नकली सोना देकर ठगी मामला: अंगूठा टेक है सरगना, सभी शातिर बातों में उलझाने में भी माहिर
एसएसपी के प्रेस कांफ्रेंस में आए सिद्धार्थनगर निवासी पीड़ित घनश्याम फफक पड़े। एसएसपी से बोले साहब सोचा नहीं था कि आरोपी पकड़े जाएंगे। मैंने घर में एक शादी के लिए तीन लाख रुपये कर्ज लिया था। लालच में फंसकर और कर्जदार हो गया था। मगर, अब आरोपी पकड़ लिए गए तो भरोसा हुआ कि रुपये मिल जाएगे।
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नकली सोना देकर ठगी करने वाले गिरोह के 13 सदस्य में से कोई भी पढ़ा लिखा नहीं है, लेकिन बात करने में इतने माहिर हैं कि किसी को फंसा लें।
इसमें से सरगना 55 साल का रवि इतना शातिर है कि नकली के बीच से ही असली दाना तोड़कर जांच के लिए देता था। पलक झपकते वह इस काम को ऐसे कर लेता था कि सामने मौजूद जौहरी को भी इसकी भनक नहीं लगती थी और उसकी बातों में उलझकर लालच में आकर अपने रुपये गंवा देते थे।
इसी तरह से गिरोह ने वाराणसी में कुछ दिन पहले ही 11 लाख रुपये की जालसाजी की, लेकिन वहां पर जौनपुर के पीड़ित को बुलाया गया था और केस दर्ज नहीं हुआ। अब पुलिस ने वाराणसी पुलिस को इसकी जानकारी दी है।
ठगों के इस गिरोह में सरगना रवि का बेटा गणेश राय, मां, बहन भी शामिल हैं। पहले वह अपने परिवार के साथ ही ठगी करता था, लेकिन फिर उसे लगा कि अगर कुछ और लोग गिरोह में रहें तो इस काम को आसानी से किया जा सकता है। इसके बाद उसने अपने आसपास के लोगों से संपर्क किया।
गिरोह में अधिक लोग होने का फायदा उसे डराने धमकाने में मिलता था। अगर, उससे व्यापारी यह कहते थे कि सोना नकली है तो फिर सब एकजुट हो जाते थे और व्यापारी डर जाते थे फिर रुपये लेकर सभी जिला छोड़ देते थे। वारदात करने के लिए लोगों को रेलवे स्टेशन या बस स्टेशन के आसपास ही बुलाते थे ताकि, तत्काल ट्रेन या बस से वारदात वाले जिले को छोड़ दें।
फर्जी आधार कार्ड से लेते थे कमरा
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वह जिस भी जिले में जाते थे वहां पर कमरा लेने के लिए फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल किया करते थे। ताकि, अगर सीसीटीवी कैमरे में उनकी तस्वीर भी आ जाए और पुलिस उस होटल या मकान तक पहुंचे तो पता फर्जी मिले। आरोपियों के पास से पुलिस ने 12 फर्जी आधार कार्ड बरामद किया है।
बलिया के अजीत से की थी 11 लाख की ठगी, पहचान भी की
बलिया के रसड़ा से आए व्यापारी अजीत सोनी से 11 लाख रुपये की ठगी इसी गिरोह ने फर्जी सोना देकर की थी। उन्हें जब गिरोह के बारे में जानकारी हुई तो रविवार की शाम गोरखपुर आए। उन्होंने कचहरी में जाकर एक आरोपी की पहचान भी कर ली है।
फफक पड़े घनश्याम, बोले-साहब मैं कर्ज लेकर आया था
एसएसपी के प्रेस कांफ्रेंस में आए सिद्धार्थनगर निवासी पीड़ित घनश्याम फफक पड़े। एसएसपी से बोले साहब सोचा नहीं था कि आरोपी पकड़े जाएंगे। मैंने घर में एक शादी के लिए तीन लाख रुपये कर्ज लिया था। लालच में फंसकर और कर्जदार हो गया था। मगर, अब आरोपी पकड़ लिए गए तो भरोसा हुआ कि रुपये मिल जाएगे। गलती से कोई लालच में न फंसे यही सबको सीख देंगे।
पहले बनाते थे जान-पहचान, फिर विश्वास में लेकर करते थे जालसाजी
जिस भी जिले में आरोपियों को वारदात करनी होती थी, वहां पर पहले जाकर सब्जी या फिर दाल बेचने का काम करने लगते थे। फिर इसी के जरिए छोटे व्यापारी से जान पहचान करते थे और बताते थे कि उन्हें सोना मिल गया है, जिसे बेचवा दें।
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि व्यवहार बनाकर खरीदार को अपने झांसे में लेकर विश्वास दिलाते हैं कि हम लोग मजदूरी का भी काम करते हैं। हमें खुदाई में काफी मात्रा में सोने का सामान मिला है, अगर हम कहीं और बेचेंगे तो हमें लोग चोर समझेंगे। आपसे संपर्क हो गया है और आप पर विश्वास हो गया है, इसलिए आपको बेच रहे हैं जो उचित मूल्य है वह हमें दे दीजिए। जो व्यक्ति झांसे में आ जाता है उसे पहले नमूना के तौर पर सोने का एक-दो दाना असली दिखाते हैं, जब उन्हें विश्वास हो जाता है तो उन्हें भिन्न-भिन्न रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन आदि पर बुलाकर उनसे पैसा लेकर नकली सोना दे देते हैं और रुपये आपस में बांट लेते हैं।
महिलाओं को अपने साथ इसलिए रखते हैं कि कोई शक न करें। पैसा लेकर यह कहते हुए निकल लेते हैं कि यदि पुलिस देख लेगी तो पकड़ लेगी। ठगी के बाद घटना में प्रयुक्त मोबाइल व सिम कार्ड तोड़ कर फेंक देते हैं। विभिन्न आईडी कार्ड गलत नाम व पते का तैयार कराते हैं जो अपरिचित स्थान पर रुकने के लिए आईडी के रूप में काम आता है। गिरोह के कुछ लोग कस्टमर को फंसाने का काम करते हैं और कुछ लोग आसपास रहकर निगरानी करते रहते हैं। कुछ लोग माल देकर पैसा लेने जाते हैं। यदि कोई बात होती है तो हम सभी लोग एक साथ इकट्ठा होकर उस आदमी को घेर कर दबाव बनाते हैं और पैसा लेकर निकल जाते हैं।
पांच भाषाओं की जानकारी, फंसाने को करते हैं इस्तेमाल
पकड़े गए गिरोह के सदस्यों को पांच भाषाओं की जानकारी है। इसमें से कोई गुजराती का माहिर है तो कोई बंगला, कोई राजस्थानी बोल लेता है। भोजपुरी तो सभी जाते हैं। प्रभारी निरीक्षक रणधीर मिश्रा ने बताया कि पूछताछ में पता चला है कि यह अपराध के तरीके में भाषा का भी फायदा लेते हैं। जालसाजी से पहले ऐसे लोगों को पकड़ते हैं, जो बाहर से आए हों। अक्सर इन्हें कोई राजस्थानी या फिर गुजराती मिल गया तो उसे वहीं की भाषा में बातकर मेलजोल बढ़ा लेते थे।
इन बातों का ध्यान, बचें ठगी से
- मुफ्त या बहुत सस्ता कुछ नहीं मिलता, लालच से बचें
- अगर कोई इस तरह की सोने या कुछ जानकारी दें तो तत्काल पुलिस को सूचना दें
- अगर बहकावे में फंस गए और ठगी हो भी गई तो डरे नहीं, तत्काल पुलिस को बताएं
- दूसरे जिले में अगर किसी के बुलाने पर जाते हैं तो लोकल किसी को साथ रखें