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Sawan 2021: पुण्य में वृद्धि के साथ ही पापों का विनाश करेगा श्रावण का तीसर सोमवार, ऐसे होंगे भगवान भोले प्रसन्न

Mon, 09 Aug 2021 02:38 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 09 Aug 2021 02:38 AM IST
सार

वाराणसी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन ग्रह और नक्षत्रों को सुखद संयोग बन रहा है। इस दिन श्लेषा के बाद मघा नक्षत्र, वरियान योग, किंस्तुघ्न करण और औदायिक योग सौम्य नाम का है।

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third Monday of Sawan 2021 will destroy sins
sawan 2021 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देवों के देव महादेव को प्रिय श्रावण मास का तीसरा सोमवार नौ अगस्त को है। श्रद्धालु सावन इस दिन शिवालयों में पहुंच भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजन-अर्चन कर उन्हें प्रसन्न करेंगे। सोमवार को भक्तों की होने वाली भीड़ को देखते हुए रविवार को मंदिर प्रबंधन के लोग तैयारी में जुटे रहे।
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मंदिरों को सैनिटाइज कराकर सजाया गया। वाराणसी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन ग्रह और नक्षत्रों को सुखद संयोग बन रहा है। इस दिन श्लेषा के बाद मघा नक्षत्र, वरियान योग, किंस्तुघ्न करण और औदायिक योग सौम्य नाम का है। इस दिन के व्रत से पुण्य की अभिवृद्धि और पूर्वाजित पापों का क्षय होगा।
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श्रावण मास से जुड़ी पौराणिक कथाएं
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, श्रावण का महीना अनेक पौराणिक कहानियों से जुड़ा है। यह महीना सर्वोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है इस महीने में मृकंडुषि के पुत्र मार्कंडेय ने दीर्घायु होने के लिए भगवान शिव की घनघोर तपस्या की थी। भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर दीर्घायु हो गए थे। उन्होंने ऐसी शक्ति प्राप्त कर ली थी कि मृत्यु के देवता यमराज भी उनके सामने नतमस्तक हो गए थे।
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दूसरी कथा के अनुसार इस महीने में भगवान शिव पृथ्वी पर आते हैं, और अपने ससुराल राजा हिमाचल के यहां गमन करते है। यह भी कहा जाता है कि श्रावण के महीने में भगवान शिव का निवास पृथ्वी पर होता है। पृथ्वी पर रहने वाले समस्त भक्तजन उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए जलाभिषेक से उन्हें पसंद करते हैं।


इसी महीने में समुद्र मंथन की हुआ था। समुद्र मंथन से हलाहल विष निकला था। भगवान शिव ने संसार के कल्याण के लिए स्वयं उस विष का पान कर लिया था। जिसके बाद वह नीलकंठ के नाम से विख्यात हुए। विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवताओं ने बिल्वपत्र और जल चढ़ाकर उनके ताप को कम किया था। यही कारण है कि सावन के महीने में भगवान शिव का जलाभिषेक कर उनकी कृपा प्राप्त की जाती है। शिव का एक नाम जल है। इसलिए जल उनके स्वागत के लिए सर्वोत्तम वस्तु है।
 
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