DDU News: 40 प्रतिशत क्रेडिट ऑनलाइन अर्जित करने का विकल्प देगा विश्वविद्यालय
डीडीयू कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय में ऑनलाइन अध्ययन को प्रोत्साहित करने के लिए, गोरखपुर विश्वविद्यालय ने स्वयं-एनपीटेल के स्थानीय चैप्टर की स्थापना की है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को विभिन्न उद्योगों में रोजगार के योग्य बनाना और उच्च शिक्षा के लिए उनकी संभावनाओं को बढ़ाना है।
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मानक पर ऑनलाइन शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में आईआईटी समर्थित स्वयं-एनपीटेल के लोकल चैप्टर की स्थापना की है। इस चैप्टर के जरिये विद्यार्थी ऑनलाइन पाठ्यक्रम का लाभ ले सकेंगे। स्नातक-परास्नातक के विद्यार्थियों को 40 प्रतिशत तक क्रेडिट आनलाइन पाठ्यक्रमों के अर्जित करने का अवसर देने की विश्वविद्यालय की योजना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का यही उद्देश्य भी है।
स्वयं-एनपीटेल एक ऐसा पोर्टल है, जो विज्ञान, मानविकी और अन्य विषयों के विविध पाठ्यक्रम ऑनलाइन उपलब्ध कराता है। पाठ्यक्रमों में वीडियो व्याख्यान, डाउनलोड करने योग्य पठन सामग्री, स्व-मूल्यांकन परीक्षण और ऑनलाइन चर्चा के लिए मंच शामिल हैं।
स्थानीय चैप्टर विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए सलाहकारों की पहचान करेगा, जिससे छात्रों की सक्रिय भागीदारी और समय पर असाइनमेंट जमा करना सुनिश्चित हो सके। यह पाठ्यक्रम मामूली शुल्क पर वैकल्पिक प्रमाणन परीक्षा वाले पाठ्यक्रमों के लिए नामांकन प्रदान करती है। इसमें नामांकन शुल्क नहीं लगता।
प्रो. राजर्षि गौड़ को सौंपी गई है जिम्मेदारी
स्वयं-एनपीटेल पोर्टल के संचालन की जिम्मेदारी जैव प्रौद्योगिकी विभाग के आचार्य प्रो. राजर्षि कुमार गौड़ को सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से विद्यार्थी 12 सप्ताह तक के पाठ्यक्रमों का अध्ययन कर सकते हैं। ये पाठ्यक्रम उपकरणों और प्रौद्योगिकियों से जुड़े हुए हैं। सभी पाठ्यक्रम ऐसे हैं, जो विद्यार्थियों को रोजगार की राह दिखाएंगे। यह पोर्टल विभिन्न पाठ्यक्रमों के जरिये कौशल विकास को बढ़ावा देने वाला है।
डीडीयू कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय में ऑनलाइन अध्ययन को प्रोत्साहित करने के लिए, गोरखपुर विश्वविद्यालय ने स्वयं-एनपीटेल के स्थानीय चैप्टर की स्थापना की है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को विभिन्न उद्योगों में रोजगार के योग्य बनाना और उच्च शिक्षा के लिए उनकी संभावनाओं को बढ़ाना है।