यूपी विधानसभा चुनाव 2022: टिकट के दावेदारों से परेशान भाजपा नेता, बंद किया मोबाइल
गोरखपुर क्षेत्र के 62 विधानसभा क्षेत्रों से एक हजार से ज्यादा दावेदार आए हैं। दावेदार क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी को बायोडाटा देकर जा रहे हैं।
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टिकट के दावेदारों से भाजपा गोरखपुर क्षेत्र के नेता परेशान हैं। दबाव का ही नतीजा है कि क्षेत्र के ज्यादातर पदाधिकारियों ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया है। दावेदार बायोडाटा लेकर इधर-उधर घूम रहे हैं। तमाम दावेदारों ने कार्यालय प्रभारी को बायोडाटा दिया है। सब आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी से टिकट मांग रहे हैं।
चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही भाजपा से टिकट मांगने वालों की संख्या बढ़ गई है। गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल के दस जिलों में विधानसभा की 62 सीटें हैं। इन क्षेत्रों से अब तक एक हजार से ज्यादा दावेदारों के बायोडाटा आए हैं। हर विधानसभा क्षेत्र से 16 या फिर उससे ज्यादा दावेदार हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे क्षेत्रीय चुनाव प्रभारी, सह प्रभारी, क्षेत्रीय अध्यक्ष, क्षेत्रीय महामंत्री, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष दबाव में हैं। लगातार फोन भी घनघना रहे हैं।
समस्या से बचने के लिए ही कई पदाधिकारियों ने फोन तक बंद कर लिए हैं। सोशल मीडिया पर साफ लिख दिया है कि बायोडाटा क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी को उपलब्ध करा दिया जाए। जो दावेदार लखनऊ या फिर दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं, उन्हें भी लौटकर गोरखपुर आना पड़ रहा है। सबसे कहा जा रहा है कि क्षेत्रीय इकाई के पैनल में अपना नाम डलवा दीजिए। ऊपर का मामला देख लिया जाएगा। बस, इसी वजह से क्षेत्रीय इकाई के पदाधिकारियों की तलाश शुरू हो गई है।
ये हैं मानक
भाजपा में टिकट वितरण के मानक तय हैं। सबसे पहले जिला या फिर महानगर इकाई टिकट के दावेदारों का पैनल बनाकर क्षेत्रीय इकाई को भेजती है। क्षेत्रीय इकाई नामों पर मंथन करती है, फिर हर विधानसभा क्षेत्र से तीन-तीन नामों का पैनल फाइनल करके प्रदेश इकाई को भेज देती है। प्रदेश इकाई, यही पैनल राष्ट्रीय इकाई के पास भेजती है। इनमें से एक नाम पर मुहर लग जाती है।
सोशल मीडिया पर लाइव होकर मांग रहे वोट
रैली, जनसभा व रोड शो पर प्रतिबंध के बाद भाजपा विधायकों ने चुनाव प्रचार का तरीका बदल दिया है। अब सारा जोर डोर टू डोर व मैन टू मैन संपर्क अभियान पर है। जो समय बचता है, उसमें सोशल मीडिया पर सक्रिय हो जाते हैं। लाइव होकर क्षेत्र की जनता से सीधा संवाद करते हैं। सरकार व अपना कामकाज गिनाकर वोट मांग रहे हैं। यह सिलसिला मंगलवार से ही शुरू हुआ है।