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Gorakhpur News: सीईटीपी को लेकर गीडा में असमंजस, खर्च का बोझ कम करने की मांग कर रहे उद्यमी
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गोरखपुर। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) में चार एमएलडी क्षमता के कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की स्थापना की राह आसान नहीं दिख रही है। 93 करोड़ रुपये के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को लेकर जहां जिम्मेदार विभाग संचालन की व्यवस्था तय करने में जुटे हैं, वहीं उद्यमी भी इसके खर्च का बोझ कम करने की मांग कर रहे हैं।
सीईटीपी के संचालन को लेकर जून में हुई एसपीवी की बैठक की कार्यवृत्ति अब जारी हुई है। इसमें तय किया गया कि प्रदूषित जल छोड़ने वाली औद्योगिक इकाइयों को हर साल चिह्नित किया जाएगा। बैठक में प्रशासन, गीडा, प्रदूषण नियंत्रण विभाग, कंसल्टेंसी कंपनी और उद्यमियों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। प्रदूषित पानी छोड़ने वाली 55 इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी बात रखी। बैठक में कंसल्टेंसी कंपनी की ओर से तैयार डीपीआर पर चर्चा हुई, जिसमें पहले चरण में दो एमएलडी क्षमता का सीईटीपी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने बताया कि प्रदूषित जल छोड़ने वाली इकाइयों की सूची वर्ष 2024 के आधार पर तैयार की गई है। उद्यमियों ने सुझाव दिया कि हर साल सर्वे कर वास्तविक प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों की पहचान की जाए। उद्यमियों का कहना है कि सीईटीपी का संचालन जरूरी है लेकिन खर्च का बोझ इतना अधिक न हो कि उद्योगों के संचालन पर असर पड़े। बैठक में सहमति बनी कि सीईटीपी के निर्माण और संचालन का खर्च प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों से लिया जाएगा। यह भुगतान प्रति किलोलीटर की दर से किया जाएगा। चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष आरएन सिंह ने कहा कि उद्यमी सीईटीपी स्थापना के पक्ष में हैं लेकिन लागत को व्यावहारिक रखने की जरूरत है ताकि उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़े।
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सीईटीपी के संचालन को लेकर जून में हुई एसपीवी की बैठक की कार्यवृत्ति अब जारी हुई है। इसमें तय किया गया कि प्रदूषित जल छोड़ने वाली औद्योगिक इकाइयों को हर साल चिह्नित किया जाएगा। बैठक में प्रशासन, गीडा, प्रदूषण नियंत्रण विभाग, कंसल्टेंसी कंपनी और उद्यमियों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। प्रदूषित पानी छोड़ने वाली 55 इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी बात रखी। बैठक में कंसल्टेंसी कंपनी की ओर से तैयार डीपीआर पर चर्चा हुई, जिसमें पहले चरण में दो एमएलडी क्षमता का सीईटीपी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
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प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने बताया कि प्रदूषित जल छोड़ने वाली इकाइयों की सूची वर्ष 2024 के आधार पर तैयार की गई है। उद्यमियों ने सुझाव दिया कि हर साल सर्वे कर वास्तविक प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों की पहचान की जाए। उद्यमियों का कहना है कि सीईटीपी का संचालन जरूरी है लेकिन खर्च का बोझ इतना अधिक न हो कि उद्योगों के संचालन पर असर पड़े। बैठक में सहमति बनी कि सीईटीपी के निर्माण और संचालन का खर्च प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों से लिया जाएगा। यह भुगतान प्रति किलोलीटर की दर से किया जाएगा। चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष आरएन सिंह ने कहा कि उद्यमी सीईटीपी स्थापना के पक्ष में हैं लेकिन लागत को व्यावहारिक रखने की जरूरत है ताकि उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़े।
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