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राखी हत्याकांड: नेपाल से 7 साल बाद सामने आई PM रिपोर्ट, क्रॉस वेरीफाई कर फिर कोर्ट में होगा दाखिल

Thu, 05 Feb 2026 01:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Thu, 05 Feb 2026 01:02 AM IST
सार

नेपाल की कास्की जिला पुलिस ने पोखरा लेखनाथ महानगरपालिका वार्ड नंबर 15 देउराली शुमती स्थित थोपसे खोला सामुदायिक वन क्षेत्र में सड़क किनारे झाड़ियों के बीच सूखे पत्तों से ढका हुआ राखी का शव बरामद किया था। इसके बाद अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर शव को पोस्टमार्टम के लिए नेपाल के वेस्टर्न रीजनल हॉस्पिटल पोखरा भेजा था।

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Rakhi murder case, the PM report received from Nepal will be cross-verified and filed in the court
मृतक राखी की फाइल फोटो और आरोपी डॉ डीपी सिंह( फाइल फोटो) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

नेपाल में वर्ष 2018 में शाहपुर की राजेश्वरी उर्फ राखी श्रीवास्तव हत्याकांड में सात साल बाद आखिरकार नेपाल से पोस्टमार्टम (पीएम) रिपोर्ट गोरखपुर पुलिस के हाथ लगी है। यह रिपोर्ट क्रॉस वेरीफाई कराने के बाद कोर्ट में दाखिल कर ट्रायल शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
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राखी अपने पति मनीष सिन्हा के साथ वर्ष 2018 में नेपाल भ्रमण पर गई थी। इसी दौरान नेपाल के कास्की जिले के सारंगकोट क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में उसका शव मिला था। राखी के मायके वालों ने उसका अपहरण कर हत्या करने का आरोप लगाया था। 
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इस मामले में पुलिस ने डॉ. डीपी सिंह और उनके दो कर्मचारी संतोष कुमार और देश दीपक को आरोपी बनाकर जेल भिजवाया था। पुलिस का दावा था कि हत्यारोपियों ने हत्या को दुर्घटना का रूप देने के लिए उसे पहाड़ से धक्का दे दिया था।

नेपाल की कास्की जिला पुलिस ने पोखरा लेखनाथ महानगरपालिका वार्ड नंबर 15 देउराली शुमती स्थित थोपसे खोला सामुदायिक वन क्षेत्र में सड़क किनारे झाड़ियों के बीच सूखे पत्तों से ढका हुआ राखी का शव बरामद किया था। इसके बाद अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर शव को पोस्टमार्टम के लिए नेपाल के वेस्टर्न रीजनल हॉस्पिटल पोखरा भेजा था।
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जांच में शामिल सूत्रों के अनुसार, मृतक राखी के बड़े भाई और मुकदमा वादी अमर प्रकाश श्रीवास्तव हर साल नेपाल जाकर पीएम रिपोर्ट प्राप्त करने का प्रयास करते रहे, लेकिन वहां की पुलिस हमेशा क्राइम सीन, पोस्टमार्टम और आरोपी की स्थानीयता का हवाला देकर रिपोर्ट देने से इन्कार कर देती थी।

पिछले साल दिसंबर में अथक प्रयासों के बाद नेपाल पुलिस ने उन्हें रिपोर्ट सौंप दी। उनका आरोप है कि पीएम रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण डॉ. डीपी सिंह और दो कर्मचारी संतोष कुमार और देश दीपक महज चार माह में ही जमानत पर बाहर आ गए थे। इसके बाद आरोपी पक्ष ने मुकदमा खत्म करने की अपील की थी, लेकिन खारिज होने के बाद प्रोसेडिंग स्टे लगा दिया गया था। इससे केस का ट्रायल पहले शुरू नहीं हो सका।
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बीते 18 दिसंबर को वादी मुकदमा ने एसएसपी से मुलाकात कर आगे की कार्रवाई के लिए मार्गदर्शन लिया। अब दिल्ली मंत्रालय से क्रॉस वेरीफिकेशन की परमिशन का इंतजार है। अनुमति मिलने के बाद पुलिस टीम नेपाल जाएगी और रिपोर्ट की पुष्टि के बाद उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।

पुलिस के अनुसार, रिपोर्ट मिलने के बाद अब अपहरण से तरमीम हत्या के मुकदमे में गिरफ्तारी और गवाहों के बयान का इस्तेमाल कर ट्रायल को आगे बढ़ाया जा सकेगा। वादी के अनुसार, राखी के भाई ने पहले गुमशुदगी दर्ज कराई थी, जो बाद में हत्या में तरमीम हुई थी।

पीएम रिपोर्ट और डिजिटल-भौतिक साक्ष्यों के आधार पर केस का ट्रायल जल्द ही शुरू किया जाएगा और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में तेजी लाई जाएगी: रवि श्रीवास्तव, सीओ गोरखनाथ
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