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डीडीयू : बदलते दौर के मनोविज्ञान का रहस्य समझेंगे मनोविज्ञान के छात्र
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के परास्नातक के छात्र अब बदलते दौर के मनोवैज्ञानिक रहस्यों को समझेंगे। इसके लिए परास्नातक तृतीय और चतुर्थ सेमस्टर (द्वितीय वर्ष) के पाठ्यक्रमों में वैकल्पिक विषयक के रूप में जोड़े जाएंगे।
इंटरनेट के इस दौर में अपराध की बदलती प्रवृत्तियों, बढ़ते तनाव, टूटते संबंधों और मानसिक असंतुलन की दिशा में नए मनोवैज्ञानिक तथ्य सामने आ रहे हैं। इनकी गंभीरता और चुनौतियों को देखते हुए डीडीयू प्रशासन ने फॉरेंसिक मनोविज्ञान और भारतीय मनोविज्ञान को पाठ्यक्रम में शामिल करने की तैयारी की है। इससे छात्र वर्तमान दौर के मनोवैज्ञानिक तथ्यों को तो समझेंगे ही पूर्व और वर्तमान मनोविज्ञान को देखते हुए भविष्य को लेकर भी अनुमान लगा सकेंगे।
इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक और समाजोपयोगी शिक्षा देना जरूरी है। समय और समाज की जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रमों में बदलाव किए जा रहे हैं। इन दोनों पाठ्यक्रमों से छात्र इस दौर के मनोवैज्ञानिक रहस्यों को समझ सकेंगे।
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इंटरनेट के इस दौर में अपराध की बदलती प्रवृत्तियों, बढ़ते तनाव, टूटते संबंधों और मानसिक असंतुलन की दिशा में नए मनोवैज्ञानिक तथ्य सामने आ रहे हैं। इनकी गंभीरता और चुनौतियों को देखते हुए डीडीयू प्रशासन ने फॉरेंसिक मनोविज्ञान और भारतीय मनोविज्ञान को पाठ्यक्रम में शामिल करने की तैयारी की है। इससे छात्र वर्तमान दौर के मनोवैज्ञानिक तथ्यों को तो समझेंगे ही पूर्व और वर्तमान मनोविज्ञान को देखते हुए भविष्य को लेकर भी अनुमान लगा सकेंगे।
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इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक और समाजोपयोगी शिक्षा देना जरूरी है। समय और समाज की जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रमों में बदलाव किए जा रहे हैं। इन दोनों पाठ्यक्रमों से छात्र इस दौर के मनोवैज्ञानिक रहस्यों को समझ सकेंगे।
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