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Gorakhpur News: तीन साल बाद खत्म हुआ इंतजार, अब नियमित होगी शोध पात्रता परीक्षा
Wed, 29 Jul 2026 02:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Wed, 29 Jul 2026 02:28 AM IST
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में शोध करने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए राहत भरी खबर है। करीब तीन साल बाद अब शोध पात्रता परीक्षा (रेट) के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। विश्वविद्यालय ने नए शैक्षणिक सत्र के साथ ही रेट-2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे शोध प्रवेश का कैलेंडर फिर से नियमित होने की उम्मीद है।
वर्ष 2023 में आयोजित रेट में गड़बड़ियों के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा निरस्त करनी पड़ी थी। इसके चलते शोध प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो गई। इसके बाद 2024 और 2025 में भी सत्र समय पर नियमित नहीं हो सका और शोधार्थियों को लंबे इंतजार का सामना करना पड़ा। अब विश्वविद्यालय ने सत्र 2026 में दो बार रेट आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसी के तहत वर्ष 2026 की शुरुआत में रेट-2025 आयोजित किया गया। जुलाई माह में नए सत्र के साथ ही रेट-2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि शोध प्रवेश को निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप लाया जा सके। विश्वविद्यालय प्रशासन का प्रयास है कि भविष्य में प्रत्येक वर्ष समय पर रेट आयोजित हो और पीएचडी प्रवेश में देरी न हो।
नियमित रेट होने से स्नातकोत्तर उत्तीर्ण विद्यार्थियों को अवसर के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। समय पर परीक्षा होने से शोध पंजीकरण, साक्षात्कार और प्रवेश प्रक्रिया भी तय समय में पूरी हो सकेगी, जिससे विश्वविद्यालय में शोध गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, गोरखपुर विश्वविद्यालय
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वर्ष 2023 में आयोजित रेट में गड़बड़ियों के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा निरस्त करनी पड़ी थी। इसके चलते शोध प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो गई। इसके बाद 2024 और 2025 में भी सत्र समय पर नियमित नहीं हो सका और शोधार्थियों को लंबे इंतजार का सामना करना पड़ा। अब विश्वविद्यालय ने सत्र 2026 में दो बार रेट आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसी के तहत वर्ष 2026 की शुरुआत में रेट-2025 आयोजित किया गया। जुलाई माह में नए सत्र के साथ ही रेट-2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि शोध प्रवेश को निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप लाया जा सके। विश्वविद्यालय प्रशासन का प्रयास है कि भविष्य में प्रत्येक वर्ष समय पर रेट आयोजित हो और पीएचडी प्रवेश में देरी न हो।
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नियमित रेट होने से स्नातकोत्तर उत्तीर्ण विद्यार्थियों को अवसर के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। समय पर परीक्षा होने से शोध पंजीकरण, साक्षात्कार और प्रवेश प्रक्रिया भी तय समय में पूरी हो सकेगी, जिससे विश्वविद्यालय में शोध गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, गोरखपुर विश्वविद्यालय