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Gorakhpur News: एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को साकार करता है गीता प्रेस
Sat, 08 Jul 2023 01:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 08 Jul 2023 01:35 AM IST
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गीता प्रेस स्थित लीला चित्र मंदिर को देखने के बाद गीता प्रेस ट्रस्टी व अन्य लोगों के साथ ग्रुप
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एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को साकार करता है गीता प्रेस
गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष के समापन समारोह में प्रधानमंत्री ने लोगों को समझाया गीता के सार
देशभर में बनाए जा रहे हैं जन जातीय स्वतंत्रता सेनानी म्यूजियम
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज देश की जनजातीय परंपरा का सम्मान करने के लिए देशभर में जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी म्यूजियम बनाए जा रहे हैं। हमारी जो पवित्र प्राचीन मूर्तियां चोरी करके देश के बाहर भेज दी गई थीं, वह भी अब वापस लाई जा रही हैं। अपनी विरासत को हम सहेज रहे हैं। गीता प्रेस ऐसी संस्था है, जो एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को साकार करती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष के समापन समारोह में उपस्थित जनसमूह को श्रीमद्भागवत गीता का सार समझाया। उन्होंने कहा कि गीता प्रेस अलग-अलग भाषाओं में भारत के मूल चिंतन को जन-जन तक पहुंचाता है। गीता प्रेस ने अपने 100 वर्षो की यह यात्रा ऐसे समय में पूरी की है, जब देश अपनी आजादी का 75वां वर्ष मना रहा है। इस तरह के योग केवल संयोग नहीं होते। 1947 के पहले भारत में निरंतर पुनर्जागरण के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में प्रयास किए गए। गीता प्रेस की स्थापना भी उसका एक बहुत बड़ा आधार बना।
मंच पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, सीएम योगी आदित्यनाथ, सांसद रवि किशन शुक्ल, गीता प्रेस ट्रस्ट बोर्ड के चेयरमैन केशवराम अग्रवाल, महासचिव विष्णु प्रसाद चांदगोठिया, बैजनाथ अग्रवाल मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन गीता प्रेस के मैनेजर लालमणि तिवारी ने किया।
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गांधी के सुझावों का अनुसरण कर रहा गीता प्रेस
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय में महात्मा गांधी कल्याण पत्रिका के माध्यम से गीता प्रेस के लिए लिखा करते थे। उन्होंने सुझाव दिया था कि कल्याण पत्रिका में विज्ञापन न छापे जाएं। संस्था गांधी जी के उस सुझाव का शत प्रतिशत अनुसरण कर रही है।
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लोगों को हैरान करती है गीता प्रेस से प्रकाशित पुस्तकों की संख्या
पीएम मोदी ने कहा कि 100 वर्षों में गीता प्रेस की ओर से करोड़ों किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। यह संख्या किसी को भी हैरान कर सकती है। यहां प्रकाशित पुस्तकें लागत से भी कम मूल्य पर बिकती हैं और घर-घर पहुंचाई जाती हैं। देशभर में इसकी 20 शाखाएं हैं। देश के हर कोने में रेलवे स्टेशन पर गीता प्रेस का स्टाल देखने को मिलता है। 15 अलग-अलग भाषाओं में यहां से करीब 1600 प्रकाशन होते हैं।
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हर संकट में श्रीमद्भागवत गीता से मिलता है विश्वास
पीएम मोदी ने कहा कि 100 साल पहले का ऐसा समय, जब सदियों की गुलामी ने भारत की चेतना को धूमिल कर दिया। इससे भी सैकड़ों साल पहले विदेशी आक्रांताओं ने हमारे पुस्तकालयों को जलाया था। अंग्रेजों के दौर में गुरुकुल और गुरु परंपरा लगभग नष्ट कर दी गई थी। ऐसे में स्वाभाविक था कि ज्ञान और विरासत लुप्त होने की कगार पर थी। हमारे पूज्य ग्रंथ गायब होने लगे थे। उस समय जो प्रिंटिंग प्रेस थे, वे महंगी कीमत के कारण सामान्य मानवीय पहुंच से बहुत दूर थे। गीता और रामायण के बिना हमारा समाज कैसे चल रहा होगा। भारत में कितने बार अधर्म और आतंक बलवान हुआ। सत्य पर संकट के बादल मंडराए। लेकिन हर संकट में भगवद् गीता से सबसे बड़ा विश्वास मिलता है।
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धरोहरों व भारतीय विचारों की हो रही पुर्नप्रतिष्ठा
प्रधानमंत्री ने कहा कि हम आजादी के 75वें साल में भी नौसेना के झंडे पर गुलामी के प्रतीक चिह्न को ढो रहे थे। राजधानी दिल्ली में भारतीय संसद के बगल में अंग्रेजी परंपरा कायम थी। हमने पूरे विश्वास के साथ इन्हें बदलने का कार्य किया। धरोहरों को और भारतीय विचारों की पुर्नप्रतिष्ठा हो रही है। उन्हें वह स्थान दिया जा रहा है जो उन्हें मिलना चाहिए। अब भारतीय नौसेना के झंडे पर छात्रपति शिवाजी महराज के समय का निशान दिखाई दे रहा है।
गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष के समापन समारोह में प्रधानमंत्री ने लोगों को समझाया गीता के सार
देशभर में बनाए जा रहे हैं जन जातीय स्वतंत्रता सेनानी म्यूजियम
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज देश की जनजातीय परंपरा का सम्मान करने के लिए देशभर में जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी म्यूजियम बनाए जा रहे हैं। हमारी जो पवित्र प्राचीन मूर्तियां चोरी करके देश के बाहर भेज दी गई थीं, वह भी अब वापस लाई जा रही हैं। अपनी विरासत को हम सहेज रहे हैं। गीता प्रेस ऐसी संस्था है, जो एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को साकार करती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष के समापन समारोह में उपस्थित जनसमूह को श्रीमद्भागवत गीता का सार समझाया। उन्होंने कहा कि गीता प्रेस अलग-अलग भाषाओं में भारत के मूल चिंतन को जन-जन तक पहुंचाता है। गीता प्रेस ने अपने 100 वर्षो की यह यात्रा ऐसे समय में पूरी की है, जब देश अपनी आजादी का 75वां वर्ष मना रहा है। इस तरह के योग केवल संयोग नहीं होते। 1947 के पहले भारत में निरंतर पुनर्जागरण के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में प्रयास किए गए। गीता प्रेस की स्थापना भी उसका एक बहुत बड़ा आधार बना।
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मंच पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, सीएम योगी आदित्यनाथ, सांसद रवि किशन शुक्ल, गीता प्रेस ट्रस्ट बोर्ड के चेयरमैन केशवराम अग्रवाल, महासचिव विष्णु प्रसाद चांदगोठिया, बैजनाथ अग्रवाल मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन गीता प्रेस के मैनेजर लालमणि तिवारी ने किया।
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गांधी के सुझावों का अनुसरण कर रहा गीता प्रेस
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय में महात्मा गांधी कल्याण पत्रिका के माध्यम से गीता प्रेस के लिए लिखा करते थे। उन्होंने सुझाव दिया था कि कल्याण पत्रिका में विज्ञापन न छापे जाएं। संस्था गांधी जी के उस सुझाव का शत प्रतिशत अनुसरण कर रही है।
लोगों को हैरान करती है गीता प्रेस से प्रकाशित पुस्तकों की संख्या
पीएम मोदी ने कहा कि 100 वर्षों में गीता प्रेस की ओर से करोड़ों किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। यह संख्या किसी को भी हैरान कर सकती है। यहां प्रकाशित पुस्तकें लागत से भी कम मूल्य पर बिकती हैं और घर-घर पहुंचाई जाती हैं। देशभर में इसकी 20 शाखाएं हैं। देश के हर कोने में रेलवे स्टेशन पर गीता प्रेस का स्टाल देखने को मिलता है। 15 अलग-अलग भाषाओं में यहां से करीब 1600 प्रकाशन होते हैं।
हर संकट में श्रीमद्भागवत गीता से मिलता है विश्वास
पीएम मोदी ने कहा कि 100 साल पहले का ऐसा समय, जब सदियों की गुलामी ने भारत की चेतना को धूमिल कर दिया। इससे भी सैकड़ों साल पहले विदेशी आक्रांताओं ने हमारे पुस्तकालयों को जलाया था। अंग्रेजों के दौर में गुरुकुल और गुरु परंपरा लगभग नष्ट कर दी गई थी। ऐसे में स्वाभाविक था कि ज्ञान और विरासत लुप्त होने की कगार पर थी। हमारे पूज्य ग्रंथ गायब होने लगे थे। उस समय जो प्रिंटिंग प्रेस थे, वे महंगी कीमत के कारण सामान्य मानवीय पहुंच से बहुत दूर थे। गीता और रामायण के बिना हमारा समाज कैसे चल रहा होगा। भारत में कितने बार अधर्म और आतंक बलवान हुआ। सत्य पर संकट के बादल मंडराए। लेकिन हर संकट में भगवद् गीता से सबसे बड़ा विश्वास मिलता है।
धरोहरों व भारतीय विचारों की हो रही पुर्नप्रतिष्ठा
प्रधानमंत्री ने कहा कि हम आजादी के 75वें साल में भी नौसेना के झंडे पर गुलामी के प्रतीक चिह्न को ढो रहे थे। राजधानी दिल्ली में भारतीय संसद के बगल में अंग्रेजी परंपरा कायम थी। हमने पूरे विश्वास के साथ इन्हें बदलने का कार्य किया। धरोहरों को और भारतीय विचारों की पुर्नप्रतिष्ठा हो रही है। उन्हें वह स्थान दिया जा रहा है जो उन्हें मिलना चाहिए। अब भारतीय नौसेना के झंडे पर छात्रपति शिवाजी महराज के समय का निशान दिखाई दे रहा है।