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गोरखपुर: राज नर्सिंग कॉलेज के मालिक की 60 करोड़ की संपत्ति कुर्क, प्रापर्टी पर लटका सरकारी ताला

Sat, 05 Nov 2022 12:46 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 05 Nov 2022 12:46 PM IST
सार

तिवारीपुर थाना पुलिस की रिपोर्ट पर जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश ने आरोपियों की चिन्हित हुई भूमि, भवन, नर्सिंग कॉलेज को कुर्क करने का आदेश दिया था। इनके अलग-अलग बैंकों में स्थित 15 से अधिक बैंक खातों के संचालन पर भी जिलाधिकारी ने रोक लगा दी है।

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Three properties of nursing operator accused of gangster seized
राज नर्सिंग होम पर हुई कार्रवाई। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने के आरोपी राज नर्सिंग होम एंड पैरामेडिकल कॉलेज के मालिक डॉ. अभिषेक यादव की 60 करोड़ की संपत्ति को शुक्रवार को कुर्क कर दिया गया। उधर, डॉ. अभिषेक यादव की 40 करोड़ से अधिक की संपत्ति और चिह्नित की गई है, जिसे जल्द ही जब्त किया जाएगा।

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एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई की अगुवाई में पहुंची पुलिस प्रशासन की टीम ने राज नर्सिंग होम, मकान और चिलुआताल में स्थित जमीन पर सरकारी ताला लटका दिया। इससे पहले नर्सिंग होम में मौजूद चार दाई और कुछ सामान को बाहर निकाला गया। टीम ने नर्सिंग होम में जब्ती की सूचना चस्पा करने के साथ ही अनाउंसमेंट भी कराया। टीम में तिवारीपुर के थानेदार मदन मोहन मिश्रा भी शामिल रहे।
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कुर्क की गई संपत्ति की यह कीमत सरकारी सर्किल रेट के हिसाब से आंकी गई है। अगर बाजार भाव से देखा जाए तो डेढ़ अरब से अधिक की संपत्ति को कुर्क किया गया है। गोरखपुर में अब तक की यह सबसे बड़ी कार्रवाई है।
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यह है मामला

पिपराइच के तुर्रा बाजार स्थित राज नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज के संचालक डॉ. अभिषेक यादव पर आरोप है कि उन्होंनेे कूटरचित दस्तावेज के जरिये शासन से मान्यता मिलने की जानकारी देकर नर्सिंग कॉलेज में छात्र-छात्राओं का प्रवेश ले लिया था। मामला संज्ञान में आने पर शासन के संयुक्त सचिव अनिल कुमार सिंह ने आठ जनवरी 2022 को कोतवाली थाने में राज नर्सिंग कॉलेज के संचालक पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने का मुकदमा दर्ज कराया। जालसाजी की जानकारी होने पर छात्रों के घरवालों ने भी तहरीर दी थी। कॉलेज पर ताला लगाने के साथ ही अधिकारियों ने आरोपियों के खिलाफ पिपराइच थाने में भी मुकदमा दर्ज कराया। बाद में पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। कोतवाली थाने में दर्ज केस की विवेचना तिवारीपुर पुलिस कर रही है।

डॉ. अभिषेक के साथ ही पत्नी, बहन भी हैं आरोपी
कोतवाली थाने में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के केस में दुर्गाबाडी निवासी डॉ. अभिषेक यादव के साथ ही उनकी पत्नी डॉ. मनीषा यादव, शाहपुर के बशारतपुर में रहने वाली बहन डॉ. पूनम यादव भी आरोपी हैं। इसके अलावा शक्तिनगर निवासी डॉ. सी प्रसाद उर्फ चौथी, बस्ती जिले के लालगंज, खोरिया निवासी शोभितानंद यादव, गुलरिहा थानाक्षेत्र के करमहा निवासी श्यामनरायण मौर्य व मोगलहा निवासी विशाल त्रिपाठी गिरोह के सदस्य हैं। आरोप है कि सभी मिलकर 2015 से यह गिरोह चला रहे हैं। एसएसपी के आदेश पर कोतवाली थाना पुलिस ने 16 सितंबर को आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसकी विवेचना तिवारीपुर थाना पुलिस कर रही है।

 

छात्रों ने भी दर्ज कराया था जालसाजी का केस
इस मामले में पैरामेडिकल कॉलेज के छात्रों ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि वर्ष 2018-19 एएनएम, जीएनएम वर्ष 2019-20 में एएनएम, जीएनएम और सत्र 2020-21 व 2021-22 में प्रवेश के लिए डोनेशन एवं निर्धारित से अधिक फीस ली गई। इसके बाद न परीक्षा कराई गई और न ही डिग्री दी गई। प्रथम सत्र के छात्रों को यूपी स्टेट मेडिकल फैकल्टी बताकर रजिस्ट्रेशन कराया गया और बाद में स्टेट मेडिकल फैकल्टी बताया जा रहा है। बाद में पता चला कि संस्था की मान्यता नहीं है। कूटरचित दस्तावेज के आधार पर मान्यता ली गई है। सीएमओ की जांच में भी इसकी पुष्टि हुई थी। छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। पुलिस ने इस मामले में पिपराइच थाने में केस दर्ज किया।

डॉक्टर अभिषेक पर दर्ज है 19 मुकदमे
डॉक्टर अभिषेक पर 19 मुकदमे दर्ज हैं। इसमें लखनऊ का भी मुकदमा शामिल है। गोरखपुर में वर्ष 2016 में दर्ज 14 मुकदमों में फाइनल रिपोर्ट लग गई थी, जिसे फिर से खोला गया था। मई 2022 में तत्कालीन एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने सभी मुकदमों की जांच कराकर एक ही दिन चार्जशीट दाखिल कराई थी। इसके बाद ही गैंगस्टर का ग्राउंड तैयार हो गया था।

एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि गैंगस्टर के अभियुक्त डॉ. अभिषेक व उसकी पत्नी के नाम से तीन संपत्तियों को कुर्क किया गया। छह वाहन भी जब्त किए गए हैं। बैंक खातों व अन्य संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया जारी है, जल्द ही उस पर कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।

 

छह छात्र गए थे जेल, फर्स्ट ईयर का रिजल्ट निकला था फर्जी

देवरिया के प्रत्यूष कौशिक पांडेय प्रशासन की इस कार्रवाई से बहुत खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि 10 जनवरी से आंदोलन किया जा रहा है। छह साथी जेल भी जा चुके हैं। वर्ष 2018 से 2021 तक प्रवेश लिए 1200 छात्र भटक रहे हैं। फर्स्ट ईयर का रिजल्ट भी फर्जी निकला। ऑप्टोमेट्रिस्ट की पढ़ाई कर रहे चौरीचौरा के अंकुश ने बताया कि पिता का निधन हो चुका है। कमाने वाली सिर्फ मां है। फर्स्ट ईयर का रिजल्ट भी फर्जी जारी कर दिया गया था। इस विवाद के बाद पढ़ाई छूट गई। घर में कोई फीस देने वाला नहीं है। एक छोटी सी दुकान पर नौकरी कर रहा हूं।

कहीं नहीं मिल रही नौकरी
कौशल कुमार ने बताया कि पैरामेडिकल कॉलेज से डेंटल हाइजीनिस्ट का कोर्स कर रहा था। पिता किसान हैं। परिवार में आय का कोई स्रोत नहीं है। दो साल में करीब दो लाख रुपये बतौर फीस जमा किया। अब तो कोई प्राइवेट नौकरी भी नहीं दे रहा। संतकबीरनगर के निवासी रामकुमार के पिता प्राइवेट शिक्षक हैं। उन्होंने डीएमएलटी कोर्स में प्रवेश लिया था। इसकी फीस करीब डेढ़ लाख रुपये जमा की थी। रामकुमार ने बताया कि 60 सीट पर 120 छात्रों का प्रवेश लिया था। सबसे दोगुनी फीस भी ली। अब सब बर्बाद हो गया। सरकार भी मदद नहीं कर रही है।

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