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गोरखपुर पहुंचे हरियाणा में फंसे मजदूर, जांच के बाद भेजे जा रहे हैं घर
Mon, 27 Apr 2020 02:16 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 27 Apr 2020 02:16 PM IST
सार
- सहजनवां में स्वास्थ्य परीक्षण के बाद प्रशासन ने कराया नाश्ता-भोजन
- गांव के नजदीक वाले क्वारंटीन सेंटर में मजदूर किए जाएंगे क्वारंटीन
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हरियाणा से लौटने के बाद घर जाते लोग।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
हरियाणा में क्वारंटीन किए गए उत्तर प्रदेश के मजदूर सोमवार की सुबह गोरखपुर पहुंचे। सहजनवां के मुरारी इंटर कॉलेज में सभी को सैनिटाइज करने के साथ ही उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। अभी तक की जांच में सभी मजूदर स्वस्थ मिले हैं।
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नाश्ता-भोजन कराने के बाद गोरखपुर के मजदूरों का अलग-अलग तहसीलवार ग्रुप बनाया गया। इसके बाद उन्हें उनके गांव के पास ही बने क्वारंटीन सेंटरों के लिए भेज दिया गया, जहां वे 14 दिन तक क्वारंटीन किए जाएंगे।
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इसी तरह कुशीनगर, देवरिया और महराजगंज के मजदूरों को भी अलग-अलग बसों से उनके घर रवाना किया गया। जिला प्रशासन के मुताबिक मजदूरों के गोरखपुर पहुंचने का सिलसिला रविवार की आधी रात के बाद 2.30 बजे से ही शुरू हो गया है।
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8 बजे तक 9 बसों में कुल 229 लोग गोरखपुर के मुरारी इंटर कॉलेज में पहुंचे। यहां सभी को बसों से उतार कर जिला और तहसीलवार बैठाया गया। उसके बाद सभी की थर्मल स्कैनिंग हुई। उन्हें नाश्ता कराया गया।
मजदूरों ने सुनाई अपनी कहानी
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अनुज मालिक ने बताया कि गोरखपुर जिले के लोगों को नाश्ता करा कर उनके अपने तहसील स्थित क्वारंटीन सेंटर भेजा जा रहा है। कुल 40 बसें आने की सूचना है जिससे अकेले गोरखपुर में ही करीब 200 मजदूर आएंगे।
अमर उजाला से बातचीत में मजदूरों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि हरियाणा सरकार मदद कर रही थी लेकिन वह पर्याप्त नहीं था। रुपये खत्म हो गए थे, जबतक काम चला, ठेकेदार ने मजदूरी कराई फिर उसके बाद उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया।
कई मजदूरों को मजदूरी तक नहीं मिली। खाने तक के लाले पड़ गए। सभी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने तो घर पहुंच पाने की आस ही छोड़ दी थी। भला हो मुख्यमंत्री योगी का कि उन्होंने उन मजदूरों की भी सुध ली।
अमर उजाला से बातचीत में मजदूरों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि हरियाणा सरकार मदद कर रही थी लेकिन वह पर्याप्त नहीं था। रुपये खत्म हो गए थे, जबतक काम चला, ठेकेदार ने मजदूरी कराई फिर उसके बाद उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया।
कई मजदूरों को मजदूरी तक नहीं मिली। खाने तक के लाले पड़ गए। सभी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने तो घर पहुंच पाने की आस ही छोड़ दी थी। भला हो मुख्यमंत्री योगी का कि उन्होंने उन मजदूरों की भी सुध ली।