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शादी के साथ 12 साल बाद हुए थे अलग, बेटी के प्रेम ने दोनों को एक किया
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शादी के 12 साल बाद हुए थे अलग, बेटी के प्रेम ने दोनों को किया एक
गोरखपुर। शादी के बाद जीवन प्रेेमपूर्वक चल रहा था। 12 साल बाद कुछ लोगों उनके दिल में मेरे प्रति कुछ गलत बातें भर दीं। नतीजा यह हुआ कि दो साल पहले हम दोनों अलग हो गए। मैं अपनी आठ साल की बेटी को अपने साथ ले आई। दोनों में इतना मनमुटाव हुआ कि कानूनी रूप से अलग होने के लिए अदालत में आवेेदन भी किया। इतना होने के बावजूद बेटी से लगाव और प्रेम में दोनों का मजबूरी में ही सही एक-दूसरे से आमना-सामना होता रहा। दो साल में पति को भी मेरी बेगुनाही का अहसास हो गया।
इस दौरान प्रधान परामर्शदाता संगीत प्रकाश त्रिपाठी ने हम दोनों की काउंसलिंग की और लोक अदालत में आपसी सुलह समझौता करवाने के साथ फिर से संग रहने को प्रेरित किया। आज हम दोनों अपने घर लौट रहे हैं आज से हम फिर एक परिवार हो गए। अब बेटी को पिता से दूर नहीं रहना पड़ेगा। यह कहानी है शहर के अजेय कुमार और रागिनी देवी (दोनों नाम परिवर्तित) की। अजेय और रागिनी का विवाह 2006 में हुआ था। अजेय बताते हैं कि 2018 में कुछ लोगों की वजह से उनका पारिवारिक जीवन कलहपूर्ण हो गया था। तब से हम दोनों अलग रह रहे थे। वरिष्ठ परामर्शदाता ने बताया कि लोक अदालत में शनिवार को 11 जोड़े आपसी सहमति से एक हुए। इन जोड़ों को प्रधान न्यायाधीश देवेंद्र सिंह द्वितीय, अपर न्यायाधीश सुभाष चंद्र यादव और अपर न्यायाधीश इफराक अहमद ने उपहार देकर बेहतर और खुशहाल जीवन की शुभकामनाओं के साथ विदा किया।
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गोरखपुर। शादी के बाद जीवन प्रेेमपूर्वक चल रहा था। 12 साल बाद कुछ लोगों उनके दिल में मेरे प्रति कुछ गलत बातें भर दीं। नतीजा यह हुआ कि दो साल पहले हम दोनों अलग हो गए। मैं अपनी आठ साल की बेटी को अपने साथ ले आई। दोनों में इतना मनमुटाव हुआ कि कानूनी रूप से अलग होने के लिए अदालत में आवेेदन भी किया। इतना होने के बावजूद बेटी से लगाव और प्रेम में दोनों का मजबूरी में ही सही एक-दूसरे से आमना-सामना होता रहा। दो साल में पति को भी मेरी बेगुनाही का अहसास हो गया।
इस दौरान प्रधान परामर्शदाता संगीत प्रकाश त्रिपाठी ने हम दोनों की काउंसलिंग की और लोक अदालत में आपसी सुलह समझौता करवाने के साथ फिर से संग रहने को प्रेरित किया। आज हम दोनों अपने घर लौट रहे हैं आज से हम फिर एक परिवार हो गए। अब बेटी को पिता से दूर नहीं रहना पड़ेगा। यह कहानी है शहर के अजेय कुमार और रागिनी देवी (दोनों नाम परिवर्तित) की। अजेय और रागिनी का विवाह 2006 में हुआ था। अजेय बताते हैं कि 2018 में कुछ लोगों की वजह से उनका पारिवारिक जीवन कलहपूर्ण हो गया था। तब से हम दोनों अलग रह रहे थे। वरिष्ठ परामर्शदाता ने बताया कि लोक अदालत में शनिवार को 11 जोड़े आपसी सहमति से एक हुए। इन जोड़ों को प्रधान न्यायाधीश देवेंद्र सिंह द्वितीय, अपर न्यायाधीश सुभाष चंद्र यादव और अपर न्यायाधीश इफराक अहमद ने उपहार देकर बेहतर और खुशहाल जीवन की शुभकामनाओं के साथ विदा किया।
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