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Gorakhpur News: नगर निगम से बढ़कर आ गया टैक्स...दर्ज करवा रहे आपत्ति
Thu, 13 Jun 2024 01:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Thu, 13 Jun 2024 01:31 AM IST
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गोरखपुर। जीआईएस सर्वेक्षण के बाद शहर के ज्यादातर भवन स्वामियों की जेब पर असर पड़ने लगा है। नगर निगम की ओर से लगभग 25 हजार नोटिस वितरित कर दिए गए हैं। नए नोटिस में संपत्ति कर में 20 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी है। इसे लेकर भवन स्वामी निगम में आपत्ति दर्ज करवा रहे हैं।
शहर के मकानों का काफी समय से सर्वे नहीं हुआ था। 15-20 साल पुराने भवनों में हुए अतिरिक्त निर्माण का ब्योरा नगर निगम के पास नहीं था। इनका निर्माण क्षेत्रफल बढ़ जाने के बावजूद अधिकांश भवनों पर टैक्स नहीं बढ़ा है। इनके अलावा शहर में भवनों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हो चुका है। इसके लिए शासन ने नगर निगम सीमा में भवनों का जीआईएस (ज्योग्राफिकल इंफॉरमेशन सिस्टम) के जरिए सर्वे कराया है।
करीब दो साल से चल रहे इस सर्वे की रिपोर्ट अब आने लगी है। कई वार्डों की सर्वे रिपोर्ट आने के बाद नगर निगम के टैक्स विभाग ने भवनों की नई पैमाइश के आधार पर टैक्स को रिवाइज कर नोटिस भेजने शुरू कर दिए हैं। इसके बाद से ही लोगों की परेशानी बढ़ गई है। उनको इस सत्र से रिवाइज टैक्स देना पड़ेगा। कुछ भवन स्वामी ऐसे भी हैं जिनका संपत्ति कर पांच गुना तक बढ़ गया है।
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आर्यनगर निवासी रंजीत बहादुर सिंह के यहां पहले करीब दो हजार रुपये का बिल आता था। जीआईएस के बाद यह बढ़कर 10 हजार हो गया। उन्होंने आपत्ति की, लेकिन करीब छह महीने बाद भी निस्तारण नहीं हो सका। संपत्ति मां शारदा सिंह के नाम से थी। उनकी मृत्यु के बाद वह कर निर्धारण सूची को अपडेट करवाने के लिए दौड़ रहे, लेकिन अभी तक नहीं हो सका। उन्होंने संबंधित टैक्स इंस्पेक्टर से बात की लेकिन उनसे भी कोई खास जवाब नहीं मिला।
विष्णुपुरम, शाहपुर के रहने वाले केशव प्रसाद दूबे के यहां पहले करीब 1500 रुपये का बिल पहुंचता था। सर्वे के बाद अब उनके यहां 13 हजार रुपये का नोटिस पहुंच गया। इसे देख वह हैरान रह गए। आरोप लगाया कि बगल के घर का क्षेत्रफल उनसे ज्यादा है, लेकिन उसका बिल उनसे कम है। कहा कि इसमें निगम से त्रुटि हुई है। उन्होंने इसे पहले की तरह करने का अनुरोध किया है।
रोजाना आ रहीं 15-20 आपत्तियां
नगर निगम ने 45 वार्ड में हुए सर्वे के आधार पर करीब 25 हजार भवन मालिकों को नोटिस पहुंचा दिया है। इनमें ज्यादातर मकान ऐसे हैं जो पहली बार टैक्स देंगे। इसके बाद से ही लोग इसे लेकर आपत्ति कर रहे हैं। 50 हजार रुपये तक के हाउस टैक्स का निस्तारण जोनल कार्यालय पर तो 50 हजार से ऊपर की आपत्ति की सुनवाई मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के यहां होती है। कुल मिलाकर रोजाना ऐसे 15 से 20 मामले आ रहे हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि नोटिस पर लोगों के भवनों की नई एआरवी (एनुअल रेंटल वेल्यू) तय कर इसके आधार पर तय किए गए संपत्ति कर की जानकारी दी गई है। इसमें हुई बढ़ोतरी से अगर भवन मालिक सहमत नहीं है तो वह नगर निगम के जोन कार्यालय में आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। उनकी आपत्ति पर सुनवाई होगी और उसका निस्तारण किया जाएगा।
नौ हजार नोटिस का निस्तारण
नोटिस देने के बाद कुछ लोगों ने आपत्ति की तो कुछ ने ऐसे ही छोड़ दिया। अभी तक करीब नौ हजार नोटिस का निस्तारण हो चुका है। इसमें आपत्ति भी शामिल है। अब बाकी बचे मकानों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
जीआईएस सर्वे के आधार पर भवन मालिकों को नोटिस भेजा जा रहा है। अगर कोई भवन मालिक इससे असहमत है तो वह इस पर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपत्तियों का प्राथमिकता से निस्तारण किया जा रहा है।
- विनय कुमार राय, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी
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शहर के मकानों का काफी समय से सर्वे नहीं हुआ था। 15-20 साल पुराने भवनों में हुए अतिरिक्त निर्माण का ब्योरा नगर निगम के पास नहीं था। इनका निर्माण क्षेत्रफल बढ़ जाने के बावजूद अधिकांश भवनों पर टैक्स नहीं बढ़ा है। इनके अलावा शहर में भवनों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हो चुका है। इसके लिए शासन ने नगर निगम सीमा में भवनों का जीआईएस (ज्योग्राफिकल इंफॉरमेशन सिस्टम) के जरिए सर्वे कराया है।
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करीब दो साल से चल रहे इस सर्वे की रिपोर्ट अब आने लगी है। कई वार्डों की सर्वे रिपोर्ट आने के बाद नगर निगम के टैक्स विभाग ने भवनों की नई पैमाइश के आधार पर टैक्स को रिवाइज कर नोटिस भेजने शुरू कर दिए हैं। इसके बाद से ही लोगों की परेशानी बढ़ गई है। उनको इस सत्र से रिवाइज टैक्स देना पड़ेगा। कुछ भवन स्वामी ऐसे भी हैं जिनका संपत्ति कर पांच गुना तक बढ़ गया है।
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आर्यनगर निवासी रंजीत बहादुर सिंह के यहां पहले करीब दो हजार रुपये का बिल आता था। जीआईएस के बाद यह बढ़कर 10 हजार हो गया। उन्होंने आपत्ति की, लेकिन करीब छह महीने बाद भी निस्तारण नहीं हो सका। संपत्ति मां शारदा सिंह के नाम से थी। उनकी मृत्यु के बाद वह कर निर्धारण सूची को अपडेट करवाने के लिए दौड़ रहे, लेकिन अभी तक नहीं हो सका। उन्होंने संबंधित टैक्स इंस्पेक्टर से बात की लेकिन उनसे भी कोई खास जवाब नहीं मिला।
विष्णुपुरम, शाहपुर के रहने वाले केशव प्रसाद दूबे के यहां पहले करीब 1500 रुपये का बिल पहुंचता था। सर्वे के बाद अब उनके यहां 13 हजार रुपये का नोटिस पहुंच गया। इसे देख वह हैरान रह गए। आरोप लगाया कि बगल के घर का क्षेत्रफल उनसे ज्यादा है, लेकिन उसका बिल उनसे कम है। कहा कि इसमें निगम से त्रुटि हुई है। उन्होंने इसे पहले की तरह करने का अनुरोध किया है।
रोजाना आ रहीं 15-20 आपत्तियां
नगर निगम ने 45 वार्ड में हुए सर्वे के आधार पर करीब 25 हजार भवन मालिकों को नोटिस पहुंचा दिया है। इनमें ज्यादातर मकान ऐसे हैं जो पहली बार टैक्स देंगे। इसके बाद से ही लोग इसे लेकर आपत्ति कर रहे हैं। 50 हजार रुपये तक के हाउस टैक्स का निस्तारण जोनल कार्यालय पर तो 50 हजार से ऊपर की आपत्ति की सुनवाई मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के यहां होती है। कुल मिलाकर रोजाना ऐसे 15 से 20 मामले आ रहे हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि नोटिस पर लोगों के भवनों की नई एआरवी (एनुअल रेंटल वेल्यू) तय कर इसके आधार पर तय किए गए संपत्ति कर की जानकारी दी गई है। इसमें हुई बढ़ोतरी से अगर भवन मालिक सहमत नहीं है तो वह नगर निगम के जोन कार्यालय में आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। उनकी आपत्ति पर सुनवाई होगी और उसका निस्तारण किया जाएगा।
नौ हजार नोटिस का निस्तारण
नोटिस देने के बाद कुछ लोगों ने आपत्ति की तो कुछ ने ऐसे ही छोड़ दिया। अभी तक करीब नौ हजार नोटिस का निस्तारण हो चुका है। इसमें आपत्ति भी शामिल है। अब बाकी बचे मकानों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
जीआईएस सर्वे के आधार पर भवन मालिकों को नोटिस भेजा जा रहा है। अगर कोई भवन मालिक इससे असहमत है तो वह इस पर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपत्तियों का प्राथमिकता से निस्तारण किया जा रहा है।
- विनय कुमार राय, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी