{"_id":"6aa46f5482b2225b1801b50f","slug":"two-astronomy-researchers-who-have-journeyed-from-the-depths-of-the-cosmos-to-the-heights-of-the-hindi-language-gorakhpur-news-c-7-gkp1062-1447715-2026-09-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: ब्रह्मांड की गहराई से हिंदी की ऊंचाई तक पहुंचे खगोल विज्ञान के दो शोधार्थी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: ब्रह्मांड की गहराई से हिंदी की ऊंचाई तक पहुंचे खगोल विज्ञान के दो शोधार्थी
Sat, 12 Sep 2026 02:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 12 Sep 2026 02:45 AM IST
विज्ञापन
गोरखपुर। खगोल-भौतिकी जैसे कठिन वैज्ञानिक विषय को हिंदी में सहजता से अभिव्यक्त करने में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दो शोधार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। गणित व सांख्यिकी विभाग की गणितीय-खगोल विज्ञान प्रयोगशाला के शोधार्थी शुभम शर्मा और आफताब अंसारी ने खगोल-भौतिकी विज्ञान हिंदी प्रतियोगिता-2026 में अलग-अलग विधाओं में दूसरा स्थान हासिल किया है।
राजभाषा विभाग और अंतर-विश्वविद्यालय खगोल व खगोल भौतिकी केंद्र (आयुका), पुणे की ओर से हिंदी पखवाड़े के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिता के परिणाम में शुभम शर्मा ने ‘भारत की अंतरिक्ष यात्रा’ विषय पर निबंध लिखकर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। वहीं आफताब अंसारी ने ‘मैं कृष्ण विवर हूं (मैं ब्लैक होल हूं)’ शीर्षक से कविता प्रस्तुत कर कविता प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया।
दोनों शोधार्थियों को राजभाषा विभाग, आयुका की ओर से नकद पुरस्कार और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
गणित एवं सांख्यिकी विभाग के सहायक आचार्य और गणितीय-खगोल विज्ञान प्रयोगशाला के समन्वयक डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि दोनों शोधार्थी ब्लैक होल और न्यूट्रॉन तारों से जुड़ी गणितीय समस्याओं पर शोध कर रहे हैं। वैज्ञानिक विषयों से जुड़े शोधार्थियों की साहित्यिक उपलब्धि विज्ञान और साहित्य के बेहतर समन्वय का उदाहरण है। मैं कृष्ण विवर हूं, कविता में गुरुत्वाकर्षण, प्रकाश, घटना क्षितिज, समय और ब्रह्मांड के रहस्यों जैसी वैज्ञानिक अवधारणाओं को काव्यात्मक और सहज भाषा में प्रस्तुत किया गया है। विभागाध्यक्ष प्रो. हिमांशु पांडेय समेत विभाग के शिक्षकों ने दोनों शोधार्थियों को शुभकामनाएं दीं।
विज्ञापन
कोट--
राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी उपलब्धि विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है। खगोल-भौतिकी जैसे कठिन विषय को जनमानस की भाषा हिंदी में समाज तक पहुंचाने से शोध कार्यों को नई ऊंचाई मिलेगी। ऐसी उपलब्धियां विश्वविद्यालय को समाज से सीधे जोड़ने का काम करती हैं। -प्राे. केपी सिंह, कुलपति, गोरखपुर विश्वविद्यालय
विज्ञापन
राजभाषा विभाग और अंतर-विश्वविद्यालय खगोल व खगोल भौतिकी केंद्र (आयुका), पुणे की ओर से हिंदी पखवाड़े के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिता के परिणाम में शुभम शर्मा ने ‘भारत की अंतरिक्ष यात्रा’ विषय पर निबंध लिखकर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। वहीं आफताब अंसारी ने ‘मैं कृष्ण विवर हूं (मैं ब्लैक होल हूं)’ शीर्षक से कविता प्रस्तुत कर कविता प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया।
विज्ञापन
दोनों शोधार्थियों को राजभाषा विभाग, आयुका की ओर से नकद पुरस्कार और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
गणित एवं सांख्यिकी विभाग के सहायक आचार्य और गणितीय-खगोल विज्ञान प्रयोगशाला के समन्वयक डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि दोनों शोधार्थी ब्लैक होल और न्यूट्रॉन तारों से जुड़ी गणितीय समस्याओं पर शोध कर रहे हैं। वैज्ञानिक विषयों से जुड़े शोधार्थियों की साहित्यिक उपलब्धि विज्ञान और साहित्य के बेहतर समन्वय का उदाहरण है। मैं कृष्ण विवर हूं, कविता में गुरुत्वाकर्षण, प्रकाश, घटना क्षितिज, समय और ब्रह्मांड के रहस्यों जैसी वैज्ञानिक अवधारणाओं को काव्यात्मक और सहज भाषा में प्रस्तुत किया गया है। विभागाध्यक्ष प्रो. हिमांशु पांडेय समेत विभाग के शिक्षकों ने दोनों शोधार्थियों को शुभकामनाएं दीं।
विज्ञापन
कोट
राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी उपलब्धि विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है। खगोल-भौतिकी जैसे कठिन विषय को जनमानस की भाषा हिंदी में समाज तक पहुंचाने से शोध कार्यों को नई ऊंचाई मिलेगी। ऐसी उपलब्धियां विश्वविद्यालय को समाज से सीधे जोड़ने का काम करती हैं। -प्राे. केपी सिंह, कुलपति, गोरखपुर विश्वविद्यालय