देवरिया: मां की बात मान लेतीं तो बच जाती तीनों की जान, मातम में नहीं जले घर के चूल्हे
तीन सखियों की मौत से गड़ेर में छाया मातम, अधिकांश घरों में नहीं जले चूल्हे
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देवरिया जिले में शुक्रवार शाम को महादेवा ताल घूमने गईं सहेलियों के डूबने से मौत की खबर मिलते ही खुशियां मातम में तब्दील हो गईं। बचाई गई रत्ना की हालत नाजुक बनी हुई है। उसका गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। इस हृदय विदारक घटना से गांव के अधिकांश घरों में रात में चूल्हे नहीं जले। पूरी रात चीत्कार गूंजती रही।
शुक्रवार को भलुअनी थाना क्षेत्र के गड़ेर गांव निवासी रामईश्वर के पुत्र अमन का मुंडन संस्कार था। जिसमें रिश्तेदार भी जुटे थे। सुबह से ही घर में खुशी के कारण गाना-बजाना चल रहा था। रामईश्वर के चाचा बीरबल निषाद की सबसे बड़ी पुत्री रीतू, बुआ के घर आई बड़हलगंज की नंदन पुत्री मुन्ना निषाद और मौसेरे भाई के मुंडन में मऊ से आई लालमन पुत्री पप्पू निषाद अपने-अपने मां से महादेव ताल पर घूमने की बात कही। जिस पर सभी ने ताल पर जाने से मना कर दिया। लेकिन होनी को भला कौन टाल सकता है।
बताया जा रहा है कि सभी जिद कर ताल पर घूमने चली गईं। ग्रामीणों का कहना था कि यदि सभी ने अपनी-अपनी मां की बात मान ली होतीं, तो शायद उनकी जान नहीं जातीं।
बेटी की मौत सुनकर पिता हो गए बदहवास
स्थानीय गांव निवासी बीरबल दोनो आंख से दिव्यांग हैं। महादेवा ताल में नाव पलट जाने के कारण चार संतानों में सबसे बड़ी रीतू की डूबने से मौत हो गई। जानकारी होने पर बीरबल बदहवास हो गए। पिता बीरबल का कहना था कि ऐसा नहीं सोचा था कि बिटिया की डोली की जगह अर्थी उठेगी।
आंख खराब होने से बिटिया का शव भी नहीं देख पाने का मलाल है। हादसे में तीन मौतों के कारण गांव और रिश्तेदारी में कोहराम मचा हुआ है। रात में ही नंदन और लालमन के परिजन शव लेकर गांव चले गए। जबकि रीतू का दाह-संस्कार बरहज सरयू तट पर किया गया।