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Gorakhpur News: ‘चुनरी में दागि’ में दिखा समाज का दर्द, 87 भोजपुरी गजलों का संग्रह जारी
Fri, 09 Oct 2026 03:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 09 Oct 2026 03:07 AM IST
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गोरखपुर। भोजपुरी साहित्यकार डॉ. फूलचंद प्रसाद गुप्त के भोजपुरी गजल संग्रह ‘चुनरी में दागि’ का विमोचन महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलसचिव कार्यालय में हुआ। डॉ. वेदप्रकाश पांडेय और विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव ने पुस्तक का लोकार्पण किया। संग्रह में भोजपुरी की 87 गजलें शामिल हैं, जबकि इसकी भूमिका डॉ. वेदप्रकाश पांडेय ने लिखी है।
विमोचन के बाद डॉ. वेदप्रकाश पांडेय ने कहा कि डॉ. गुप्त ने गजल लेखन के क्षेत्र में अपने पहले प्रयास में ही प्रभाव छोड़ा है। उनकी रचनाओं में जीवन और समाज से जुड़ी विभिन्न परिस्थितियों को स्वर मिला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कृति पाठकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाएगी।
कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव ने कहा कि गजलों में सामाजिक विसंगतियों, लोकजीवन के संघर्ष और मानव मन की जटिलताओं को संवेदनशीलता के साथ उकेरा गया है। कई रचनाओं में आत्ममंथन के जरिये मानवीय मूल्यों से जुड़ने का संदेश भी दिया गया है।
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डॉ. फूलचंद प्रसाद गुप्त ने कहा कि संग्रह की रचनाओं के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक मूल्यों में आ रहे ह्रास की ओर ध्यान खींचने का प्रयास किया गया है। साथ ही समाज को सही दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया है। इस अवसर पर पुस्तक के प्रकाशक सौरभ कुमार सिंह मौजूद रहे।
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विमोचन के बाद डॉ. वेदप्रकाश पांडेय ने कहा कि डॉ. गुप्त ने गजल लेखन के क्षेत्र में अपने पहले प्रयास में ही प्रभाव छोड़ा है। उनकी रचनाओं में जीवन और समाज से जुड़ी विभिन्न परिस्थितियों को स्वर मिला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कृति पाठकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाएगी।
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कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव ने कहा कि गजलों में सामाजिक विसंगतियों, लोकजीवन के संघर्ष और मानव मन की जटिलताओं को संवेदनशीलता के साथ उकेरा गया है। कई रचनाओं में आत्ममंथन के जरिये मानवीय मूल्यों से जुड़ने का संदेश भी दिया गया है।
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डॉ. फूलचंद प्रसाद गुप्त ने कहा कि संग्रह की रचनाओं के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक मूल्यों में आ रहे ह्रास की ओर ध्यान खींचने का प्रयास किया गया है। साथ ही समाज को सही दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया है। इस अवसर पर पुस्तक के प्रकाशक सौरभ कुमार सिंह मौजूद रहे।