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कुशीनगर पंचायत चुनाव: पिछला प्रदर्शन भी नहीं दोहरा पाई भाजपा, निर्दलीयों के हाथ में बाजी
Mon, 10 May 2021 03:56 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर।
अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 10 May 2021 03:56 PM IST
सार
इस बार छह घोषित प्रत्याशी तथा भाजपा व हियुवा के एक-एक बागी जीते हैं चुनाव, सपा ने 12, बसपा ने पांच तथा अन्य दलों ने भी चार सीटों पर जीत दर्ज की है, 32 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीते हैं, अध्यक्ष पद के लिए होंगे महत्वपूर्ण
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कुशीनगर जिला पंचायत।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
कुशीनगर में चार मई मंगलवार की दोपहर तक जिला पंचायत सदस्य पद की तस्वीर साफ हो गई। कुल 61 में से 12 सीटें सपा के खाते में गईं, जबकि केवल छह सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार जीत हैं। इसके अलावा बसपा के चार, कांग्रेस के दो व अन्य छोटे दलों से भी चार उम्मीदवार जीतने में सफल रहे हैं। सर्वाधिक 32 निर्दलीयों ने इस चुनाव में जीत हासिल कर अध्यक्ष पद के लिए अपनी भूमिका को महत्वपूर्ण बना दिया है।
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वैसे तो पंचायत चुनाव में राजनैतिक दलों के सिंबल का प्रयोग नहीं होता है लेकिन इस बार दलों ने चुनाव लड़ने में बहुत रुचि दिखाई थी। भाजपा ने तो वार्डवार बैठकें कराई थीं। वहीं सपा ने सभी वार्ड के लिए प्रभारी नामित किया था। कांग्रेस व सपा ने भी टिकट आवंटन से लेकर प्रचार तक की रणनीति बनाई और प्रयास भी किया। लेकिन मतगणना के नतीजे इन दलों के लिए चौंकाने वाले रहे।
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भाजपा ने जिला पंचायत की सभी 61 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे लेकिन केवल छह लोग ही जीत पाए हैं। इसके अलावा भाजपा व हियुवा के एक-एक बागी भी चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। परंतु इनकी जीत भी पार्टी से अधिक व्यक्तिगत प्रभाव वाली रही हैं।
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इस मामले में सपा की स्थिति थोड़ी बेहतर है, क्यांकि पार्टी ने कुल 50 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिसमें से 12 चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। इसके अलावा दो विजेता ऐसे हैं जिन्हें सपा का खेमा अपना ही मान रहा है। बसपा ने भी 40 से अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिसमें से पांच उम्मीदवार जीत दर्ज करने में सफल रहे हैं।
इसके अलावा कांग्रेस के केवल दो ही उम्मीदवार जीते हैं जबकि इस पार्टी ने भी चार दर्जन से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। इस बार का चुनाव परिणाम भाजपा के लिहाज से इसलिए भी निराशाजनक है कि पार्टी ने वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में जिला पंचायत की 10 सीटों पर जीत हासिल किया था।
अंतर्कलह व बड़े नेताओं की दूरी रही अहम वजह
इसके अलावा हियुवा के तीन पदाधिकारी भी चुनाव जीते थे। इसका ही असर रहा कि यूपी में वर्ष 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा ने यहां जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी सपा से छीनकर अपने पाले में कर लिया था। परंतु इस बार के प्रदर्शन ने उसे उम्मीदवार उतारने लायक भी मौका नहीं दिया है।
ऐसे में इस बार अध्यक्ष पद की कुर्सी का सारा दारोमदार निर्दलीयों के रूख पर होगा। जो दल या उम्मीदवार उन्हें अपने पाले में करने में सफल होगा, उसका ही कुर्सी पर कब्जा होगा। इसीलिए अभी से निर्दलीय उम्मीदवारों की पूछ बढ़ गई है।
कोरोना संक्रमण काल के दौरान हुए पंचायत चुनाव के लिए टिकट बंटवारे के दौरान ही उपजा असंतोष सभी दलों के लिए भारी पड़ा। भाजपा में तो टिकट के लिए इस कदर मारामारी मची कि एक दर्जन से अधिक लोग बगावत कर पार्टी उम्मीदवारों के खिलाफ ताल ठोकने लगे।
अधिकांश खुद तो हारे ही पार्टी उम्मीदवारों की भी लुटिया डुबो दी। इसके अलावा सभी प्रमुख दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भी इस प्रचार से दूरी बनाए रखी। ऐसे में दल की बजाय उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि और मतदाताओं से संपर्क ने वोट के गणित पर काफी असर डाला।
ऐसे में इस बार अध्यक्ष पद की कुर्सी का सारा दारोमदार निर्दलीयों के रूख पर होगा। जो दल या उम्मीदवार उन्हें अपने पाले में करने में सफल होगा, उसका ही कुर्सी पर कब्जा होगा। इसीलिए अभी से निर्दलीय उम्मीदवारों की पूछ बढ़ गई है।
कोरोना संक्रमण काल के दौरान हुए पंचायत चुनाव के लिए टिकट बंटवारे के दौरान ही उपजा असंतोष सभी दलों के लिए भारी पड़ा। भाजपा में तो टिकट के लिए इस कदर मारामारी मची कि एक दर्जन से अधिक लोग बगावत कर पार्टी उम्मीदवारों के खिलाफ ताल ठोकने लगे।
अधिकांश खुद तो हारे ही पार्टी उम्मीदवारों की भी लुटिया डुबो दी। इसके अलावा सभी प्रमुख दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भी इस प्रचार से दूरी बनाए रखी। ऐसे में दल की बजाय उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि और मतदाताओं से संपर्क ने वोट के गणित पर काफी असर डाला।