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अखिलेश-योगी की अयोध्या चुनौती: राम मंदिर से हिंदुत्व तक के छाएंगे मुद्दे, अवध से लेकर पूर्वांचल होगा असर

Sun, 11 Oct 2026 03:35 PM IST
Vijay Singh Pundir टीपी शाही, अमर उजाला, गोरखपुर
टीपी शाही, अमर उजाला, गोरखपुर Published by: Vijay Singh Pundir Updated Sun, 11 Oct 2026 03:35 PM IST
सार

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. एस के द्विवेदी का कहना है कि यदि अखिलेश यादव ने चुनौती दी है और योगी आदित्यनाथ ने उसे स्वीकार किया है, तो दोनों को अयोध्या से चुनाव लड़ना चाहिए। इससे एक स्वस्थ जनतांत्रिक परंपरा स्थापित होगी।

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UP Election 2027 BJP CM Yogi Adityanath, Samajwadi Party Akhilesh Yadav Hindi News
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

विस्तार

अयोध्या की सियासत एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। सपा मुखिया अखिलेश यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़ने की चुनौती ने प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा छेड़ दी है। दोनों नेताओं के बयानों ने अयोध्या को संभावित सियासी मुकाबले के केंद्र में ला दिया है। यह महज दो नेताओं के बीच चुनावी चुनौती का मामला नहीं है। इसके पीछे राम मंदिर, हिंदुत्व, विकास और पूर्वांचल-अवध की राजनीतिक जमीन से जुड़े कई सवाल हैं।

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आठ अक्तूबर को अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। शनिवार को मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि अखिलेश यादव खुद अयोध्या से चुनाव लड़ें। अयोध्या जन्मभूमि आंदोलन से लेकर राम मंदिर निर्माण तक भाजपा की राजनीति का प्रमुख केंद्र रही है। गोरक्षपीठ का राम जन्मभूमि आंदोलन से पुराना जुड़ाव रहा है।  योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री रहते अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और शहर के विकास कार्यों ने भी इसे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रखा है।
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राजनीतिक विश्लेषक डॉ. एस के द्विवेदी का कहना है कि यदि अखिलेश यादव ने चुनौती दी है और योगी आदित्यनाथ ने उसे स्वीकार किया है, तो दोनों को अयोध्या से चुनाव लड़ना चाहिए। इससे एक स्वस्थ जनतांत्रिक परंपरा स्थापित होगी। जनता जो निर्णय देगी, उसका स्वागत होगा। अखिलेश यादव को सैफई से और योगी को गोरखपुर से निकल कर अयोध्या आना चाहिए। 
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प्रो. द्विवेदी की बात को पूर्वांचल की सियासत पर गहरी नजर रखने वाले गोरखपुर विश्वविद्यालय में राजनीतिशास्त्री डा. अमित उपाध्याय और आगे बढ़ाते हैं। डा. उपाध्याय कहते हैं कि अखिलेश और योगी के बयान चढ़ावा चोरी, वोट चोरी, जेन-जी से जुड़े मुद्दों से इतर परंपरागत सियासत को केंद्र में लाने वाले नजर आ रहे हैं। 

अखिलेश अयोध्या से चुनाव लड़ने आएंगे, ऐसा संभव नजर नहीं आता 
डॉ अमित उपाध्याय कहते हैं कि अखिलेश यादव अयोध्या चुनाव लड़ने आएंगे, ऐसा संभव नजर नहीं आता। लेकिन, योगी वहां से चुनाव लड़ने का विचार कर सकते हैं। इसके कई कारण हैं। पहला, गोरक्षपीठ राम मंदिर आंदाेलन व योगी राम मंदिर निर्माण से सीधे ताैर पर जुड़े रहे हैं। पूरा निर्माण कार्य उन्हीं के निर्देशन में हुआ है। अयोध्या में विकास के अनेक काम हुए हैं और लगातार हो रहे हैं। कानून-व्यवस्था योगी की बड़ी ताकत है। मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में कारसेवकों पर गोली चलाए जाने की वजह से सपा अयोध्या में विलेन की तरह देखी जाती है। योगी वहां से चुनाव लड़कर सपा को हिंदुत्व के मुद्दे पर घेर सकते हैं।


इसके अलावा योगी के अयोध्या चुनाव लड़ने से अयोध्या, वाराणसी की तरह सियासत के बड़े केंद्र के रूप में उभर आएगी। जिस तरह वाराणसी से पीएम नरेंद्र मोदी को लाकर भाजपा पूरे पूर्वांचल की सियासत को साधने का प्रयास करती है। उसी तरह योगी का केंद्र अयोध्या बनाकर भाजपा लखनऊ से पूरब और देवरिया से बहराइच तक की सियासत को साधने की सोच सकती है।

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