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राहत: नए साल में निस्तारित हो जाएगा एकला बंधे का फैला दो लाख टन कूड़ा, यहां छाएगी हरियाली

Mon, 27 Nov 2023 02:06 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 27 Nov 2023 02:06 PM IST
सार

नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि एकला बंधे पर कूड़ा निस्तारण करने के साथ वहां हरियाली के लिए पौधरोपण किया जाएगा। इसके लिए वन निगम से भी संपर्क कर मौके का निरीक्षण किया गया था।
 

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Two lakh tonnes of garbage spread in Ekla Bandhe will be disposed of in new year
एकला बांध पर गिरा कूड़ा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 नए साल में एकला बंधे पर इकट्ठे कूड़े का निस्तारण हो जाएगा। साथ ही आने वाले कुछ समय में यहां हरियाली नजर आने लगेगी। यहां इकट्ठे 50 हजार टन कूड़े का निस्तारण किया जा चुका है। बचे दो लाख टन कूड़े को चार महीने में निस्तारित कर दिए जाने की योजना है। कूड़े के निस्तारण के बाद यहां जापान की मियावाकी विधि से पौधरोपण कर वन बनाने की तैयारी है।

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पिछले दिनों नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने डीएफओ विकास कुमार के साथ एकला बंधे का निरीक्षण किया था। कूड़ा निस्तारण करने वाली एजेंसी के प्रतिनिधि शैलेंद्र सिंह से कूड़े के निस्तारण की स्थिति की जानकारी ली। शैलेंद्र सिंह ने बताया कि 50 हजार टन कूड़े का निस्तारण हो चुका है। रिफ्यूज व्युत्पन्न ईंधन (आरडीएफ) के लिए तकरीबन चार सौ टन प्लास्टिक, खराब कपड़े आदि राजस्थान व बिहार की सीमेंट फैक्ट्री को भेजे जा रहे हैं। नगर आयुक्त ने जल्द से जल्द कूड़े को निस्तारित करने के निर्देश दिए हैं।
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एकला बंधे पर कूड़ा निस्तारण की प्रक्रिया में बच रही मिट्टी नंदानगर और मेडिकल काॅलेज रोड के बस स्टैंड पर भेजी जाएगी। इस मिट्टी में ईंट व निर्माण सामग्री के भी टुकड़े हैं। नगर आयुक्त ने अधिकारियों को यहां से निकली मिट्टी को स्टैंड पर भेजने के निर्देश दिए हैं।
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नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि एकला बंधे पर कूड़ा निस्तारण करने के साथ वहां हरियाली के लिए पौधरोपण किया जाएगा। इसके लिए वन निगम से भी संपर्क कर मौके का निरीक्षण किया गया था।

एनजीटी के आदेश के बाद बंधे से कूड़े को हटाने की प्रक्रिया हुई है शुरू
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर नगर निगम, एकला बंधे पर के कूड़े का निस्तारण करा रहा है। फर्म बंधे पर ही कूड़ा अलग कर रही है और रीफ्यूज्ड डेराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ) बनाने में इस्तेमाल होने वाले कूड़े को यहीं से कंपनियों के पास भेज रही है। नगर निगम ने यह कवायद एनजीटी द्वारा जुर्माने की कार्रवाई के बाद शुरू की है।

दुर्गंध से लोगों को मिलेगी निजात
एकला बंधे पर कूड़ा गिराए जाने से इसके आसपास के लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। इससे उठने वाली दुर्गंध की वजह से लोगों को घरों में रहना मुश्किल हो जाता है। वहीं, जब कूड़े में आग लग जाती है तो सांस लेने तक में भी परेशानी होती है। नगर आयुक्त ने कहा कि जल्द ही लोगों को इस समस्या से मुक्ति मिल जाएगी।

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यह है पौधरोपण की मियावाकी पद्धति
डीएफओ विकास यादव ने बताया कि मियावाकी पद्धति पौधरोपण की जापानी विधि है। यह पद्धति जंगलों को तेजी से बढ़ाने, घने और प्राकृतिक बनाने में मदद करता है। इसके तहत प्रति वर्गमीटर में तीन से पांच पौधे लगाते हैं। पौधों की ऊंचाई 60 से 80 सेंटीमीटर होती है। इसमें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्रजातियों के 40 से 50 फीसद पौधे लगाए जाते हैं। मियावाकी पद्धति में उपयोग किये जाने वाले पौधे ज्यादातर आत्मनिर्भर होते हैं और उन्हें खाद एवं जल देने जैसे नियमित रख-रखाव की आवश्यकता नहीं होती।


 

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