गोरखपुर में तीन कोरोना संक्रमितों की हुई मौत, 10 घंटे पड़ा रहा संक्रमित बुजुर्ग महिला का शव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर जिले में सोमवार को कोरोना संक्रमित तीन लोगों की मौत हो गई। इसमें से एक की सूचना स्वास्थ्य महकमे को मिली है लेकिन डाटा अपलोड न होने के कारण मौत का आंकड़ा रिकार्ड पर नहीं लिया जा सका। एक बुजुर्ग की मौत गोरखनाथ क्षेत्र के निजी अस्पताल में हुई। एक ने घर पर दम तोड़ा है। इसकी सूचना स्वास्थ्य महकमे को देर रात तक नहीं मिल सकी। इन सबके कोरोना पॉजिटिव होने व मौत की पुष्टि परिजनों ने की है।
पीपीई किट खरीदी, फिर बेटे ने पैक किया शव
बदइंतजामी के बीच एक बेटा अपनी कोरोना संक्रमित मां के शव के लिए 10 घंटे परेशान रहा लेकिन किसी ने भी शव के पास जाने की जहमत नहीं उठाई। थक हार कर बेटे ने पीपीई किट खरीदा और मां के शव को कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत पैक किया। इतना ही नहीं दो दिन तक विभाग के कहने पर मां को भर्ती करने के एवज में 32 हजार रुपये का भुगतान भी किया।
जानकारी के मुताबिक फल मंडी के पीछे रहने वाली एक 67 वर्षीय बुजुर्ग महिला की तबीयत 16 जुलाई को खराब हुई। परिजन दाउदपुर के एक निजी अस्पताल में ले गए। जहां पर कोविड-19 की जांच कराई गई। जांच में कोरोना पॉजिटिव निकला तो अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। जहां पर बेड न खाली होने का हवाला देकर मरीज को वापस कर दिया गया।
इस बीच वह रेलवे, स्पोर्ट्स कॉलेज और जिला अस्पताल गए। लेकिन निराशा हाथ लगी। अंत में प्रशासन के दबाव के बाद निजी अस्पताल ने फिर से मरीज को भर्ती तो कर लिया। लेकिन इलाज के नाम पर 24 घंटे में एक बार एक स्वास्थ्य कर्मी गया और उसने एक ड्रिप और इंजेक्शन लगा दिया। इस बीच रविवार की भोर में चार बजे के करीब संक्रमित बुजुर्ग महिला की मौत हो गई।
एंबुलेंस का पैसा दिया
इस पर बेटे ने बेसुध मां को देखकर स्वास्थ्य कर्मियों को बुलाया। काफी मान-मनौव्वल के बाद स्वास्थ्य कर्मी आए और मौत की पुष्टि की। बेटे ने मां के शव को कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत सौंपने की बात कही, तो अस्पताल प्रबंधन ने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद उसने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को संपर्क किया, लेकिन किसी ने कोई जवाब नहीं दिया।
बेटे ने बताया कि जब अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए तो खुद अपने लिए और एक अन्य स्वास्थ्य कर्मी के लिए पीपीई किट खरीदा। इसके बाद पॉलिथीन खरीद कर लाया और खुद ही शव को पैक किया। एंबुलेंस के लिए अलग से 2500 रुपये दिए और अस्पताल का भुगतान 32 हजार रुपये किया। एंबुलेंस चालक के लिए भी पीपीई किट खरीदकर दिया।
निजी अस्पताल में कोरोना संक्रमित की मौत
पादरी बाजार के रहने वाले 55 वर्षीय एक व्यक्ति की भी मौत कोरोना से हुई है। निजी पैथालॉजी में उनकी जांच की गई थी। रिपोर्ट रविवार को पॉजिटिव आई थी। देर रात अस्पताल में मौत हो गई। शव को पैक कराने के लिए परिजनों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। सोमवार को परिजनों की मौजूदगी में राजघाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
फोन करते रहे, पर नहीं मिला कोई रिस्पांस, हो गई मौत
इस पर विभाग ने बताया कि निजी लैब ने अपडेट नहीं किया है। ऐसे में जानकारी नहीं है। अपडेट कराने के चक्कर में रविवार की रात गुजर गई। सोमवार को उनकी मौत हो गई। लापरवाही यहीं खत्म नहीं हुई। शव को कोविड-19 के तहत पैक कराने के लिए किसी तरह विभाग ने पॉलिथीन और शव वाहन भेज दिया। लेकिन कोई कर्मी नहीं भेजा। अंत में पांच हजार रुपये देकर शव को पैक कराया गया।
पोर्टल पर अपलोड नहीं हुए मौत के आंकड़े
शहर के दो अस्पतालों और एक घर में कोरोना संक्रमित की मौत हो गई, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी तक नहीं मिल सकी। विभाग के अधिकारी यह दलील देते रहे कि पोर्टल पर अपलोड नहीं हो सका, जबकि तीनों मौत की जानकारी परिजनों ने विभाग को दी है।
सीएमओ डॉ श्रीकांत तिवारी ने बताया कि जिस प्रयोगशाला में जांच हुई, वही मौत की जानकारी सॉफ्टवेयर में अपलोड करते हैं, फिर आधिकारिक जानकारी मिल पाती है। प्राइवेट लैब से इसे लेकर शिकायतें मिल रही हैं। दाउदपुर स्थित हॉस्पिटल में भर्ती महिला के मौत की सूचना है। जब लैब अपडेट करेंगे, तो हम उसे अपनी सूची में दर्ज करेंगे।