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Gorakhpur News: नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम एक फार्मासिस्ट व दो व्यापारियों से कर रही पूछताछ
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- शनिवार को शहर व सिद्धार्थनगर जिले में में कई जगह दी दबिश
- पंजाब से मिले इनपुट के आधार पर आई है सेंट्रल नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम
- दिल्ली-पंजाब में बढ़ते नशे को गोरखपुर की मंडी से मिल रही है डोज
गोरखपुर। भालोटिया मार्केट से बिक रही नशीली दवाइयों की जड़ खोजने आई नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम को पता लगा है कि इस धंधे में दुकानदारों के साथ ही कुछ फर्मासिस्ट भी जुड़े हुए हैं। टीम ने शनिवार को गोरखपुर शहर के अलावा सिद्धार्थनगर जिले में भी छापा मारा। एक फर्मासिस्ट व दो दवा विक्रेताओं से पूछताछ चल रही है। टीम को दिल्ली और पंजाब में नशीली दवाइयां गोरखपुर से जाने का इनपुट मिला है। तीन दिन पहले वाराणसी में कुछ लोग पकड़े गए थे, उनसे भी गोरखपुर का इनपुट मिला है।
बाजार सूत्रों का कहना है कि भालोटिया मार्केट से हर महीने ढाई से तीन करोड़ रुपये की नशीली दवाइयां बाहर भेजी जाती हैं। पिछले साल पटना में नशीली दवा की एक बड़ी खेप पकड़ी गई थी, जिसे गोरखपुर के नाम पर खरीदा गया था। इसके बाद लखनऊ में पकड़ी गई दवा की आपूर्ति भी गोरखपुर के नाम पर ही हुई थी। एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) की टीम ने करीब छह महीने पहले छानबीन शुरू की तो पता लगा कि भालोटिया मार्केट में एक फर्म केवल कागज में ही क्रियाशील है, मौके पर उसकी जगह दूसरी फर्म चल रही है। हालांकि इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच पंजाब और दिल्ली में बड़े पैमाने पर नशे के इंजेक्शन व टेबलेट भेजने वाले रैकेट के बारे में पता लगा तो छानबीन तेज हुई। चर्चा है कि तीन दिन पहले वाराणसी में भी तीन दवा विक्रेताओं से पूछताछ हुई थी। उनकी इनपुट के बाद से ही एनसीबी की एक टीम गोरखपुर आ गई थी। दो दिन तक टीम ने गहन छानबीन कर जानकारी जुटाई। इसके बाद शुक्रवार और शनिवार को पूछताछ शुरू हुई।
फर्मासिस्टाें के नाम पर खरीदी गई थीं दवाएं
शनिवार को टीम सिद्धार्थनगर पहुंची, जहां चार दुकानों की जांच में पाया गया कि दो फार्मासिस्टों के नाम से जारी लाइसेंस पर नशीली दवाओं की बड़ी खरीद हुई है। इनमें से एक से पूछताछ चल रही है। इसके बाद टीम ने गोरखपुर शहर में सूरजकुंड से भी एक दवा व्यापारी से पूछताछ शुरू की है। इससे पहले बृहस्पतिवार को एक एजेंसी के संचालक से पूछताछ व अहम दस्तावेज मिलने के बाद शुक्रवार को एम्स, असुरन, सूरजकुंड और बेतियाहाता में छापा मारा गया था। अब तक एनसीबी चार व्यापारियों को हिरासत में ले चुकी है।
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पिछले बार पकड़े गए मामले को कर दिया था रफा दफा
गोरखपुर और आसपास के जिलों में चल रहे नशीली दवाओं के अवैध नेटवर्क की जांच के लिए एनसीबी की टीम चार दिनों से जिले में मौजूद है। एक साल के भीतर यह तीसरी बार है जब टीम ने भालोटिया मार्केट और दवा व्यापारियों के ठिकानों पर जांच की है। इस पूरी कार्रवाई से खाद्य औषधि विभाग के अफसरों ने खुद को दूर कर लिया है। पिछली बार हुई जांच में नारकोटिक्स ब्यूरो ने भालोटिया में एक ऐसी दुकान पकड़ी थी, जिस पर दो लोगों को लाइसेंस जारी हो गया था। इसमें से एक ही दुकान संचालित थी, जबकि दूसरी केवल कागज में ही थी। अवैध रूप से दुकान संचालन की बात सामने आने पर ड्रग्स विभाग को जांच का जिम्मा मिला, लेकिन जांच के नाम पर लीपापोती कर दी गई। अब फिर वहीं से जिन्न बाहर निकला है। सहायक औषधि आयुक्त पूरन चंद ने कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई जानकारी साझा की जाएगी।
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- पंजाब से मिले इनपुट के आधार पर आई है सेंट्रल नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम
- दिल्ली-पंजाब में बढ़ते नशे को गोरखपुर की मंडी से मिल रही है डोज
गोरखपुर। भालोटिया मार्केट से बिक रही नशीली दवाइयों की जड़ खोजने आई नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम को पता लगा है कि इस धंधे में दुकानदारों के साथ ही कुछ फर्मासिस्ट भी जुड़े हुए हैं। टीम ने शनिवार को गोरखपुर शहर के अलावा सिद्धार्थनगर जिले में भी छापा मारा। एक फर्मासिस्ट व दो दवा विक्रेताओं से पूछताछ चल रही है। टीम को दिल्ली और पंजाब में नशीली दवाइयां गोरखपुर से जाने का इनपुट मिला है। तीन दिन पहले वाराणसी में कुछ लोग पकड़े गए थे, उनसे भी गोरखपुर का इनपुट मिला है।
बाजार सूत्रों का कहना है कि भालोटिया मार्केट से हर महीने ढाई से तीन करोड़ रुपये की नशीली दवाइयां बाहर भेजी जाती हैं। पिछले साल पटना में नशीली दवा की एक बड़ी खेप पकड़ी गई थी, जिसे गोरखपुर के नाम पर खरीदा गया था। इसके बाद लखनऊ में पकड़ी गई दवा की आपूर्ति भी गोरखपुर के नाम पर ही हुई थी। एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) की टीम ने करीब छह महीने पहले छानबीन शुरू की तो पता लगा कि भालोटिया मार्केट में एक फर्म केवल कागज में ही क्रियाशील है, मौके पर उसकी जगह दूसरी फर्म चल रही है। हालांकि इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच पंजाब और दिल्ली में बड़े पैमाने पर नशे के इंजेक्शन व टेबलेट भेजने वाले रैकेट के बारे में पता लगा तो छानबीन तेज हुई। चर्चा है कि तीन दिन पहले वाराणसी में भी तीन दवा विक्रेताओं से पूछताछ हुई थी। उनकी इनपुट के बाद से ही एनसीबी की एक टीम गोरखपुर आ गई थी। दो दिन तक टीम ने गहन छानबीन कर जानकारी जुटाई। इसके बाद शुक्रवार और शनिवार को पूछताछ शुरू हुई।
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फर्मासिस्टाें के नाम पर खरीदी गई थीं दवाएं
शनिवार को टीम सिद्धार्थनगर पहुंची, जहां चार दुकानों की जांच में पाया गया कि दो फार्मासिस्टों के नाम से जारी लाइसेंस पर नशीली दवाओं की बड़ी खरीद हुई है। इनमें से एक से पूछताछ चल रही है। इसके बाद टीम ने गोरखपुर शहर में सूरजकुंड से भी एक दवा व्यापारी से पूछताछ शुरू की है। इससे पहले बृहस्पतिवार को एक एजेंसी के संचालक से पूछताछ व अहम दस्तावेज मिलने के बाद शुक्रवार को एम्स, असुरन, सूरजकुंड और बेतियाहाता में छापा मारा गया था। अब तक एनसीबी चार व्यापारियों को हिरासत में ले चुकी है।
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पिछले बार पकड़े गए मामले को कर दिया था रफा दफा
गोरखपुर और आसपास के जिलों में चल रहे नशीली दवाओं के अवैध नेटवर्क की जांच के लिए एनसीबी की टीम चार दिनों से जिले में मौजूद है। एक साल के भीतर यह तीसरी बार है जब टीम ने भालोटिया मार्केट और दवा व्यापारियों के ठिकानों पर जांच की है। इस पूरी कार्रवाई से खाद्य औषधि विभाग के अफसरों ने खुद को दूर कर लिया है। पिछली बार हुई जांच में नारकोटिक्स ब्यूरो ने भालोटिया में एक ऐसी दुकान पकड़ी थी, जिस पर दो लोगों को लाइसेंस जारी हो गया था। इसमें से एक ही दुकान संचालित थी, जबकि दूसरी केवल कागज में ही थी। अवैध रूप से दुकान संचालन की बात सामने आने पर ड्रग्स विभाग को जांच का जिम्मा मिला, लेकिन जांच के नाम पर लीपापोती कर दी गई। अब फिर वहीं से जिन्न बाहर निकला है। सहायक औषधि आयुक्त पूरन चंद ने कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई जानकारी साझा की जाएगी।