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Gorakhpur News: फाइलों में दबे हैं स्वतंत्रता आंदोलन के अनछुए रिकॉर्ड
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गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करतीं कुलपति प्रो. पूनम टंडन व
गोरखपुर। भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान, शिमला के निदेशक प्रो. हिमांशु चतुर्वेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश स्टेट आर्काइव में अभी भी बहुत सी ऐसी फाइलें हैं जिन्हें इतिहास का अनछुआ स्रोत कहा जा सकता है। अगर इन रिकॉर्ड्स को खंगाला जाए तो स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित कई महत्वपूर्ण घटनाओं का पता चलेगा।
प्रो. हिमांशु उप्र राज्य अभिलेखागार और दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की गूंज’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी व प्रदर्शनी के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अभिलेखागार के अध्ययन से नए नैरेटिव और स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। 1802 से 1837 के बीच गोरखपुर की घटनाओं पर विशेष नजर डालने की जरूरत है। आईसीएचआर की ओर से गीता प्रेस और हनुमान प्रसाद पोद्दार पर जो शोध हो रहा है, वह पोद्दार को उत्तर भारत के अरविंदो के रूप में स्थापित करने वाला हो सकता है।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि स्वतंत्रता संघर्ष पर केंद्रित निशुल्क प्रदर्शनी महत्वपूर्ण है। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने कहा कि यूपी के बलिदानियों की विडंबना यह है कि बहुत से क्रांतिकारी और घटनाएं फाइलों में ही सिमट कर रह गई हैं। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव डॉ. ओमजी उपाध्याय और प्रो. अरुप चक्रवर्ती ने भी विचार रखे। स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज तिवारी, संचालन डॉ. सर्वेश शुक्ल व आभार ज्ञापन डॉ. आशीष सिंह ने किया।
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प्रो. हिमांशु उप्र राज्य अभिलेखागार और दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की गूंज’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी व प्रदर्शनी के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अभिलेखागार के अध्ययन से नए नैरेटिव और स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। 1802 से 1837 के बीच गोरखपुर की घटनाओं पर विशेष नजर डालने की जरूरत है। आईसीएचआर की ओर से गीता प्रेस और हनुमान प्रसाद पोद्दार पर जो शोध हो रहा है, वह पोद्दार को उत्तर भारत के अरविंदो के रूप में स्थापित करने वाला हो सकता है।
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अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि स्वतंत्रता संघर्ष पर केंद्रित निशुल्क प्रदर्शनी महत्वपूर्ण है। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने कहा कि यूपी के बलिदानियों की विडंबना यह है कि बहुत से क्रांतिकारी और घटनाएं फाइलों में ही सिमट कर रह गई हैं। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव डॉ. ओमजी उपाध्याय और प्रो. अरुप चक्रवर्ती ने भी विचार रखे। स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज तिवारी, संचालन डॉ. सर्वेश शुक्ल व आभार ज्ञापन डॉ. आशीष सिंह ने किया।
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