सप्ताह बाद दाने निकलते हैं।

बीआरडी में है बीएसएल-थ्री लैब, मंकी पॉक्स की हो जाएगी जांच  
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बीएसएल-थ्री (बॉयो सेफ्टी लैब) बनकर तैयार है। इसमें ब्लैक फंगस से लेकर कोरोना तक की जांच की जा रही है। लैब में मंकी पॉक्स की जांच हो सकती है। इसके लिए केवल किट की जरूरत है। अगर किट मिलती है तो जांच की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed