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Gorakhpur News: अंडरपास से आवागमन बंद..दिल्ली से आए विशेषज्ञ कर दरारों की जांच

Mon, 24 Nov 2025 12:18 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Nov 2025 12:18 AM IST
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Traffic stopped at the underpass, experts from Delhi inspected the cracks.
जंगल कौड़िया फ्लाईओवर के अंडरपास को किया गया बंद। संवाद
- अंडरपास में सेंसर युक्त मशीन से हो रही भार क्षमता की जांच, फिर लोडेड ट्रक और भारी वाहन खड़ा कर जांचेंगे
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- 11 दिन पहले अंडरपास में आई गईं थीं 32 दरारें, सभी को विशेष केमिकल से भरा गया
संवाद न्यूज एजेंसी
जंगल कौड़िया। गोरखपुर-सोनौली मार्ग पर जंगल कौड़िया फ्लाईओवर के अंडरपास में आईं दरारों को केमिकल से भरने के बाद शनिवार देर रात आवागमन बंद करा दिया गया। दिल्ली से आए विशेषज्ञों ने अंडरपास में नीचे की ओर सेंसर युक्त मशीन से भार क्षमता की जांच की। इसके बाद वे लोडेड ट्रक और भारी वाहन फ्लाईओवर पर खड़ा करके गहनता से परीक्षण करेंगे। ताकि पता चल सके कि अंडरपास निर्माण में कोई गड़बड़ी तो नहीं है।
गोरखपुर-सोनौली मार्ग पर जंगल कौड़िया में बने करीब 800 मीटर लंबे सिक्सलेन फ्लाईओवर के नीचे बने अंडरपास में 11 दिन पहले दरारें दिखाई देने के बाद अब फ्लाईओवर के भार सहन क्षमता की जांच दिल्ली से आई विशेषज्ञों की टीम कर रही है। शनिवार देर रात बैरिकेडिंग कर अंडरपास से आवागमन बंद कर दिया गया। हालांकि हाईवे और सर्विस लेन से आवागमन चालू है।
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रविवार सुबह अंडरपास की छत को कुछ मिली मीटर काटकर, हथौड़े और विशेष उपकरण से प्रारंभिक गुणवत्ता जांच की गई। छत की दरारें पहले ही विशेष केमिकल से भर दी गई थीं और रविवार को की गई जांच के बाद उन स्थानों को केमिकल से पेंट कर दिया गया। अंडरपास की छत में कई तरह के सेंसर लगाए गए, जिनमें स्ट्रेन गेज सेंसर, विस्थापन सेंसर और लोड सेल शामिल हैं।
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ये सेंसर संरचना पर पड़ने वाले तनाव, कंपन और झटके को रियल टाइम माप रहे हैं। आने वाले दिनों में अस्थायी लोहे के खंभे लगाए जाएंगे। इसके बाद लोडेड और खाली ट्रक पुल के ऊपर खड़े करके और चलाकर स्थैतिक व गतिशील दोनों तरह के लोड टेस्ट किए जाएंगे। जांच शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है।
फिलहाल, जंगल कौड़िया अंडरपास से होकर आने-जाने वालों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही अंडरपास को फिर से खोला जाएगा।
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दो चरणों में होता है परीक्षण
मौके पर मौजूद अभियंताओं के अनुसार, यह परीक्षण दो चरणों में होता है। इसमें स्थैतिक (स्थिर भार) और गतिशील (चलते वाहन) शामिल हैं। स्थैतिक परीक्षण में ज्ञात भार (जैसे ट्रक) पुल पर रखे जाते हैं और पुल के मुड़ने, खिंचाव और तनाव को मापा जाता है। गतिशील परीक्षण में पुल से वाहन गुजारे जाते हैं और कंपन, विक्षेपण आदि की जांच की जाती है। परीक्षण के लिए, सबसे पहले एक योजना बनाई जाती है, फिर पुल पर विभिन्न सेंसर लगाए जाते हैं और परीक्षण के अनुसार भार डाला जाता है। अंत में, प्राप्त डेटा का विश्लेषण किया जाता है और इसकी तुलना सैद्धांतिक मानों से की जाती है।




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कोट
कार्य के कारण अंडरपास से आवाजाही को बंद करा दिया गया है। क्षेत्र के सभी अंडरपास और फ्लाईओवर का भार परीक्षण कराया जाएगा ताकि किसी भी तरह के कोई जोखिम की आशंका न रहे।


– केपीएस भदौरिया, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर, पीएनसी इंफ्राटेक




भार परीक्षण कराया जा रहा है। विभिन्न मानकों के अनुरूप सभी जांचें की जा रही हैं। यह एक लंबी प्रक्रिया है और सभी परीक्षणों का डेटा विभागीय रिकॉर्ड में मेंटेन किया जाएगा।

– ललित प्रताप पाल, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
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