गोरखपुर महोत्सव में पहुंचे कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, बोले- 'देश हठ धर्मिता से नहीं चलता'
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प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि किसान आंदोलन के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा उसका पालन किया जाएगा, लेकिन कुछ लोग दुराग्रह और निजी हितों की वजह से किसान आंदोलन के नाम पर भ्रम फैला रहे हैं। जहां, सरकार कृषि कानूनों के बारे में आंदोलन करने वालों की हर बात सुनने के लिए तैयार है। वहीं आंदोलनकारी सरकार और सुप्रीम कोर्ट की बात सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश जिद और हठधर्मिता से नहीं चलता है।
गोरखपुर महोत्सव में मंगलवार को किसान मेला एवं प्रदर्शनी के उद्घाटन से पहले और युवा दिवस के मौके पर कृषि मंत्री ने सर्किट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि कृषि सुधार कानून किसानों के हित में हैं। इसे देश के अधिकांश हिस्सों के किसानों ने स्वीकार किया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने वही कानून बनाया है जिसका सुझाव स्वामीनाथन कमेटी, यूपीए सरकार और कृषि मंत्री के रूप में शरद पवार ने दिया था। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों की वजह से किसान न सिर्फ गरीब बन रहा था बल्कि आत्महत्या करने तक को मजबूर हो गया था। उनके साथ भाजपा नेता सत्येंद्र सिन्हा भी थे।
सपा को उत्तर प्रदेश के युवाओं ने कर दिया है खारिज
कृषि मंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद विश्व के युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा था कि आगे बढ़ते रहो, जब तक लक्ष्य न मिले तब तक चलते रहो। केंद्र और प्रदेश सरकारें इसे आत्मसात कर देश को समृद्धिशाली बनाने के लिए प्रयासरत हैं।
सपा की ओर से स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सपा तो भाजपा को फॉलो कर रही है। कृषि मंत्री ने कहा कि हमने 1948 से स्वामी विवेकानंद को युवाओं के प्रेरणा स्रोत के रूप स्वीकार किया है। हम लगातार 1948 से स्वामी विवेकानंद की जयंती मना रहे हैं। सपा को तो प्रदेश का युवा खारिज कर चुका है।
केंद्र एवं प्रदेश सरकार की गिनाई उपलब्धियां
कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने केंद्र और प्रदेश सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। बोले- केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में सरकारें किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लिए निरंतर काम कर रहीं हैं। पूववर्ती सरकारों के कार्यकाल की तरह अब किसानों को बीज और खाद के लिए लाइन नहीं लगाना पड़ता है, पहले उन्हें पुलिस की ज्यादती झेली पड़ती थी।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पीएम किसान सम्मान निधि योजना में 2.32 करोड़ किसानों के खातों में दो वर्षों से कम अवधि में 28 हजार करोड़ से अधिक की धनराशि दी गई है। प्रदेश में एमएसपी के आधार पर 70 वर्षों का रिकार्ड टूट गया है। 126 प्रतिशत धान की खरीद हो चुकी है। सपा की सरकार में जहां 2.50 लाख किसानों से खरीददारी होती थी, इस बार 11 लाख किसानों से धान की खरीद की गई है।
राज्य के कृषि विकास क्षेत्र की विकास परियोजनाओं के लिए 1206 करोड़ का प्रावधान किया गया जिसमें 653 करोड़ अब तक व्यय किया जा चुका है। कोरोना संक्रमण के बावजूद रबी अभियान के तहत 130 लाख हेक्टेयर भूमि के आच्छादन के लक्ष्य को हासिल किया गया है। गन्ना की कटाई के बाद यह आच्छादन 50 हजार हेक्टेयर और बढ़ जाएगा। कृषि यंत्र अनुुदान के लिए योगी सरकार के पहले सिर्फ 164 करोड़ की योजना थी सिर्फ 110 करोड़ का अनुदान मिला था। मौजूदा सरकार ने 304 करोड़ में अब तक 163 करोड़ कृषि यंत्र पर अनुदान दिया है।
10 हजार तक के कृषि यंत्रों पर मेले में मिलेगा अनुदान
21 जनवरी को शेष 219 विकास खंडों में कृषि कल्याण मिशन के कार्यक्रम संचालित होंगे। इस अभियान में किसान बंधु 10 हजार रुपये तक के कृषि यंत्र मेलों के स्टाल से खरीद लेंगे। मेले में ही बिल पोर्टल पर लोड कर डीबीटी कर भुगतान कर दिया जाएगा।
गोरखपुर मंडल के 33 विकासखंडों में बनेंगे किसान कल्याण केंद्र
उन्होंने कहा कि गोरखपुर मंडल के 33 विकासखंडों में किसान भवन के रूप में 80-80 लाख रुपये की लागत से किसान कल्याण केंद्र बनाए जा रहे हैं। गोरखपुर में नौ, देवरिया में 13, कुशीनगर में आठ और महराजगंज में चार कृषि कल्याण केंद्र बनेंगे। ऐसे में किसानों को एक छत के नीचे बीज और कीटनाशक मिल सकेगा।
गन्ना शोध संस्थान गोरखपुर को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत 2.50 करोड़ रुपये गन्ना विकास एवं शोध की गतिविधियों के लिए मिले हैं। 8.30 करोड़ रुपये से कुशीनगर के बरवाफार्म पर एक्सिलेंस सेंटर केला पर बनाया जाएगा। देवरिया के बैतालपुर में 5.50 करोड़ रुपये पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए यांत्रिक प्रशिक्षण केंद्र बनाया जा रहा है।