पंचायत चुनाव: आरक्षण तय करने को लेकर 15 फरवरी को दिया जाएगा प्रशिक्षण, शासनादेश का इंतजार
- आरक्षण के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के साथ ही तैयारी तेज हुई
- पंचायतीराज निदेशक ने बुधवार की देर शाम प्रशिक्षण के लिए भेजा संदेश
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आरक्षण के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के साथ ही पंचायतीराज विभाग से लेकर मैदान में उतर चुके दावेदारों और उनके समर्थकों ने तैयारियां और तेज कर दी हैं। बुधवार की देर शाम पंचायतीराज निदेशक ने आरक्षण को लेकर 15 फरवरी को शासन में आयोजित प्रशिक्षण जिले के डीपीआरओ, उप निदेशक पंचायतीराज और जिला पंचायत के एएमए को लखनऊ बुलाया है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण की स्थिति लगभग साफ हो गई है। कैबिनेट की मंजूरी के साथ ही यह तय हो गया है कि इस बार आरक्षण की व्यवस्था चक्रानुक्रम में ही लागू होगी। यह माना जा रहा है कि इस बार ऐसी व्यवस्था बन सकती है, जिसके अनुसार कई गांवों में पहली बार अनुसूचित जाति (एससी) एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के प्रधान चुने जाएंगे।
अभी तक पंचायत चुनावों में आरक्षण को लेकर स्थिति साफ नहीं थी। 2010 एवं 2015 की तरह इस बार भी आरक्षण शून्य होगा या चक्रानुक्रम के अनुसार निर्धारण होगा, इस बात को लेकर संशय बरकरार था। मगर अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद स्थिति साफ हो गई है।
डीडी पंचायत भी बुलाए गए
विभागीय जानकारों के अनुसार इस बार आरक्षण तय किए जाते समय यह देखा जाएगा कि कौन से ऐसे गांव हैं, जहां 1995 से लेकर 2015 तक कभी भी सीट अनुसूचित जाति या अन्य पिछड़ा नहीं रही। जो गांव कभी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं रहे, उन्हें इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया जा सकता है।
ठीक इसी तरह जिन गांवों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण नहीं रहा, वहां इस वर्ग के लिए आरक्षित किया जा सकता है। इसके बाद जो गांव बचेंगे वहां आबादी के अनुसार सामान्य तरीके से आरक्षण की व्यवस्था लागू हो सकती है।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने कहा कि 15 फरवरी को आरक्षण के संबंध में शासन में ट्रेनिंग आयोजित होने की सूचना मिली है। गोरखपुर समेत सभी जिलों के एएमए और डीडी पंचायत को भी ट्रेनिंग के लिए बुलाया गया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब शासनादेश का इंतजार है। जैसे ही शासनादेश मिलेगा आरक्षण की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।