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Gorakhpur News: राजकीय निर्माण निगम की इकाई प्लांट कराएगी संचालित
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- चिड़ियाघर में तीन साल पहले बनकर तैयार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट अब तक नहीं चल सका
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। राजकीय निर्माण निगम गोरखपुर खंड की इकाई चिड़ियाघर के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को शुरू कराएगी। कराए गए कार्यों की जांच करने के बाद तत्कालीन समय में अनुबंध क्या हुआ था, इसकी जांच होगी।
तीन वर्ष से बनकर तैयार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट अभी तक संचालित नहीं हो सका, ऐसे में उसे चलाकर इसकी जांच की जाएगी। देखा जाएगा कि इसे संचालित करने में क्या दिक्कत आ रही है। परियोजना प्रबंधक डीबी सिंह अपने निर्देशन में इसे संचालित कराएंगे। शासन से 11 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड आने के बाद काम में तेजी आ जाएगी।
डीबी सिंह ने बताया कि इस काम को शुरू के समय में किस इकाई ने किया, ये तो पता है लेकिन, क्यों इसे शुरू नहीं किया जा सका, यह जांच का विषय है। बताया कि प्लांट में कनेक्शन था, लेकिन फर्म की टीम ने इसे प्लांट से नहीं जोड़ा था। इसी वजह से इसका संचालन नहीं हो सका। फर्म दावा कर रही कि उसका भुगतान नहीं हुआ था? इसलिए इसे चालू नहीं किया जा सका।
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उन्होंने बताया कि काम का अनुबंध जब हुआ होगा तो निर्माण के अलावा इसके रखरखाव का भी अनुबंध हुआ था या नहीं, इसकी जांच करनी होगी। कहा, हमारा प्रयास है कि प्लांट को जल्द शुरू करवा कर लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराया जा सके। निदेशक चिड़ियाघर एच राजामोहन ने बताया कि राजकीय निर्माण निगम अनुबंध दस्तावेजों को जांचने के बाद इसे संचालित करने का काम करेंगे। थोड़ा समय लगेगा, लेकिन इसे चालू करवाया जाएगा।
- क्या था मामला
चिड़ियाघर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगा था। चिड़ियाघर खुलने के बाद भी अब तक इसे चालू नहीं किया जा सका। बनाने वाली फर्म का दावा है कि उसका भुगतान रुका था, ऐसे में चालू नहीं किया गया। इसके अलावा जिम्मेदारों ने प्लांट का बिजली कनेक्शन भी नहीं लिया। अब मामले को गोरखपुुर इकाई की निर्माण खंड देख रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। राजकीय निर्माण निगम गोरखपुर खंड की इकाई चिड़ियाघर के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को शुरू कराएगी। कराए गए कार्यों की जांच करने के बाद तत्कालीन समय में अनुबंध क्या हुआ था, इसकी जांच होगी।
तीन वर्ष से बनकर तैयार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट अभी तक संचालित नहीं हो सका, ऐसे में उसे चलाकर इसकी जांच की जाएगी। देखा जाएगा कि इसे संचालित करने में क्या दिक्कत आ रही है। परियोजना प्रबंधक डीबी सिंह अपने निर्देशन में इसे संचालित कराएंगे। शासन से 11 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड आने के बाद काम में तेजी आ जाएगी।
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डीबी सिंह ने बताया कि इस काम को शुरू के समय में किस इकाई ने किया, ये तो पता है लेकिन, क्यों इसे शुरू नहीं किया जा सका, यह जांच का विषय है। बताया कि प्लांट में कनेक्शन था, लेकिन फर्म की टीम ने इसे प्लांट से नहीं जोड़ा था। इसी वजह से इसका संचालन नहीं हो सका। फर्म दावा कर रही कि उसका भुगतान नहीं हुआ था? इसलिए इसे चालू नहीं किया जा सका।
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उन्होंने बताया कि काम का अनुबंध जब हुआ होगा तो निर्माण के अलावा इसके रखरखाव का भी अनुबंध हुआ था या नहीं, इसकी जांच करनी होगी। कहा, हमारा प्रयास है कि प्लांट को जल्द शुरू करवा कर लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराया जा सके। निदेशक चिड़ियाघर एच राजामोहन ने बताया कि राजकीय निर्माण निगम अनुबंध दस्तावेजों को जांचने के बाद इसे संचालित करने का काम करेंगे। थोड़ा समय लगेगा, लेकिन इसे चालू करवाया जाएगा।
- क्या था मामला
चिड़ियाघर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगा था। चिड़ियाघर खुलने के बाद भी अब तक इसे चालू नहीं किया जा सका। बनाने वाली फर्म का दावा है कि उसका भुगतान रुका था, ऐसे में चालू नहीं किया गया। इसके अलावा जिम्मेदारों ने प्लांट का बिजली कनेक्शन भी नहीं लिया। अब मामले को गोरखपुुर इकाई की निर्माण खंड देख रही है।