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गोरखपुर AIIMS में दुर्लभ केस: 26 वर्षीय युवक में महिलाओं जैसा होने लगा विकास, पत्नी छोड़कर चली गई मायके

Thu, 28 May 2026 02:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो निखिल तिवारी, अमर उजाला, गोरखपुर
निखिल तिवारी, अमर उजाला, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Thu, 28 May 2026 02:31 AM IST
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Treatment is going on in the Endocrinology Department of AIIMS Gorakhpur
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग में एक दुर्लभ बीमारी का मामला सामने आया है। 26 वर्षीय युवक में किशोरावस्था से ही सामान्य पुरुषों की तुलना में अलग शारीरिक बदलाव दिखाई दे रहे थे। समय पर जांच न होने के कारण बीमारी का पता नहीं चल सका। शादी के बाद दांपत्य जीवन में परेशानियां बढ़ीं, जिसके चलते पत्नी नाराज होकर अलग हो गई।

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डॉ. देव ने बताया कि शुरुआती जांच में युवक के शरीर में पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन की कमी के संकेत मिले। इसके बाद कराई गई जेनेटिक जांच में सामान्य पुरुषों में पाए जाने वाले एक्सवाई क्रोमोसोम की जगह एक्सएक्सवाई (डबल एक्स वाई) क्रोमोसोम पाया गया।
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इसी कारण युवक में पुरुषों की तुलना में महिलाओं जैसे कुछ शारीरिक लक्षण विकसित होने लगे थे। उसके स्तनों का आकार बढ़ रहा था, दाढ़ी-मूंछ कम थीं और जननांग भी सामान्य से छोटे पाए गए।

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आनुवांशिक विकार क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम की पुष्टि
डॉक्टरों के अनुसार, यह बीमारी क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम कहलाती है। यह एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार है, जिसमें पुरुषों में एक अतिरिक्त एक्स क्रोमोसोम मौजूद होता है।

सामान्यतः पुरुषों में एक्सवाई और महिलाओं में एक्सएक्स क्रोमोसोम पाए जाते हैं लेकिन इस सिंड्रोम से प्रभावित पुरुषों का क्रोमोसोम पैटर्न एक्सएक्सवाई हो जाता है। इसके कारण शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाता जिससे शारीरिक विकास, प्रजनन क्षमता और अन्य शारीरिक विशेषताओं पर प्रभाव पड़ सकता है।

सिंड्रोम के दुष्प्रभाव, कुछ मामलों में इलाज संभव
डॉ. आदित्य का कहना है कि इस बीमारी के बाद मरीजों में बांझपन, शरीर पर कम बाल, स्तनों का बढ़ना, कमजोरी और आत्मविश्वास में कमी जैसीं समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। कई मामलों में मरीज लंबे समय तक बीमारी को समझ ही नहीं पाते और मानसिक तनाव का सामना करते रहते हैं।

युवक को टेस्टोस्टेरोन हार्मोन थेरेपी दी जा रही है ताकि उसके शरीर में पुरुषों वाले लक्षण बेहतर तरीके से विकसित हो सकें। हालांकि, ऐसे मरीजों में प्राकृतिक रूप से पिता बनने की संभावना काफी कम हो सकती है लेकिन आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की मदद से कुछ मामलों में इलाज संभव होता है।

अलर्ट: ये लक्षण दिखें तो चिकित्सकीय परामर्श लें
डॉ. देव ने कहा कि लोगों को हमेशा जागरूक रहना चाहिए। यदि किसी किशोर या युवक में सामान्य पुरुषों जैसे शारीरिक बदलाव न दिखें, स्तनों का आकार बढ़ने लगे, आवाज पतली रहे या शादी के बाद संतान न हो रही हो, तो बिना झिझक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए। समय रहते पहचान होने पर हार्मोन थेरेपी और परामर्श से मरीज बेहतर जीवन जी सकता है।
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