खोराबार मेडिसिटी : निर्माण कराकर दें...डॉक्टर चलाएंगे क्लीनिक, अभी 90 में 39 प्लॉट ही आवंटित- सुस्त है रफ्तार
जीडीए की खोराबार मेडिसिटी योजना में नर्सिंग होम, क्लीनिक और पैथालॉजी व एक्स-रे जैसी जांच के लिए अलग-अलग प्लाॅट आवंटित हैं। कुल 90 में से अभी तक 39 प्लॉट ही आवंटित हो पाए हैं। पहले इसके पीछे बड़ी वजह प्लॉट का बड़ा क्षेत्रफल था और अब बजट आड़े आ रहा है।
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जीडीए की खोराबार मेडिसिटी योजना में नर्सिंग होम, क्लीनिक और पैथालॉजी व एक्स-रे जैसी जांच के लिए अलग-अलग प्लाॅट आवंटित हैं। कुल 90 में से अभी तक 39 प्लॉट ही आवंटित हो पाए हैं। पहले इसके पीछे बड़ी वजह प्लॉट का बड़ा क्षेत्रफल था और अब बजट आड़े आ रहा है।
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष और तारामंडल इलाके में अपना नर्सिंग होम चलाने वाले डॉ. शिवशंकर शाही भी इससे सहमत हैं। उनका कहना है कि सबसे बेहतर उपाय यही है कि जिस तरह से गीडा में छोटी फैक्टरियों के लिए फ्लैटेड फैक्टरी बनवाई जा रही है, वैसे ही यहां क्लीनिक के लिए बिल्डिंग बनाकर आवंटित कर दिया जाए।
इसे अलग-अलग विधा के डॉक्टरों को एलॉट कर दिया जाए। इसका फायदा यह होगा कि अगर कोई मरीज रेफर करना पड़ा तो उससे संबंधित दूसरे डॉक्टर भी वहीं बगल में मिल जाएंगे। आईएमए के पूर्व सचिव और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार मिश्रा का कहना है कि मेडिसिटी योजना में प्लॉट छोटा होने का सकारात्मक असर यह हुआ है कि कई डॉक्टर्स वहां प्लॉट खरीदने को लेकर इच्छुक हो गए हैं।
आईएमए सचिव और तारामंडल इलाके में अपना क्लीनिक चलाने वाले डॉ. वाई सिंह का कहना है कि खोराबार मेडिसिटी में बड़े निजी अस्पतालों की स्थापना से माहौल बदलेगा। जीडीए को वहां जल्द इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना चाहिए, ताकि डॉक्टर्स वहां अपना क्लीनिक शुरू करने के लिए प्रयास करें।