UP Election 2022: गोरखपुर में जीत को तरस रही कांग्रेस, 1985 में हासिल की थी जीत
अंतिम बार 1991 में कांग्रेस पार्टी के लालचंद निषाद ने कौड़ीराम विधानसभा से जीत हासिल की थी। इसके पहले लालचंद निषाद ने 1985 में भी कांग्रेस पार्टी से जीत हासिल की थी।
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कांग्रेस पिछले दो दशक से गोरखपुर के किसी भी विधानसभा क्षेत्र में जीत के लिए तरस रही है। अंतिम बार कांग्रेस पार्टी ने करीब दो दशक पहले 1991 में कौड़ीराम विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की थी। उस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी लालचंद निषाद ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की थी। इसके पहले भी लालचंद निषाद 1985 में कांग्रेस पार्टी से विधायक के तौर पर चुने गए थे।
1991 में लालचंद निषाद ने जनता पार्टी की गौरी देवी को करीब चार हजार वोट से हराकर जीत हासिल की थी। भारतीय जनता पार्टी के रमापति राम त्रिपाठी तीसरे स्थान पर रहे थे। इसके बाद कौड़ीराम विधानसभा क्षेत्र का अस्तित्व भी समाप्त हो गया। परिसीमन के बाद कौड़ीराम विधानसभा क्षेत्र गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र और बांसगांव विधानसभा क्षेत्र में शामिल गया।
उसके बाद से कांग्रेस पार्टी गोरखपुर जिले के कैंपियरगंज, पिपराइच, गोरखपुर शहर, गोरखपुर ग्रामीण, सहजनवां, चौरीचौरा, खजनी, बांसगांव और चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्रों में अब तक जीत के लिए तरस रही है। इनमें से किसी भी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी को दो दशक से जीत नसीब नहीं हुई है।
नेतृत्व के संकट से पार्टी के सामने बनी हुई है समस्या: लालचंद निषाद
लालचंद निषाद ने कहा कि लंबे अरसे से कांग्रेस पार्टी अपना खोया जनाधार फिर से हासिल करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है, लेकिन पिछले दो दशक के दौरान गोरखपुर जिले के किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर सकी है। यह सब नेतृत्व के संकट की वजह से हो रहा है। मंडल कमीशन के बाद उत्तर प्रदेश में नेतृत्व का संकट हो गया है। अब तक यह संकट बना हुआ है।
हालांकि, कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के नेतृत्व में पार्टी फिर से मजबूत हो रही है। इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की सीट भी बढ़ेगी। चंपा देवी पार्क में आयोजित रैली की वजह से गोरखपुर-बस्ती मंडल के कांग्रेसी इस बार जोश से भरे हुए हैं।