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सतर्क रहे: बिना सलाह एंटीबायोटिक खाना यानी सामान्य बीमारी को और गंभीर बनाना

Tue, 26 Sep 2023 02:20 PM IST
vivek shukla अमर उजालर ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजालर ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 26 Sep 2023 02:20 PM IST
सार

चिकित्सक डॉ. ओंकार राय ने कहा कि इस वक्त जो बुखार हो रहा है, उनका लक्षण के आधार पर उपचार किया जा रहा है। प्लेटलेट्स कम होने या थकान महासूस होने पर घर में रहकर इलाज की बजाय, अस्पताल में भर्ती होना अधिक सुरक्षित है। मच्छरों से बचाव जरूरी है। मरीज को मल्टीविटामिन और तरल पदार्थ अधिक देना है।

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Unchecked use of antibiotics in fever is making the body weak
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मौसम में उतार-चढ़ाव के चलते इस वक्त वायरल फीवर का असर बहुत तेज है। डेंगू भी एक प्रकार का वायरल फीवर ही है। इसके अलावा स्क्रब टाइफस (परजीवी के काटने से होने वाला एक प्रकार का बुखार) के भी केस मिल रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, बुखार के इलाज के लिए केवल पैरासिटामॉल ही सुरक्षित है।

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एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग तभी करें, जब खून की जांच के बाद डॉक्टर ऐसा करने की सलाह दें। अपने मन से एंटीबायोटिक खाना मतलब सामान्य बीमारी को भी गंभीर बनाना है। डेंगू जैसे लक्षण होने पर तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल जाएं, जहां जांच व इलाज भी फ्री है।
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जिला अस्पताल के फिजिशियन और डेंगू वार्ड के नोडल अफसर डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि पूर्वांचल में वायरल फीवर पहले से ही हर साल इस मौसम में होता रहा है। इस बार यह और अधिक प्रभावी है। डेंगू भी एक प्रकार का वायरल फीवर ही है। अगर बुखार तेज है और सिर और मांसपेशियों में भी दर्द है, थकान महसूस हो रही है, तो तुरंत नजदीकी अस्पताल में जांच कराएं। यह डेंगू के संभावित लक्षण हो सकते हैं।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज की डॉ. नम्रता सिंह बताती हैं कि अक्सर उन मरीजों को भी हैवी डोज एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं, जिन्हें इनकी जरूरत नहीं होती। वायरल फीवर में कमजोरी और डिहाइड्रेशन तो होती ही है, जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक दवाओं से भी मरीज को कमजोरी महसूस होने लगती है। इसीलिए मरीजों को बार-बार यह सुझाव दिया जाता है कि बुखार होने पर केवल पैरासिटामॉल 500 एमजी ही लें। लगातार बुखार रहने पर इसे छह-छह घंटे पर चार बार (अधिकतम 2000 एमजी) तक ले सकते हैं।

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डेंगू के अलावा स्क्रब टाइफस के भी केस मिल रहे

आरएमआरसी वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार पांडेय ने कहा कि जांच में डेंगू के अलावा स्क्रब टाइफस के भी केस मिल रहे हैं। अभी वायरस का असर कुछ दिन और बना रहेगा। इसलिए लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। पिछले साल इसकी जांच कराई गई थी। इस साल जिन नमूनों का परीक्षण किया गया है, उसमें अभी कुछ नया बदलाव नहीं दिखा है।

मल्टी विटामिन और तरल पदार्थ अधिक लें
चिकित्सक डॉ. ओंकार राय ने कहा कि इस वक्त जो बुखार हो रहा है, उनका लक्षण के आधार पर उपचार किया जा रहा है। प्लेटलेट्स कम होने या थकान महासूस होने पर घर में रहकर इलाज की बजाय, अस्पताल में भर्ती होना अधिक सुरक्षित है। मच्छरों से बचाव जरूरी है। मरीज को मल्टीविटामिन और तरल पदार्थ अधिक देना है।

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जांच के बाद ही लें दवाएं

चिकित्सक डॉ. अखिलेश सिंह ने कहा कि इस वक्त वायरल फीवर तेजी से फैल रहा है। खुद को मच्छरों से बचाने का उपाय करें। कमजोरी, थकान महसूस होने पर बिना डॉक्टर से सलाह लिए कोई दवा न लें। बुखार के मरीज को परिवार के बाकी लोगों से अलग रखें। वायरल बुखार के बहुत से प्रकार हैं, इसलिए इलाज के लिए जांच जरूरी है।

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ये करें उपाय

  • मरीज के ऊर्जा स्तर को बढ़ाए रखने के लिए अधिक से अधिक तरल पदार्थ दें।
  • ओआरएस और नारियल पानी भी बेहतर विकल्प है।
  • डिहाइड्रेशन न होने पाए, इसके लिए नमक, चीनी और पानी का घोलकर बनाकर पिलाते रहें।
  • मरीज को अधिक से अधिक आराम करने दें।
  • जिसे बुखार हुआ है, उसे अनिवार्य रूप से मच्छरदानी में ही सुलाएं, जिससे कि मच्छरों के जरिए बुखार दूसरों में न फैले।
  • एंटीबायोटिक दवाएं तभी खाएं, जब जांच के बाद डॉक्टर इसके लिए सलाह दें।
  • तीन दिन से अधिक दिन बुखार रहने पर डेंगू की जांच अवश्य कराएं।
  • बुखार होने पर सिर समेत पूरे शरीर को ठंडे पानी से पोछें, ताकि तापमान नियंत्रित रहे।
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