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नेपाल नहीं इस बार कूल्लू मनाली में मनाएंगे नए साल का जश्न, जानिए किस वजह से नहीं कर सकेंगे काठमांडू की सैर

Mon, 21 Dec 2020 04:12 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज। Published by: vivek shukla Updated Mon, 21 Dec 2020 04:12 PM IST
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tourists will not celebrate New Year celebrations in Nepal due to India-Nepal border seal for covid 19
भारत नेपाल सीमा। - फोटो : अमर उजाला।
इस बार लोग नए साल का जश्न नेपाल में नहीं कूल्लू मनाली में मनाएंगे। क्योंकी इस बार भारत नेपाल की सीमा सील होने के कारण कोई नेपाल नहीं जा सकेगा। ऐसे में ज्यादातर लोग कूल्लू, मनाली का रूख करेंगे। इसके अलावा कोई केदारनाथ की यात्रा करेगा तो कोई उज्जैन महाकाल का दर्शन कर नए साल की खुशियां मनाने की तैयारी में है।
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कोरोना संकट के कारण इस बार लोग स्वयं के वाहन से आना जाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। वहीं इस बार भारत नेपाल की सीमा सील है। लोगों को उम्मीद था कि नए साल में सीमा खुल जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बता दें कि हर नए साल पर जश्न मानाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की पहली पसंद नेपाल हुआ करता था, लेकिन इस बार सीमा सील होने के कारण कूल्लू मनाली का रूख ज्यादातर लोग करेंगे। ऐसे में नेपाल पर्यटन को इस बार झटका लगा है।
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सोनौली कस्बे के रहने वाले नीरज कहते हैं कि कोरोना के वजह से बहुत कुछ बदल गया है। इस बार नए साल पर उज्जैन महाकाल का दर्शन करने जाना है। पूजा कर कोरोना से मुक्ति की कामना की जाएगी। अगर नेपाल सीमा खुली रहती तो वहां जाने का मौका मिलता। सौनौली के हरिश्चंद्र जायसवाल ने बताया कि परिवार के साथ उज्जैन जाने की योजना है। इस बार नए साल पर परिवार के सदस्यों के साथ महाकाल की पूजा कर सुख समृद्धि की कामना की जाएगी।
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घटती बढ़ती रही पर्यटकों की संख्या

कस्टम हाउस एजेंट विनायक चंद तिवारी ने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि नए साल पर नेपाल जाने को नहीं मिलेगा। हालात ऐसे हैं कि नेपाल सीमा कब खुलेगी कोई ठिकाना नहीं है। ऐसे में इस बार तो बाबा केदारनाथ के दर्शन करने जाना है। साथ ही उत्तराखंड में पर्यटन स्थलों पर भ्रमण करने की योजना है। नौतनवां कस्बे के पवन कुमार ने बताया कि नया साल इस बार कूल्लू मनाली में मनाया जाएगा। सीमा खुली रहती तो काठमांडू जाने को मिलता। लेकिन इस बार कोरोना से बहुत कुछ बदल गया है।
 
भारत नेपाल मैत्री समाज एवं पर्यटन अध्यक्ष श्रीचंद गुप्ता ने बताया कि पर्यटकों की संख्या कैलेंडर वर्ष 2018 के दौरान 37.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 526,705 हो गई थी। कैलेंडर वर्ष 2019 में पर्यटकों की संख्या 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ कुल 500,277 रही। 2019 में पर्यटकों के ठहरने की औसत अवधि 11.96 दिन थी, जो घटकर कैलेंडर वर्ष 2019 में 11.78 दिन रह गई। कैलेंडर वर्ष 2020 में पर्यटकों की संख्या में 40 प्रतिशत की वृद्धि के साथ जनवरी फरवरी के शुरूआती समय में पर्यटकों के आगमन में तेजी आई थी, लेकिन कोरोना महामारी से सब चौपट हो गया।

कोरोना की भेट चढ़ा पर्यटन कारोबार

सोटो नेपाल ट्रेवल्स रूपनदेही के अध्यक्ष संजय बजमया ने बताया कि होटल का कारोबार ठप है। इन दिनों होटल व्यवसाय से जुड़े हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश श्रेष्ठ ने बताया कि इस बार पर्यटन उद्योग कोरोना की भेंट चढ़ गया। रूपनदेही जिले में 210 होटल एंड लाज के साथ सौ से अधिक रेस्टोरेंट हैं। भैरहवा, पोखरा और काठमांडू का होटल पूरी तरह भारतीय पर्यटकों पर निर्भर है लेकिन इस बार तो कारोबार चौपट हो गया। थाई बुद्ध विहार सोनौली के प्रबंधक राजेश शुक्ला ने बताया कि नेपाल के लिए बुकिंग बंद है। बनारस और बौद्ध गया से सीधे नेपाल लुंबिनी की बुकिंग शून्य है। पिछले साल दिसंबर माह में प्रतिदिन 30 से 40 बस विदेशी पर्यटक नेपाल जाते थे।
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