Gorakhpur News: चिड़ियाघर प्रबंधन के इस खास प्रयास से नहीं खलेगी मरियम की कमी- जानिए क्या योजना बनाई
बब्बर शेर को लाने की स्वीकृति 2018 में ही मिली थी, लेकिन अनुमित की अवधि सिर्फ छह माह की ही होती है। ऐसे में चिड़ियाघर प्रबंधन की तरफ से सितंबर में ही सीजेडए को रिमाइंडर (अनुस्मारक) लेटर भेज कर पुन: अनुमित मांगी गई थी। इसी अनुमति का इंतजार था। अब, मरियम के निधन के बाद उम्मीद है कि इस अनुमति की प्रक्रिया को पूरा कर जल्द ही बब्बर शेर गोरखपुर लाया जाएगा।
2018 में गुजरात के सक्करबाग चिड़ियाघर से 11 बब्बर शेरों को यूपी लाने की स्वीकृति मिली थी। इनमें चार को गोरखपुर चिड़ियाघर और सात को इटावा लायन सफारी लाया जाना था। पहले चरण में कुल सात बब्बर शेर लाए गए, जिनमें एक की मौत हो गई। जबकि, दो शेर गोरखपुर चिड़ियाघर भेज दिए गए थे।
बचे बब्बर शेरों को लाए जाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा था। अब उम्मीद है कि यह प्रक्रिया तेज कर दी जाएगी। सक्करबाग प्राणि उद्यान में भेड़ियों की संख्या अच्छी खासी है। ऐसे में पूरी संभावना है कि सक्करबाग से भेड़ियों को भी प्राणि उद्यान में लाने में सफलता मिले।
पिछले वर्ष सक्करबाग चिड़ियाघर में भेड़ियों का प्रजनन हुआ था। इसके बाद प्रबंधन पूरी तरह आश्वस्त है कि सरकार और चिड़ियाघर प्रबंधन से वार्ता कर वहां से जोड़े में भेड़िए भी लाए जा सकेंगे। प्रबंधन ने बचे दोनों बब्बर शेर और भेड़ियों को साथ लाए जाने की योजना तैयार की।
वर्ष 2023 के नवंबर में रिमाइंडर पत्र सीजेडए को भेज भी दिया गया। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में फिर से पत्र भेजने के साथ उन्हें लाए जाने की प्रकिया में तेजी लाई जाएगी।
किसी भी चिड़ियाघर से वन्य साझेदारी के तहत पारस्परिक अभिवहन के जरिए ही वन्य जीव लाए जाते हैं। इसके लिए संबंधित राज्य के चिड़ियाघर को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को पत्र लिखकर अनुमति लेनी होती। इसके अलावा संबंधित चिड़ियाघर को भी पारस्परिक अभिवहन के तहत वहां से लिए जाने वाले वन्य जीव और दिए जाने वाले वन्य जीव की सूचना दी जाती है।
इसकी अवधि छह माह की होती है। इसके बाद फिर से इसे तैयार कर भेजा जाता है। गोरखपुर चिड़ियाघर से पारस्परिक अभिवहन का समय छह माह पूरा होने के बाद फिर से पत्राचार किया जाएगा।
चार शेर लायन सफारी, इटावा में रखते हुए दो शेर (नर, पटौदी और मादा, मरियम) को गोरखपुर चिड़ियाघर भेज दिया गया। ऐसे में अब स्वीकृत बब्बर शेरों में से दो गोरखपुर लाए जाएंगे। प्रबंधन की टीम जब इन्हें लाएगी तो उसी वक्त भेड़ियों को लाए जाने की अनुमित लेकर उन्हें भी गोरखपुर चिड़ियाघर ला दिया जाएगा।
गुजरात का मौसम गर्म होता है। ऐसे में वन्यजीवों को नवंबर के अंत तक या मार्च में लाकर यहां परिवेश में ढलने का अनुकूल माहौल देना होता है, लेकिन अब गर्मी शुरू हो गई है। अगर कागजी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी तो उम्मीद है कि इसी 15 दिन के अंदर इन्हें ला दिया जाएगा।
प्रदेश सरकार के वन मंत्री अरुण सक्सेना ने बताया कि बब्बर शेरनी की उम्र औसत से अधिक हो गई थी। 16 वर्ष सामान्य उम्र मानी जाती है। वन्य जीवों के बेहतर संरक्षण और संवर्धन की दिशा में चिड़ियाघर की टीम बेहतर जिम्मेदारी निभा रही है।
अब जल्द ही बाकी बब्बर शेर लाए जाने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। अनुमति पहले ही हो चुकी है बस उनके अभिवाहन और कागजी कुछ खानापूर्ति की जरूरत है, जो जल्द ही पूरी कर दी जाएगी। दो बब्बर शेर (जोड़ा) और भेड़िया लाने के लिए सीजेडए और संबंधित चिड़ियाघर प्रबंधन को अगले एक सप्ताह में पत्र लिखा जाएगा।