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Gorakhpur News: पिता की मृत्यु का समाचार सुन भावुक हुए राम, भरत ने ठुकराया राज-पाट
Sat, 17 Oct 2026 03:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 17 Oct 2026 03:20 AM IST
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गोरखपुर। मानसरोवर के रामलीला पंडाल में शुक्रवार की शाम मंचन के दौरान दर्शक अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। मंच पर वनवासी राम के सामने जब भरत पहुंचे तो दोनों भाइयों का मिलन देख पंडाल में बैठे श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कोई हाथ जोड़कर प्रभु को निहारता रहा तो कोई प्रभु राम के जयकारे लगाने लगा।
रामलीला ने दिखाया गया कि पिता दशरथ की मृत्यु का समाचार सुनकर राम के भाव-विह्वल का दृश्य आया तो माहौल और भी भावुक हो गया। मंचन में दिखाया गया कि ननिहाल से लौटे भरत को जब राम के वनवास की पूरी घटना पता चलती है तो वह माता कैकेयी पर क्रोधित हो उठते हैं। राजपाट मिलने के बावजूद भरत उसे स्वीकार करने से इन्कार कर देते हैं। उनका कहना था कि राज्य राम का है और वह छल से उसे हासिल नहीं कर सकते। इसके बाद गुरु वशिष्ठ, राजा जनक और अयोध्या के लोगों के साथ भरत, राम को मनाने चित्रकूट पहुंचते हैं।
मंच पर राम-भरत मिलन का दृश्य आते ही दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। दोनों भाइयों का एक-दूसरे से लिपटकर रोना देख कई श्रद्धालु भावुक हो गए। पिता दशरथ के निधन की खबर सुनकर राम का शोकाकुल होना भी दर्शकों को भीतर तक छू गया। भरत बार-बार उनसे अयोध्या लौटने की विनती करते हैं, लेकिन राम पिता के वचन का पालन करने की बात कहते हैं। अंत में भरत उनकी चरण पादुका मांगकर सिर पर धारण करते हैं और अयोध्या लौट जाते हैं।
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इस अवसर पर राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारु चौधरी, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश गुप्ता, नगर आयुक्त अजय जैन, अनूप किशोर अग्रवाल, दीपक पालीवाल, समरेंदु कुमार सिंह, पुष्प दंत जैन और चंदन आर्य ने भगवान की आरती की। इस दौरान दीप अग्रवाल, कमलेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष मनीष अग्रवाल सर्राफ, सुधीर जैन, आचार्य बृजेश मणि मिश्रा, मीडिया प्रभारी अनुराग गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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रामलीला ने दिखाया गया कि पिता दशरथ की मृत्यु का समाचार सुनकर राम के भाव-विह्वल का दृश्य आया तो माहौल और भी भावुक हो गया। मंचन में दिखाया गया कि ननिहाल से लौटे भरत को जब राम के वनवास की पूरी घटना पता चलती है तो वह माता कैकेयी पर क्रोधित हो उठते हैं। राजपाट मिलने के बावजूद भरत उसे स्वीकार करने से इन्कार कर देते हैं। उनका कहना था कि राज्य राम का है और वह छल से उसे हासिल नहीं कर सकते। इसके बाद गुरु वशिष्ठ, राजा जनक और अयोध्या के लोगों के साथ भरत, राम को मनाने चित्रकूट पहुंचते हैं।
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मंच पर राम-भरत मिलन का दृश्य आते ही दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। दोनों भाइयों का एक-दूसरे से लिपटकर रोना देख कई श्रद्धालु भावुक हो गए। पिता दशरथ के निधन की खबर सुनकर राम का शोकाकुल होना भी दर्शकों को भीतर तक छू गया। भरत बार-बार उनसे अयोध्या लौटने की विनती करते हैं, लेकिन राम पिता के वचन का पालन करने की बात कहते हैं। अंत में भरत उनकी चरण पादुका मांगकर सिर पर धारण करते हैं और अयोध्या लौट जाते हैं।
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इस अवसर पर राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारु चौधरी, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश गुप्ता, नगर आयुक्त अजय जैन, अनूप किशोर अग्रवाल, दीपक पालीवाल, समरेंदु कुमार सिंह, पुष्प दंत जैन और चंदन आर्य ने भगवान की आरती की। इस दौरान दीप अग्रवाल, कमलेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष मनीष अग्रवाल सर्राफ, सुधीर जैन, आचार्य बृजेश मणि मिश्रा, मीडिया प्रभारी अनुराग गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।