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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Treatment getting delayed due to arrival of more 1500 patients instead of 700 patients in OPD of City hospital Gorakhpur

गोरखपुर जिला अस्पताल: घंटों लाइन में लगने के बाद मिल रहा इलाज, आफत में फंसी मरीजों की जान

Thu, 01 Jul 2021 03:28 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 01 Jul 2021 03:28 PM IST
सार

जिला अस्पताल की ओपीडी की क्षमता 700 मरीजों की, पहुंचे 1500 से ज्यादा। पर्ची बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने तक के लिए करना पड़ा इंतजार। वायरल फीवर से लेकर सर्दी और जुकाम से पीड़ित थे अधिकतर रोगी।

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Treatment getting delayed due to arrival of more 1500 patients instead of 700 patients in OPD of City hospital Gorakhpur
गोरखपुर जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीज। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर जिला अस्पताल में बुधवार को 1500 से अधिक मरीज पहुंच गए तो पर्ची बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने तक के लिए उन्हें घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ा। सबसे अधिक मरीज मेडिसिन विभाग की ओपीडी में पहुंचे थे। इस विभाग में तीन डॉक्टरों के पास 400 से अधिक मरीज पहुंचे थे। इनमें अधिकतर को सर्दी, जुकाम और वायरल फीवर से पीड़ित थे।  
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जानकारी के अनुसार, शहर में जिला अस्पताल के अलावा बीआरडी मेडिकल कॉलेज, एम्स और महिला अस्पताल जैसे सरकारी स्वास्थ्य संस्थान हैं। इन संस्थानों की ओपीडी में भी आजकल ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। 
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कोरोना की दूसरी लहर में बंद ओपीडी जब से खुली है, दूसरी बीमारियों के मरीज इन अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचने लगे हैं। सोमवार को एम्स की ओपीडी में इतने मरीज पहुंच गए थे कि वहां भगदड़ मच गई थी।
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दरअसल, इन अस्पतालों में जिले की आबादी के अलावा आसपास के जिलों के भी मरीज इलाज के लिए आते हैं। इस वजह से इन पर क्षमता से अधिक दबाव हो जाता है। जिला अस्पताल की ओपीडी की क्षमता 700 मरीजों की बताई जाती है, लेकिन यहां औसतन 1500 से अधिक मरीज हर रोज इलाज के लिए पहुंचते हैं। 

इसी तरह जिला महिला अस्पताल की औसत क्षमता 300 मरीजों की है, लेकिन यहां हर रोज 500 से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सभी विभागों की ओपीडी में चार से पांच हजार मरीज प्रतिदिन इलाज के लिए पहुंचते हैं। यह संख्या में भी क्षमता की दोगुना बताई जाती है। इसी तरह एम्स की ओपीडी अभी शुरू ही हुई है। बताया जाता है कि यहां भी इलाज के लिए प्रतिदिन 14 से 15 सौ मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं।

हर कदम पर टूट रहा कोविड प्रोटोकॉल का नियम

जिला अस्पताल में बुधवार को हर कदम पर कोविड प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ती देखी गई। न तो अस्पताल भवन के अंदर प्रवेश करने वालों की थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही थी न ही सैनिटाइजेशन की कोई व्यवस्था थी। मास्क नहीं लगाने वालों को कोई रोकने टोकने वाला भी नहीं था। सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन नहीं किया जा रहा था। लोग एक-दूसरे से सटकर खड़े थे।  

जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल की ओपीडी में अब मरीजों की भीड़ बढ़ने लगी है। भीड़ बढ़ने के साथ कोविड प्रोटोकॉल के नियमों को दरकिनार कर दिया गया है। न तो थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है न ही अंदर प्रवेश करने वालों के लिए सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई है। काउंटरों और डॉक्टरों के पास लगी लाइन में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जा रहा है। अधिकतर लोग बिना मास्क के नजर आते हैं।

जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ राजेश कुमार ने बताया कि बदल रहे मौसम की वजह से वायरल फीवर की समस्या से ग्रसित मरीज ज्यादा आ रहे हैं। 20 से अधिक मरीजों की कोरोना जांच की सलाह भी डॉक्टरों ने दी है।

जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ एसी श्रीवास्तव ने बताया कि कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कराया जा रहा है। लगातार मरीजों और उनके तीमारदारों से मास्क लगाने, दो गज की दूरी बनाने और सैनिटाइजेशन के लिए अपील की जा रही है।
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