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Gorakhpur News: जमीन नगर निगम की, रहते थे पूर्व विधायक...अब दुकानदारों का कब्जा

Sun, 18 Feb 2024 03:11 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 18 Feb 2024 03:11 AM IST
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The land belongs to the Municipal Corporation, where former MLAs used to live...now it is in the possession of shopkeepers.
नगर निगम ने .097 हेक्टेयर जमीन पर बने आवास और 20 दुकानों को खाली करने का दिया नोटिस
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सात दिन में साक्ष्य सहित मांगा जवाब, नहीं देने पर खाली कराने को कहा

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बक्शीपुर में नगर निगम की जमीन पर पूर्व विधायक का आवास और दुकानदारों का कब्जा है। मामले की जांच कराने के बाद नगर निगम ने अभिलेखों में खुद की जमीन बताकर अब आवास और दुकान को खाली करने का नोटिस दिया है। सप्ताहभर में कब्जेदारों से साक्ष्य के साथ जवाब मांगा है। ऐसा नहीं होने पर जबरन खाली कराने की चेतावनी भी दी है। इस नोटिस से हड़कंप मच गया है।

दरअसल, पूरा मामला बक्शीपुर चौराहे के पास .097 हेक्टेयर जमीन का है। जानकारों का कहना है कि अंग्रेजों के समय इस जमीन पर आवास बना था और बाद में नीचे दुकानें खुल गईं। आवास में 1982 से देवरिया के रुद्रपुर के पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह रहते थे। अब आवास जर्जर हालत में है और रहने लायक नहीं है। पूर्व विधायक का दावा है कि यह आवास उन्हें तत्कालीन जिलाधिकारी ने आवंटित की थी।
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उन्होंने जिला प्रशासन से शिकायत की थी कि जिस जमीन पर आवास व दुकान है, वह सरकारी है। कुछ लोगों ने दुकानों को अपने नाम गलत तरीके से रजिस्ट्री करा ली और कब्जा कर लिया है। इसी शिकायत पर सदर तहसील ने नगर निगम प्रशासन से जांच कराई।
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अपर नगर आयुक्त निरंकार सिंह ने बताया कि अराजी नंबर 467/101 रक्बा .097 हेक्टेयर पर भूमि पर दुकान के रूप कब्जा पाया गया है। जबकि यह भूमि म्यूनिसिपल बोर्ड (अब नगर निगम) की कृषि योग्य (बाद में बंजर) भूमि है। लिहाजा, दुकानों को खाली करने को कहा गया है। ज्यादातर दुकानें पुस्तकों की हैं।
इस नोटिस के आने के बाद दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक दुकानदार ने बताया कि नोटिस मिला है। हम लोग विधिक राय ले रहे हैं।

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वर्जन
जिस जमीन पर दुकानें और आवास हैं, वह नगर निगम की संपत्ति है। निगम के अभिलेख में दर्ज भी है। शिकायत पर इसकी जांच कराई गई तो जमीन पर मालिकाना हक नगर निगम का पाया गया है। 20 दुकानदारों को नोटिस भेजकर सप्ताहभर में पक्ष रखने को कहा गया है। अगर उनके पास कोई अभिलेख है तो प्रस्तुत करें, उसकी जांच करा लेंगे। अगर जवाब नहीं देते हैं तो उन्हें दुकान खाली करने को कहा गया है। ऐसा न करने पर नगर निगम प्रशासन आवास और दुकान खाली कराएगा।


-निरंकार सिंह, अपर नगर आयुक्त


1930 में मकान बना था और मुझे 1982 में मुझे प्रशासन की ओर से आवंटित किया गया था। जमीन कृषि भूमि युक्त बंजर जमीन है। बाद में इसे कुछ लोगों ने फर्जी तरीके से दुकानों की रजिस्ट्री करा ली। इस मामले की शिकायत मैंने जिला प्रशासन से की थी। पता चला है कि अब नगर निगम ने जांच कराकर नोटिस जारी किया है। मेरे पास सारे दस्तावेज मौजूद हैं। निगम की ओर से मुझसे जब भी मांगा जाएगा, दस्तावेज उपलब्ध करा दूंगा। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
-अनुग्रह नारायण सिंह उर्फ खोखा सिंह, पूर्व विधायक
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