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रेलवे: डिवाइस से कोहरे में भी तेजी से दौड़ेंगी ट्रेनें, जानिए कैसे करता है काम
Sun, 21 Nov 2021 12:11 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 21 Nov 2021 12:11 PM IST
सार
पूर्वोत्तर रेलवे के 634 रेल चालकों को डिवाइस दे दिया गया है। इस डिवाइस की मदद से ट्रेन चालकों को कोहरे में भी क्रॉसिंग और सिग्नल की आसानी से जानकारी मिल सकेगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
कोहरे को देखते हुए पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने तैयारी पूरी कर ली है। इस बार कोहरे के दौरान भी ट्रेनों की आवाजाही बिना किसी बाधा और खतरे के हो सकेगी। सर्दियों में धुंध में रेल हादसों से बचाने के लिए ट्रेनों को एडवांस एंटी फॉग डिवाइस से लैस कर दिया गया है।
इससे ड्राइवरों को सिग्नल व क्रॉसिंग की जानकारी आसानी से मिल सकेगी। पूर्वोत्तर रेलवे के 634 रेल चालकों को डिवाइस दे दिया गया है। दरअसल, जीपीएस से यह डिवाइस जुड़ा है। इसके जरिए ट्रेनों का समय संचालन पटरी पर लाने में काफी मदद मिलेगी। इस डिवाइस की मदद से ट्रेन चालकों को कोहरे में भी क्रॉसिंग और सिग्नल की आसानी से जानकारी मिल सकेगी। पहले से काफी एडवांस होने के चलते कोहरे में ट्रेनों की रफ्तार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
डिवाइस से यह फायदा
ट्रेनों के इंजन में लगने वाली फॉग सेफ्टी डिवाइस ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम पर आधारित है। यह रूट की मैपिंग करता है। इस डिवाइस में रूट के सभी सिग्नलों की जानकारी होती है। इस कारण कोहरे में भी ट्रेनों की रफ्तार कम नहीं होती। इससे सिग्नल के एक किलोमीटर पहले ही डिवाइस का अलार्म बजने लगता है, जिससे लोको पायलट सतर्क हो जाते हैं।
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ऐसा करता काम
डिवाइस में यह फीड कर दिया जाता है कि कितनी दूरी पर कौन सी क्रॉसिंग है, कितनी दूरी पर सिग्नल है। क्रॉसिंग या सिग्नल से करीब पांच सौ मीटर पहले डिवाइस लोको पायलट को सतर्क कर देगा। ऐसे में दृश्यता कम होने पर चालक सावधान हो जाएगा और विवेक से काम लेगा।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि चालक इंजन में एडवांस एंटी फॉग डिवाइस लगाकर ट्रेनों का सुरक्षित संचालन करेंगे। इससे कोहरे में किसी भी प्रकार के हादसे का डर नहीं रहेगा।
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इससे ड्राइवरों को सिग्नल व क्रॉसिंग की जानकारी आसानी से मिल सकेगी। पूर्वोत्तर रेलवे के 634 रेल चालकों को डिवाइस दे दिया गया है। दरअसल, जीपीएस से यह डिवाइस जुड़ा है। इसके जरिए ट्रेनों का समय संचालन पटरी पर लाने में काफी मदद मिलेगी। इस डिवाइस की मदद से ट्रेन चालकों को कोहरे में भी क्रॉसिंग और सिग्नल की आसानी से जानकारी मिल सकेगी। पहले से काफी एडवांस होने के चलते कोहरे में ट्रेनों की रफ्तार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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डिवाइस से यह फायदा
ट्रेनों के इंजन में लगने वाली फॉग सेफ्टी डिवाइस ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम पर आधारित है। यह रूट की मैपिंग करता है। इस डिवाइस में रूट के सभी सिग्नलों की जानकारी होती है। इस कारण कोहरे में भी ट्रेनों की रफ्तार कम नहीं होती। इससे सिग्नल के एक किलोमीटर पहले ही डिवाइस का अलार्म बजने लगता है, जिससे लोको पायलट सतर्क हो जाते हैं।
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ऐसा करता काम
डिवाइस में यह फीड कर दिया जाता है कि कितनी दूरी पर कौन सी क्रॉसिंग है, कितनी दूरी पर सिग्नल है। क्रॉसिंग या सिग्नल से करीब पांच सौ मीटर पहले डिवाइस लोको पायलट को सतर्क कर देगा। ऐसे में दृश्यता कम होने पर चालक सावधान हो जाएगा और विवेक से काम लेगा।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि चालक इंजन में एडवांस एंटी फॉग डिवाइस लगाकर ट्रेनों का सुरक्षित संचालन करेंगे। इससे कोहरे में किसी भी प्रकार के हादसे का डर नहीं रहेगा।