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Gorakhpur News: जिन्हें उम्रभर दिया सहारा...उन्हीं ने कर दिया बेसहारा
Wed, 26 Aug 2026 02:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Wed, 26 Aug 2026 02:50 AM IST
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पादरी बाजार (गोरखपुर)। खून-पसीना बहाकर उम्रभर जिन्हें सहारा देते रहे उन्हीं पत्नी-बच्चों ने आखिरी वक्त में डॉ. अजय पांडेय को बेसहारा कर दिया है। इलाज के बहाने बस में बैठाकर हाटा से गोरखपुर भेजे गए डॉ. अजय मंगलवार को खुद को असहाय पाकर रुआंसे नजर आए। नगर निगम के प्रवर्तन दल की सूचना पर पहुंचे इस्माइल रोटी बैंक ने उन्हें आसरा दिया है।
कुशीनगर के कंचनपुर गांव के रहने वाले अजय पांडेय ने जौनपुर मेडिकल कॉलेज से बीएचएमएस की पढ़ाई के बाद घर से करीब 10 किलोमीटर दूर बैसही बाजार में होम्योपैथिक क्लीनिक शुरू की थी। पत्नी, इकलौते बेटे और दो बेटियों के भरण-पोषण की जद्दोजहद में उम्र गुजरती रही। अब बेटा पढ़-लिखकर गुजरात में नौकरी करता है। एक बेटी की शादी कर चुके हैं, दूसरी बेटी मां-बाप के साथ रहती है।
करीब 10 साल पहले खुद की तबीयत बिगड़ी तो डॉ. अजय को क्लीनिक बंद करनी पड़ी और घर पर रहने लगे। उम्रभर परिवार के लिए जूझते रहने वाले डॉ. अजय को अब सहारे की जरूरत थी। उम्मीद थी कि जिस बाग को उम्रभर पसीने से सींचते रहे वहां उन्हें ठंडी छांव मिलेगी लेकिन वह छांव उन्हें नसीब नहीं हो सकी। लाचार बुजुर्ग पत्नी और बेटी के लिए बोझ हो गए। डॉ. अजय ने बस स्टेशन पर मौजूद लोगों को बताया कि मंगलवार की सुबह करीब 10 बजे हाटा बाजार से राजेश नाम के व्यक्ति ने 54 रुपये का टिकट लेकर उन्हें यह कहते हुए रोडवेज बस में बैठा दिया कि इलाज के लिए गोरखपुर ले जाया जा रहा है।
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गोरखपुर बस स्टेशन पहुंचने पर डॉ. अजय अकेले थे। उनकी लाचारी देखकर रोडवेज कर्मचारियों ने नगर निगम के प्रवर्तन दल को जानकारी दी। सूचना पर पहुंची नगर निगम की टीम ने उन्हें सीनियर सिटीजन केयर सेंटर पहुंचाया। बाद में इस्माइल रोटी बैंक संस्था के बारे में जानकारी मिलने पर प्रवर्तन दल ने संपर्क किया। संस्था के संचालक आजाद पांडेय डॉ. अजय को शाहपुर क्षेत्र में स्थित रैन बसेरे में ले गए। वहां उनकी देखभाल की जा रही है।
गैरों में दिखा अपनापन तो छलक उठीं आंखेंअपनों के ठुकराए डॉ. अजय को रैन बसेरे में गैरों से अपनापन मिला तो उनकी आंखें छलक उठीं। उन्होंने आपबीती साझा करते हुए बताया कि वह चलने-फिरने में लाचार हैं। शुगर और बीपी की दवाएं लेते हैं। पत्नी और छोटी बेटी उनके साथ मारपीट करती हैं। सोमवार को एक कप चाय बनाने के लिए कहा तो बेटी का जवाब था कि हम आपके नौकर नहीं हैं। अगले दिन उन्हें बस में बैठाकर गोरखपुर भेज दिया गया।
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कुशीनगर के कंचनपुर गांव के रहने वाले अजय पांडेय ने जौनपुर मेडिकल कॉलेज से बीएचएमएस की पढ़ाई के बाद घर से करीब 10 किलोमीटर दूर बैसही बाजार में होम्योपैथिक क्लीनिक शुरू की थी। पत्नी, इकलौते बेटे और दो बेटियों के भरण-पोषण की जद्दोजहद में उम्र गुजरती रही। अब बेटा पढ़-लिखकर गुजरात में नौकरी करता है। एक बेटी की शादी कर चुके हैं, दूसरी बेटी मां-बाप के साथ रहती है।
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करीब 10 साल पहले खुद की तबीयत बिगड़ी तो डॉ. अजय को क्लीनिक बंद करनी पड़ी और घर पर रहने लगे। उम्रभर परिवार के लिए जूझते रहने वाले डॉ. अजय को अब सहारे की जरूरत थी। उम्मीद थी कि जिस बाग को उम्रभर पसीने से सींचते रहे वहां उन्हें ठंडी छांव मिलेगी लेकिन वह छांव उन्हें नसीब नहीं हो सकी। लाचार बुजुर्ग पत्नी और बेटी के लिए बोझ हो गए। डॉ. अजय ने बस स्टेशन पर मौजूद लोगों को बताया कि मंगलवार की सुबह करीब 10 बजे हाटा बाजार से राजेश नाम के व्यक्ति ने 54 रुपये का टिकट लेकर उन्हें यह कहते हुए रोडवेज बस में बैठा दिया कि इलाज के लिए गोरखपुर ले जाया जा रहा है।
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गोरखपुर बस स्टेशन पहुंचने पर डॉ. अजय अकेले थे। उनकी लाचारी देखकर रोडवेज कर्मचारियों ने नगर निगम के प्रवर्तन दल को जानकारी दी। सूचना पर पहुंची नगर निगम की टीम ने उन्हें सीनियर सिटीजन केयर सेंटर पहुंचाया। बाद में इस्माइल रोटी बैंक संस्था के बारे में जानकारी मिलने पर प्रवर्तन दल ने संपर्क किया। संस्था के संचालक आजाद पांडेय डॉ. अजय को शाहपुर क्षेत्र में स्थित रैन बसेरे में ले गए। वहां उनकी देखभाल की जा रही है।
गैरों में दिखा अपनापन तो छलक उठीं आंखेंअपनों के ठुकराए डॉ. अजय को रैन बसेरे में गैरों से अपनापन मिला तो उनकी आंखें छलक उठीं। उन्होंने आपबीती साझा करते हुए बताया कि वह चलने-फिरने में लाचार हैं। शुगर और बीपी की दवाएं लेते हैं। पत्नी और छोटी बेटी उनके साथ मारपीट करती हैं। सोमवार को एक कप चाय बनाने के लिए कहा तो बेटी का जवाब था कि हम आपके नौकर नहीं हैं। अगले दिन उन्हें बस में बैठाकर गोरखपुर भेज दिया गया।