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130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगी ट्रेनें

Thu, 29 Oct 2020 01:51 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 29 Oct 2020 01:51 AM IST
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train speed 130 km per hour
130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगी ट्रेनें
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राजन राय
गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे डबल डिस्टेंट सिग्नल लगाकर ट्रेनों की गति बढ़ाने पर काम कर रहा है। इस तकनीक के स्थापित हो जाने पर सभी रेेल गाड़ियां अपनी पूरी गति से चल सकेंगी। दुर्घटना की आशंका को भी कम किया जा सकेगा। ट्रेनें आउटर पर बेवजह नहीं खड़ी रहेंगी। इस तकनीक के संचालित होने से ट्रेनें 130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलेंगी।
जानकारी के अनुसार, पूर्वोत्तर रेलवे में छपरा से गोरखपुर होकर बाराबंकी तक डबल डिस्टेंट सिग्नल के लिए केबिल बिछाने और तकनीक को दुरुस्त करने के लिए एजेंसी तय कर दी गई है। जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। अभी एक सिग्नल होने से ड्राइवर स्पीड को नियंत्रित करके चलाते हैं। इसके चलते ज्यादातर ट्रेनें अपनी पूरी गति से नहीं चल पाती हैं। दो होम सिग्नल होने से ड्राइवर पहले से ही सतर्क रहेंगे। एक-एक किलोमीटर की दूरी पर ये सिग्नल लगेंगे। पहला सिग्नल बताएगा कि आगे का रास्ता क्लियर या व्यस्त है। दूसरा सिग्नल आने वाले स्टेशन की जानकारी देगा। सिग्नल के मुताबिक ड्राइवर ट्रेन को संचालित कर सकेंगे। स्टेशन आने के पहले दो बार संकेत मिलेगा। इससे जहां समय की बचत होगी वहीं हादसे की गुंजाइश न के बराबर रहेगी।
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आउटर पर बेवजह खड़ी नहीं होंगी ट्रेनें
डबल डिस्टेंट सिग्नल स्टेशन यार्ड के बाहर लगे सिग्नल से पहले लगा होगा। इसमें सिर्फ लाल और पीली बत्ती होगी। ये सिग्नल लोको पायलट को ट्रेन की रफ्तार नियंत्रित करने के लिए अलर्ट करेगा। हरी लाइट का मतलब होगा ट्रेन उसी रफ्तार से स्टेशन पर जा सकती है। पीली लाइट का मतलब होगा लोको पायलट ट्रेन की रफ्तार को नियंत्रित कर ले। रेलवे के अनुसार इससे ट्रेनों के बिना वजह आउटर पर खड़े रहने की समस्या से छुटकारा मिलेगा।
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बढ़ाई जा रही पटरियों की क्षमता
पूर्वोत्तर रेलवे के रूट पर ट्रेनों की रफ्तार 110 से 160 किमी प्रति घंटा तक होगी। इन ट्रेनों के संचालन के लिए बाराबंकी से छपरा तक 425 किमी की पटरियों की क्षमता बढ़ाने का काम चल रहा है। मौजूदा पटरियों और उसके स्लीपर को बदला जा रहा है। जो पटरियां लगी हैं उनका वजन 52 किलो प्रति मीटर होता है। इसकी जगह अब 60 किलो प्रति मीटर वजन की पटरियां बिछाई जा रही हैं। नई पटरियों के वजन सहने की क्षमता ज्यादा होगी। पटरियों के नीचे से पत्थर हट जाए या गैप हो जाए तो भी पटरियां टेढ़ी नहीं होंगी और ट्रेन पूरी रफ्तार से गुजर सकेगी। पटरियों के बीच के गैप को खत्म करने के लिए इनकी लंबाई बढ़ाई जा रही है।
राजधानी एक्सप्रेस चलाने का रास्ता साफ होगा
रेलवे ट्रैक पर डबल डिस्टेंट सिग्नल लगने से ट्रेनें 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी। अभी अधिकतम स्पीड 110 से 115 किलोमीटर प्रति घंटा है। वह भी इस स्पीड से वैशाली एक्सप्रेस, नाहरलागुन एक्सप्रेस जैसी कुछ गिनीचुनी ट्रेनें ही चल पाती हैं। इस सिग्नल के बाद वंदेभारत और राजधानी एक्सप्रेस भी चलाने का रास्ता साफ हो जाएगा।

छपरा से बाराबंकी तक डबल डिस्टेंट सिग्नल लगाने के लिए बजट मंजूर है। कार्यदायी एजेंसियां तय कर दी गई हैं। संरक्षा की दृष्टि से यह बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। ट्रेनों की स्पीड बढ़ जाएगी, जिससे समय पालन में भी सुधार होगा।
- पंकज कुमार सिंह, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पूर्वोत्तर रेलवे
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