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Gorakhpur News: डीडीयू में नये सत्र से लागू होगा यूजीसी का पीएचडी प्रवेश नियम
Sat, 30 Mar 2024 01:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 30 Mar 2024 01:59 AM IST
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गोरखपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने शोध में प्रवेश को लेकर नया नियम बनाया है। गोरखपुर विश्वविद्यालय में यह नियम अगले सत्र से लागू होगा। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को अपने शोध अध्यादेश में संशोधन करना होगा। हालांकि, विश्वविद्यालय का नया शोध अध्यादेश भी अभी राजभवन में स्वीकृत के लिए लंबित है।
यूजीसी के नए अध्यादेश के मुताबिक बदलाव में विश्वविद्यालय को अभी वक्त लगेगा। साथ ही विश्वविद्यालय में अभी 2023-24 सत्र का पीएचडी प्रवेश नहीं हो सका है, इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन पीएचडी प्रवेश के नए नियम को इस वर्ष लागू नहीं करेगा। इसको लागू करने का सत्र 2024-25 निर्धारित किया है। ऐसे में विश्वविद्यालय को पिछले वर्ष में पीएचडी प्रवेश न ले पाने का फायदा मिल गया है। इसी को आधार बनाकर विश्वविद्यालय जल्द अंतिम पीएचडी प्रवेश परीक्षा कराने की तैयारी में हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने काफी मशक्कत के बाद नया शोध अध्यादेश तैयार किया था। विद्या परिषद व कार्य परिषद की स्वीकृति के बाद अंतिम स्वीकृति के लिए राजभवन भेजा था। अभी कुलाधिपति की स्वीकृति का विश्वविद्यालय प्रशासन को इंतजार ही था कि शोध प्रवेश को लेकर यूजीसी का नया परिपत्र जारी हो गया, जिसमें नेट (नेशनल एलिजिबिल्टी टेस्ट) के नंबर के आधार पर पीएचडी में प्रवेश लेने के निर्देश दिए गए हैं। इसके जरिये यूजीसी ने देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में पीएचडी प्रवेश की प्रक्रिया का मानकीकरण कर दिया है।
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तीन कैटेगरी में घोषित होगा नेट का परिणाम
यूजीसी के नए अध्यादेश के मुताबिक पीएचडी प्रवेश को लेकर अब नेट का परिणाम तीन कैटेगरी में घोषित किया जाएगा। अबतक यह दो कैटेगरी में ही घोषित होता था। जिन अभ्यर्थियों का नेट परसेंटाइल अधिक होगा, वह कैटेगरी-1 में आएंगे। ऐसे अभ्यर्थी जेआरएफ, असिस्टेंट प्रोफेसर और फेलोशिप के साथ पीएचडी में प्रवेश के योग्य होंगे। कैटेगरी-2 में मध्यम परसेंटाइल वाले अभ्यर्थी होंगे। यह केवल असिस्टेंट प्रोफेसर और पीएचडी में प्रवेश के योग्य माने जाएंगे। अंतिम व कैटेगरी-3 के अभ्यर्थी सिर्फ पीएचडी में प्रवेश के योग्य होंगे। नेट क्वालिफाई होने के जारी प्रमाण-पत्र में अभ्यर्थी की श्रेणी दर्ज कर रहेगी। पीएचडी प्रवेश के दौरान 70 प्रतिशत अंक नेट से लिए जाएंगे, जबकि 30 प्रतिशत के लिए विश्वविद्यालय काे साक्षात्कार लेने का अधिकार होगा।
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कोट...
यूजीसी के नए अध्यादेश के आधार पर विश्वविद्यालय के शोध अध्यादेश में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर संशोधन करना होगा। फिलहाल, विश्वविद्यालय की ओर से तैयार किया गया शोध अध्यादेश स्वीकृति के लिए राजभवन भेजा गया है। वहां से स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही उसमें एक बार फिर संशोधन की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। इसमें समय लगेगा।विश्वविद्यालय अभी बीते सत्र के लिए पीएचडी प्रवेश नहीं ले सका है। इसके लिए प्रवेश विश्वविद्यालय के नियमावली के अनुसार ही होगा, क्योंकि यूजीसी ने अपना नया नियम नए सत्र से लागू करने को कहा है।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू
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यूजीसी के नए अध्यादेश के मुताबिक बदलाव में विश्वविद्यालय को अभी वक्त लगेगा। साथ ही विश्वविद्यालय में अभी 2023-24 सत्र का पीएचडी प्रवेश नहीं हो सका है, इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन पीएचडी प्रवेश के नए नियम को इस वर्ष लागू नहीं करेगा। इसको लागू करने का सत्र 2024-25 निर्धारित किया है। ऐसे में विश्वविद्यालय को पिछले वर्ष में पीएचडी प्रवेश न ले पाने का फायदा मिल गया है। इसी को आधार बनाकर विश्वविद्यालय जल्द अंतिम पीएचडी प्रवेश परीक्षा कराने की तैयारी में हैं।
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विश्वविद्यालय प्रशासन ने काफी मशक्कत के बाद नया शोध अध्यादेश तैयार किया था। विद्या परिषद व कार्य परिषद की स्वीकृति के बाद अंतिम स्वीकृति के लिए राजभवन भेजा था। अभी कुलाधिपति की स्वीकृति का विश्वविद्यालय प्रशासन को इंतजार ही था कि शोध प्रवेश को लेकर यूजीसी का नया परिपत्र जारी हो गया, जिसमें नेट (नेशनल एलिजिबिल्टी टेस्ट) के नंबर के आधार पर पीएचडी में प्रवेश लेने के निर्देश दिए गए हैं। इसके जरिये यूजीसी ने देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में पीएचडी प्रवेश की प्रक्रिया का मानकीकरण कर दिया है।
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तीन कैटेगरी में घोषित होगा नेट का परिणाम
यूजीसी के नए अध्यादेश के मुताबिक पीएचडी प्रवेश को लेकर अब नेट का परिणाम तीन कैटेगरी में घोषित किया जाएगा। अबतक यह दो कैटेगरी में ही घोषित होता था। जिन अभ्यर्थियों का नेट परसेंटाइल अधिक होगा, वह कैटेगरी-1 में आएंगे। ऐसे अभ्यर्थी जेआरएफ, असिस्टेंट प्रोफेसर और फेलोशिप के साथ पीएचडी में प्रवेश के योग्य होंगे। कैटेगरी-2 में मध्यम परसेंटाइल वाले अभ्यर्थी होंगे। यह केवल असिस्टेंट प्रोफेसर और पीएचडी में प्रवेश के योग्य माने जाएंगे। अंतिम व कैटेगरी-3 के अभ्यर्थी सिर्फ पीएचडी में प्रवेश के योग्य होंगे। नेट क्वालिफाई होने के जारी प्रमाण-पत्र में अभ्यर्थी की श्रेणी दर्ज कर रहेगी। पीएचडी प्रवेश के दौरान 70 प्रतिशत अंक नेट से लिए जाएंगे, जबकि 30 प्रतिशत के लिए विश्वविद्यालय काे साक्षात्कार लेने का अधिकार होगा।
कोट...
यूजीसी के नए अध्यादेश के आधार पर विश्वविद्यालय के शोध अध्यादेश में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर संशोधन करना होगा। फिलहाल, विश्वविद्यालय की ओर से तैयार किया गया शोध अध्यादेश स्वीकृति के लिए राजभवन भेजा गया है। वहां से स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही उसमें एक बार फिर संशोधन की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। इसमें समय लगेगा।विश्वविद्यालय अभी बीते सत्र के लिए पीएचडी प्रवेश नहीं ले सका है। इसके लिए प्रवेश विश्वविद्यालय के नियमावली के अनुसार ही होगा, क्योंकि यूजीसी ने अपना नया नियम नए सत्र से लागू करने को कहा है।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू