{"_id":"64002dfc5ffa65a0410db80c","slug":"umesh-pal-hatyakand-guddu-muslim-was-the-henchman-of-gorakhpur-terrorist-dilshad-2023-03-02","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Umesh Pal Hatyakand: गोरखपुर के आतंकी दिलशाद का गुर्गा था गुड्डू मुस्लिम, परवेज की मौत के बाद अतीक के करीब आया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Umesh Pal Hatyakand: गोरखपुर के आतंकी दिलशाद का गुर्गा था गुड्डू मुस्लिम, परवेज की मौत के बाद अतीक के करीब आया
Thu, 02 Mar 2023 11:01 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 02 Mar 2023 11:01 AM IST
सार
प्रयागराज हत्याकांड से चर्चा में आया गुड्डू मुस्लिम गोरखपुर के आतंकी दिलशाद का गुर्गा था। मेनका टॉकिज बम ब्लास्ट के अभियुक्त परवेज के साथ गुड्डू मुस्लिम ने शहर में कई घटनाओंं को अंजाम दिया था। परवेज की मौत के बाद गुड्डू ने अतीक अहमद गिरोह का दामन थाम लिया था।
विज्ञापन
Umesh Pal Hatyakand
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रयागराज हत्याकांड से चर्चा में आया गुड्डू, कभी गोरखपुर निवासी आतंकी दिलशाद मिर्जा बेग का गुर्गा था। गोरखपुर के कोतवाली इलाके में इसी आतंकी के रिश्तेदार सहदाब की मदद से किराये के मकान में रहता था। इस गिरोह में मेनका टॉकिज (वर्तमान में एडी मॉल) बम ब्लास्ट का आरोपी परवेज टांडा भी शामिल था।
परवेज की मौत के बाद गुड्डू ने गोरखपुर छोड़कर अतीक गिरोह का दामन थाम लिया था। सेवानिवृत्त सीओ शिवपूजन यादव बताते हैं कि दिलशाद बेग आईएसआई के संपर्क में आने के बाद गोरखपुर छोड़कर नेपाल में बस गया था। उसने वहां पर भी अपराध शुरू कर दिया था।
गोरखपुर से चोरी की गाड़ियों को नेपाल में खपाने और यहां से भागे बदमाशों को शरण दिलाने का काम वही करता था। वर्ष 1990 से 2000 की दशक तक इन सबका दबदबा रहा। दिलशाद की मौत के बाद परवेज ने भी नेपाल में ठिकाना बना लिया। उन्होंने बताया कि परवेज की मौत के बाद गुड्डू, गोरखपुर और आसपास अपराध करना छोड़कर अतीक अहमद की गिरोह में शामिल हो गया।
विज्ञापन
मेनका टॉकिज में परवेज ने कराया था ब्लास्ट, गुड्डू का आया था नाम
गोरखपुर में 90 के दशक में विजय चौक स्थित मेनका टॉकिज में कुख्यात बदमाश परवेज टाडा ने बम ब्लास्ट कराया था। उस वक्त परवेज टांडा का आतंक चरम पर था और गुड्डू उसका सबसे करीबी था। बताया जाता है कि इस घटना में भी परवेज के लिए बम गुड्डू मुस्लिम ने ही मुहैया कराया था। यही नहीं, गुड्डू मुस्लिम ने परवेज के इशारे पर गोरखपुर और आसपास के इलाकों में कई घटनाओं को अंजाम दिया था।
विज्ञापन
परवेज की मौत के बाद गुड्डू ने गोरखपुर छोड़कर अतीक गिरोह का दामन थाम लिया था। सेवानिवृत्त सीओ शिवपूजन यादव बताते हैं कि दिलशाद बेग आईएसआई के संपर्क में आने के बाद गोरखपुर छोड़कर नेपाल में बस गया था। उसने वहां पर भी अपराध शुरू कर दिया था।
विज्ञापन
गोरखपुर से चोरी की गाड़ियों को नेपाल में खपाने और यहां से भागे बदमाशों को शरण दिलाने का काम वही करता था। वर्ष 1990 से 2000 की दशक तक इन सबका दबदबा रहा। दिलशाद की मौत के बाद परवेज ने भी नेपाल में ठिकाना बना लिया। उन्होंने बताया कि परवेज की मौत के बाद गुड्डू, गोरखपुर और आसपास अपराध करना छोड़कर अतीक अहमद की गिरोह में शामिल हो गया।
विज्ञापन
मेनका टॉकिज में परवेज ने कराया था ब्लास्ट, गुड्डू का आया था नाम
गोरखपुर में 90 के दशक में विजय चौक स्थित मेनका टॉकिज में कुख्यात बदमाश परवेज टाडा ने बम ब्लास्ट कराया था। उस वक्त परवेज टांडा का आतंक चरम पर था और गुड्डू उसका सबसे करीबी था। बताया जाता है कि इस घटना में भी परवेज के लिए बम गुड्डू मुस्लिम ने ही मुहैया कराया था। यही नहीं, गुड्डू मुस्लिम ने परवेज के इशारे पर गोरखपुर और आसपास के इलाकों में कई घटनाओं को अंजाम दिया था।
परवेज की मौत गुड्डू को अतीक के नजदीक लाई
गोरखपुर से फरार अपराधी परवेज टांडा ने नेपाल में जाली नोटों के कारोबार से खूब पैसा कमाया। वह नेपाल में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। इसी बीच 25 दिसंबर 2009 को नेपाल में परवेज की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद परवेज का गैंग खत्म हो गया। वहीं, उसका करीबी गुड्डू मुस्लिम ने प्रयागराज की ओर अपना रुख कर लिया। प्रयागराज में वह अतीक के संपर्क में आया। गोरखपुर एसटीएफ ने भी एक बार गुड्डू मुस्लिम को गिरफ्तार किया था। तब अतीक ने ही पैरवी कर उसे जेल से बाहर निकालने में मदद की थी।
जेल की बैरक नंबर-2 में रहा है गुड्डू
जेल प्रशासन के मुताबिक, गुड्डू साल 2001 में गोरखपुर जेल के दो नंबर बैरक में बंद था। इस बैरक को कच्ची बैरक भी कहा जाता था। उस समय परवेज टांडा के साथ गुड्डू मुस्लिम और गोरखपुर के कई कुख्यात बदमाश भी यहां बंद थे।
जेल प्रशासन के मुताबिक, गुड्डू साल 2001 में गोरखपुर जेल के दो नंबर बैरक में बंद था। इस बैरक को कच्ची बैरक भी कहा जाता था। उस समय परवेज टांडा के साथ गुड्डू मुस्लिम और गोरखपुर के कई कुख्यात बदमाश भी यहां बंद थे।