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Gorakhpur News: संयुक्त परिवार को तोड़ने की हो रही साजिश, युवाओं को रहना होगा सतर्क

Mon, 25 Dec 2023 02:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Mon, 25 Dec 2023 02:26 AM IST
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There is a conspiracy to break the joint family, youth will have to be alert

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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। अभिनेता, रंगकर्मी और सुप्रसिद्ध एंकर अन्नू कपूर ने कहा कि माता-पिता जन्म ही नहीं देते, बल्कि संतानों की खुशी का पूरा ख्याल रखते हैं। इसलिए उन्हें भूलना या छोड़ना पाप है। आज संयुक्त परिवार को तोड़ने का षड्यंत्र हो रहा है। मॉडर्न इंडिया के युवाओं को इसको लेकर सतर्क रहना होगा। भारत की पुरातन संस्कृति को जानने के साथ संयुक्त परिवार के जड़ को बनाए रखना होगा।

अभिनेता अन्नू कपूर रविवार को गोरखपुर लिटरेरी फेस्ट के दूसरे दिन अंजुमन कार्यक्रम में प्रो. हर्ष सिन्हा के सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने गोरखपुर से अपना पुराना रिश्ता जोड़ते हुए बताया कि उनकी मां गोरखपुर में फिराक गोरखपुरी के साथ मुशायरे में शामिल हुई थीं। उनको भी 51 साल पहले गोरखपुर आने का सौभाग्य मिल चुका है। दादा और नाना की दोस्ती ने मां-पिता को करीब लाया। गुरबत में बचपन बीता। पिता के थियेटर से जुड़े होने के कारण उस जमाने में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
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उन्होंने बताया कि माता के अंतिम संस्कार में मुसलमानों ने श्मशान में उनके सम्मान में नमाज-ए-जनाजा पढा। अन्नू कपूर ने बताया-मेरी मां को धर्म की बड़ी मीमांसा थी। उन्होंने बौद्ध, इस्लाम, ख्रीस्त और सनातन का अभ्यास किया। पिता नास्तिक थे। उनका धर्म से कोई लेना-देना नहीं था, इसलिए वह नास्तिक बन गए। मैं भी नास्तिक हूं पर सभी धर्म की इज्जत करता हूं।
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उन्होंने कहा-पैसा ही उनका धर्म है पैसा ही ईमान है, पर पैसे के लिए चोरी नहीं करेंगे, ईमान नहीं बेचेंगे, किसी से ठगी नहीं करेंगे। उन्होंने महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण की कथा सुनाते हुए कहा कि बुद्ध ने स्वर्ग के द्वार पर यह कहकर प्रवेश से ठुकरा दिया कि जबसे बोध हुआ इस बात की इच्छा है हर व्यक्ति को स्वर्ग के द्वार तक जबतक पहुंचा न दूं, तबतक इस स्वर्ग की मुझे कामना नहीं। बृहदारण्यक उपनिषद में सर्वे भवन्तु सुखिनः जैसा श्लोक प्रेम और अध्यात्म के विचार में बंधन की अलौकिक मुक्ति का सबसे बड़ा संदेश है। यह जितना विस्तृत है उतना ही व्यापक भी।
उन्होंने राग देस में राजा भर्तृहरि के नीति शतक, श्रृंगार शतक और वैराग्य शतक की पृष्ठभूमि की कथा अमरफल की कहानी भी संगीतमय अंदाज़ में सुनाया और राजा भर्तृहरि और पिंगला के मध्य भिक्षाटन का संवाद सुनाकर दर्शको को भावविभोर कर दिया। उन्होंने राजस्थानी लोकगीत ''''केसरिया बालम आवो जी पधारो म्हारा देस'''' गुनगुना कर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
इसके बाद मां के मातृत्व को समर्पित ''''मेरी दुनिया है मां तेरे आंचल में, शीतल छाया तू दुख के जंगल'''' में गुनगुनाकर दर्शकों को भावुक कर दिया। इस बीच दर्शकों के सवालों का मज़ेदार और रोचक जवाब भी दिया। अपनी निजी जीवन और शादी के किस्से को बड़े ही मनोरंजक अंदाज में सुनाया। देशभक्ति गीत-ऐ मेरे प्यारे वतन सुनाकर विदा लिया। कार्यक्रम के शुरुआत में डॉ. संजयन त्रिपाठी ने अंग वस्त्र व स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया।
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अब चाहत सिर्फ इतनी कि चैन से मर सकूं
अन्नू कपूर ने एक सवाल के जवाब में कहा-इतनी उपलब्धियों के बाद अब चाहत सिर्फ इतनी है कि चैन से मर सकूं। जैसे उनके मां पिता की मौत हुई वैसे ही वह भी अचानक मरने की इच्छा रखते हैं।

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महज संयोग है अनिल से अन्नू कपूर बनना

उनका नाम अनिल कपूर था, लेकिन फिल्म इंडस्ट्रीज में जाने पर शबाना आजमी ने उनका नाम बदल कर अन्नू कपूर कर दिया। अनिल कपूर से अन्नू कपूर बनना महज एक संयोग है।
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