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Gorakhpur News: चिड़ियाघर प्रबंधन के इस खास प्रयास से नहीं खलेगी मरियम की कमी- जानिए क्या योजना बनाई

Tue, 02 Apr 2024 11:30 AM IST
रोहित सिंह रोहित सिंह, गोरखपुर
रोहित सिंह, गोरखपुर Published by: रोहित सिंह Updated Tue, 02 Apr 2024 11:30 AM IST
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Two more lions will be brought to Gorakhpur Zoo from Shakkarbagh in Gujarat.
बब्बर शेरनी मरियम( फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
शेरनी मरियम की मौत के बाद अब जल्द ही गोरखपुर चिड़ियाघर में दो और नए शेर लाए जाएंगे। इसे लेकर चिड़ियाघर प्रबंधन की तरफ से तैयारी बहुत पहले से चल रही है। हालांकि, अभी पर्यटकों को कुछ महीने इंतजार करना पड़ सकता है। क्योंकि, किसी भी बड़े वन्यजीव को शिफ्ट किए जाने से पहले सर्द और नर्म मौसम का खास ख्याल रखा जाता है।
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बब्बर शेर को लाने की स्वीकृति 2018 में ही मिली थी, लेकिन अनुमित की अवधि सिर्फ छह माह की ही होती है। ऐसे में चिड़ियाघर प्रबंधन की तरफ से सितंबर में ही सीजेडए को रिमाइंडर (अनुस्मारक) लेटर भेज कर पुन: अनुमित मांगी गई थी। इसी अनुमति का इंतजार था। अब, मरियम के निधन के बाद उम्मीद है कि इस अनुमति की प्रक्रिया को पूरा कर जल्द ही बब्बर शेर गोरखपुर लाया जाएगा।
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2018 में गुजरात के सक्करबाग चिड़ियाघर से 11 बब्बर शेरों को यूपी लाने की स्वीकृति मिली थी। इनमें चार को गोरखपुर चिड़ियाघर और सात को इटावा लायन सफारी लाया जाना था। पहले चरण में कुल सात बब्बर शेर लाए गए, जिनमें एक की मौत हो गई। जबकि, दो शेर गोरखपुर चिड़ियाघर भेज दिए गए थे।
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बचे बब्बर शेरों को लाए जाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा था। अब उम्मीद है कि यह प्रक्रिया तेज कर दी जाएगी। सक्करबाग प्राणि उद्यान में भेड़ियों की संख्या अच्छी खासी है। ऐसे में पूरी संभावना है कि सक्करबाग से भेड़ियों को भी प्राणि उद्यान में लाने में सफलता मिले।
 

Two more lions will be brought to Gorakhpur Zoo from Shakkarbagh in Gujarat.
गोरखपुर चिड़ियाघर में मरियम शेरनी तबीयत खराब होने के बाद बेहद उदास सी रहती थी - फोटो : अमर उजाला
दरअसल, मार्च 2021 में कुल 151 वन्यजीवों के साथ गोरखपुर चिड़ियाघर का उद्घाटन किया गया था। इसी वक्त भेड़िए का जोड़ा भी लाया जाना था, लेकिन किसी वजह से इन्हें नहीं लाया जा सका।

पिछले वर्ष सक्करबाग चिड़ियाघर में भेड़ियों का प्रजनन हुआ था। इसके बाद प्रबंधन पूरी तरह आश्वस्त है कि सरकार और चिड़ियाघर प्रबंधन से वार्ता कर वहां से जोड़े में भेड़िए भी लाए जा सकेंगे। प्रबंधन ने बचे दोनों बब्बर शेर और भेड़ियों को साथ लाए जाने की योजना तैयार की।

वर्ष 2023 के नवंबर में रिमाइंडर पत्र सीजेडए को भेज भी दिया गया। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में फिर से पत्र भेजने के साथ उन्हें लाए जाने की प्रकिया में तेजी लाई जाएगी।


 

छह महीने की होती है अवधि
किसी भी चिड़ियाघर से वन्य साझेदारी के तहत पारस्परिक अभिवहन के जरिए ही वन्य जीव लाए जाते हैं। इसके लिए संबंधित राज्य के चिड़ियाघर को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को पत्र लिखकर अनुमति लेनी होती। इसके अलावा संबंधित चिड़ियाघर को भी पारस्परिक अभिवहन के तहत वहां से लिए जाने वाले वन्य जीव और दिए जाने वाले वन्य जीव की सूचना दी जाती है।

इसकी अवधि छह माह की होती है। इसके बाद फिर से इसे तैयार कर भेजा जाता है। गोरखपुर चिड़ियाघर से पारस्परिक अभिवहन का समय छह माह पूरा होने के बाद फिर से पत्राचार किया जाएगा।

Two more lions will be brought to Gorakhpur Zoo from Shakkarbagh in Gujarat.
मृत बब्बर शेरनी मरियम( फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
गुजरात का मौसम होता है गर्म
चार शेर लायन सफारी, इटावा में रखते हुए दो शेर (नर, पटौदी और मादा, मरियम) को गोरखपुर चिड़ियाघर भेज दिया गया। ऐसे में अब स्वीकृत बब्बर शेरों में से दो गोरखपुर लाए जाएंगे। प्रबंधन की टीम जब इन्हें लाएगी तो उसी वक्त भेड़ियों को लाए जाने की अनुमित लेकर उन्हें भी गोरखपुर चिड़ियाघर ला दिया जाएगा।

गुजरात का मौसम गर्म होता है। ऐसे में वन्यजीवों को नवंबर के अंत तक या मार्च में लाकर यहां परिवेश में ढलने का अनुकूल माहौल देना होता है, लेकिन अब गर्मी शुरू हो गई है। अगर कागजी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी तो उम्मीद है कि इसी 15 दिन के अंदर इन्हें ला दिया जाएगा।
 

प्रदेश सरकार के वन  मंत्री अरुण सक्सेना ने बताया कि बब्बर शेरनी की उम्र औसत से अधिक हो गई थी। 16 वर्ष सामान्य उम्र मानी जाती है। वन्य जीवों के बेहतर संरक्षण और संवर्धन की दिशा में चिड़ियाघर की टीम बेहतर जिम्मेदारी निभा रही है।

अब जल्द ही बाकी बब्बर शेर लाए जाने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। अनुमति पहले ही हो चुकी है बस उनके अभिवाहन और कागजी कुछ खानापूर्ति की जरूरत है, जो जल्द ही पूरी कर दी जाएगी। दो बब्बर शेर (जोड़ा) और भेड़िया लाने के लिए सीजेडए और संबंधित चिड़ियाघर प्रबंधन को अगले एक सप्ताह में पत्र लिखा जाएगा।

वहीं, चिड़ियाघर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि प्राणि उद्यान की शेरनी मरियम ने यहां तीन वर्ष से अधिक का समय व्यतीत किया है। इस अवधि में वह कई बार बीमार भी हुई और ठीक हो गई। परंतु इस बार होनी को कुछ और मंजूर था। मरियम एक शानदार वन्यजीव थीं। उसका व्यवहार और उसकी प्रतिक्रियाएं सभी को ताउम्र याद रहेंगी। अब दो बब्बर शेरों को लाने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।

 
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