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Gorakhpur News: 'बेतिया स्टेट' की संपत्ति पर किए थे अवैध कब्जा- 41 लोगों पर केस दर्ज, जानिए कौन सी है जमीन
Sat, 31 May 2025 02:04 PM IST
रोहित सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: रोहित सिंह
Updated Sat, 31 May 2025 02:04 PM IST
सार
बेतिया एस्टेट की जमीन पर ही कमिश्नर और अन्य अधिकारियों के आवास भी बने हुए हैं। इसके अलावा स्कूल, धार्मिक स्थल, आवास विकास कॉलोनी और पानी की टंकी भी बनी हुई है। साथ ही करीब पांच हेक्टेयर जमीन पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। खाली कराने की कवायद चल रही है।
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बेतियाहाता में बेतिया स्टेट की जमीन पर कब्जा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
बेतिया एस्टेट की जमीन पर बेतियाहाता में कब्जा कर रह रहे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 41 लोगों को बेदखली का नोटिस भेजने के बाद बिहार सरकार से नियुक्त राजस्व अधिकारी ने केस दर्ज कराया है। जून में केस की सुनवाई होनी है। बिहार एस्टेट का दावा है कि करीब पांच हेक्टेयर जमीन पर लोग लंबे समय से अतिक्रमण कर रह रहे हैं। नोटिस के जवाब में किसी की तरफ से कोई साक्ष्य नहीं दिया गया।
बेतिया एस्टेट की जमीनों की पैमाइश छह साल पहले 28 मार्च 2018 को प्रशासन ने कराई थी। उस दौरान 16 से ज्यादा गाटा संख्या में कुल 19.91 हेक्टेयर जमीन दर्ज की गई थी। हालांकि, बहुत सारी जमीनों पर अब कब्जा भी हो गया है। बिहार सरकार ने बेतिया एस्टेट की जमीनों का अधिग्रहण करने का निर्णय लिया। इसके बाद से अब नए सिरे से पैमाइश हो रही है।
बेतियाहाता में ही अधिकारियों ने जर्जर हो चुके खपरैल बंगला को अपने कब्जे में लेकर उसके चारों तरफ चहारदीवारी करवाई थी। गनीमत था कि इस जमीन पर किसी का कब्जा नहीं था। चहारदीवारी कराते समय भी विवाद हुआ था। लोगों का आरोप था कि नगर निगम की सड़क पर पिलर लगाया जा रहा है। इसके बाद पिलर को पुरानी बाउंड्री में ही बनाया गया।
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इसके अलावा हनुमान मंदिर के पास गाटा संख्या 238 की जमीनों की पैमाइश कराई गई। यहां 16 आवास और दुकान बने हुए हैं। इनमें ज्यादातर कच्चे मकान हैं। यह बस्ती करीब 93 डिसमिल में फैली हुई है। अभी आवास विकास कॉलोनी के कुछ भाग की पैमाइश होनी है, जो बेतिया एस्टेट की जमीन पर बनी है।
तुलसीदास इंटर कॉलेज के परिसर का भी कुछ हिस्सा बेतिया एस्टेट की जमीन का बताया जा रहा है।
करीब पांच हेक्टेयर जमीन पर सड़क और नाला बना हुआ है। अब तक जितनी पैमाइश हुई है, उसके आधार पर बिहार सरकार से नियुक्त प्रशासक ने पहले 38 और फिर पक्का मकान बनाकर रहने वाले तीन लोगों को बेदखली को नोटिस दिया था।
केस की जानकारी नहीं
जनवरी में बेदखली का नोटिस मिला था, जिसका जवाब दे दिया गया था। केस दर्ज होने की जानकारी नहीं है। बेतिया एस्टेट के तत्कालीन मैनेजर ने जमीन आवंटित की थी। करीब 60 साल से अधिक समय हो गया है, यहां लोग रह रहे हैं: जयप्रकाश, स्थानीय निवासी
बेतिया एस्टेट की जमीन पर अवैध रूप से काबिज 41 लोगों को बेदखली का नोटिस जनवरी 2025 में दिया गया था। लोगों ने नोटिस के जवाब में कोई साक्ष्य नहीं उपलब्ध कराए। जमीन को खाली करने के लिए कहा गया, लेकिन किसी ने अतिक्रमण नहीं हटाया। इसलिए, उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, 1972 की धारा 5 के तहत केस दर्ज कराया गया है। एसडीएम कोर्ट में सुनवाई चल रही है: बद्री प्रसाद गुप्ता, प्रशासक, बिहार सरकार एवं सहायक बंदोबस्त अधिकारी
कमिश्नर आवास, स्कूल और धार्मिक स्थल भी बने
बेतिया एस्टेट की जमीन पर ही कमिश्नर और अन्य अधिकारियों के आवास भी बने हुए हैं। इसके अलावा स्कूल, धार्मिक स्थल, आवास विकास कॉलोनी और पानी की टंकी भी बनी हुई है। साथ ही करीब पांच हेक्टेयर जमीन पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। खाली कराने की कवायद चल रही है।
बेतिया एस्टेट की जमीनों का विवरण ( हेक्टेयर में)
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बेतिया एस्टेट की जमीनों की पैमाइश छह साल पहले 28 मार्च 2018 को प्रशासन ने कराई थी। उस दौरान 16 से ज्यादा गाटा संख्या में कुल 19.91 हेक्टेयर जमीन दर्ज की गई थी। हालांकि, बहुत सारी जमीनों पर अब कब्जा भी हो गया है। बिहार सरकार ने बेतिया एस्टेट की जमीनों का अधिग्रहण करने का निर्णय लिया। इसके बाद से अब नए सिरे से पैमाइश हो रही है।
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बेतियाहाता में ही अधिकारियों ने जर्जर हो चुके खपरैल बंगला को अपने कब्जे में लेकर उसके चारों तरफ चहारदीवारी करवाई थी। गनीमत था कि इस जमीन पर किसी का कब्जा नहीं था। चहारदीवारी कराते समय भी विवाद हुआ था। लोगों का आरोप था कि नगर निगम की सड़क पर पिलर लगाया जा रहा है। इसके बाद पिलर को पुरानी बाउंड्री में ही बनाया गया।
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इसके अलावा हनुमान मंदिर के पास गाटा संख्या 238 की जमीनों की पैमाइश कराई गई। यहां 16 आवास और दुकान बने हुए हैं। इनमें ज्यादातर कच्चे मकान हैं। यह बस्ती करीब 93 डिसमिल में फैली हुई है। अभी आवास विकास कॉलोनी के कुछ भाग की पैमाइश होनी है, जो बेतिया एस्टेट की जमीन पर बनी है।
तुलसीदास इंटर कॉलेज के परिसर का भी कुछ हिस्सा बेतिया एस्टेट की जमीन का बताया जा रहा है।
करीब पांच हेक्टेयर जमीन पर सड़क और नाला बना हुआ है। अब तक जितनी पैमाइश हुई है, उसके आधार पर बिहार सरकार से नियुक्त प्रशासक ने पहले 38 और फिर पक्का मकान बनाकर रहने वाले तीन लोगों को बेदखली को नोटिस दिया था।
केस की जानकारी नहीं
जनवरी में बेदखली का नोटिस मिला था, जिसका जवाब दे दिया गया था। केस दर्ज होने की जानकारी नहीं है। बेतिया एस्टेट के तत्कालीन मैनेजर ने जमीन आवंटित की थी। करीब 60 साल से अधिक समय हो गया है, यहां लोग रह रहे हैं: जयप्रकाश, स्थानीय निवासी
बेतिया एस्टेट की जमीन पर अवैध रूप से काबिज 41 लोगों को बेदखली का नोटिस जनवरी 2025 में दिया गया था। लोगों ने नोटिस के जवाब में कोई साक्ष्य नहीं उपलब्ध कराए। जमीन को खाली करने के लिए कहा गया, लेकिन किसी ने अतिक्रमण नहीं हटाया। इसलिए, उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, 1972 की धारा 5 के तहत केस दर्ज कराया गया है। एसडीएम कोर्ट में सुनवाई चल रही है: बद्री प्रसाद गुप्ता, प्रशासक, बिहार सरकार एवं सहायक बंदोबस्त अधिकारी
कमिश्नर आवास, स्कूल और धार्मिक स्थल भी बने
बेतिया एस्टेट की जमीन पर ही कमिश्नर और अन्य अधिकारियों के आवास भी बने हुए हैं। इसके अलावा स्कूल, धार्मिक स्थल, आवास विकास कॉलोनी और पानी की टंकी भी बनी हुई है। साथ ही करीब पांच हेक्टेयर जमीन पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। खाली कराने की कवायद चल रही है।
बेतिया एस्टेट की जमीनों का विवरण ( हेक्टेयर में)
| जमीन | क्षेत्रफल |
| कमिश्नर हाता | 3.501 |
| आवास विकास कॉलोनी | 4.769 |
| आवास विकास कॉलोनी | 1.433 |
| तुलसीदास इंटर कॉलेज | 1.526 |
| पानी की टंकी व स्कूल | 0.060 |
| पक्का मकान | 1.259 |
| मकान | 2.237 |
| सड़क | 4.649 |
| रास्ता | 0.380 |
| नाली | 0.016 |
| कब्रिस्तान | 0.080 |