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गोरखपुर में धर्मांतरण!: सेंट एंड्रयूज कॉलेज के 30 शिक्षकों और कर्मचारियों पर लगा आरोप, जांच करने पहुंची टीम
Tue, 21 Apr 2026 01:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 21 Apr 2026 01:56 AM IST
सार
क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डाॅ. उदयभान ने बताया कि आरोपों की बाबत दो सदस्यीय समिति गठित की गई है। आरोपों के सभी बिंदुओं पर टीम ने जांच की। सभी आरोप निराधार पाए गए। छद्म नाम से किसी ने शिकायत की थी। वहीं, प्राचार्य प्रो. एसडी राजकुमार ने कहा कि जान बूझकर कॉलेज की छवि धूमिल करने की हुई कोशिश की गई है। जांच में शिकायत फर्जी पाई गई है।
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धर्मांतरण का आरोप (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सेंट एंड्रयूज कॉलेज में 30 शिक्षकों और कर्मचारियों का धर्मांतरण के लिए दबाव बनाए जाने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस संबंध में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी की ओर से गठित दो सदस्यीय टीम सोमवार को कॉलेज में जांच के लिए पहुंची। कॉलेज परिसर में हड़कंप मच गया। हालांकि जांच में सभी आरोप निराधार पाए गए। कॉलेज प्रशासन ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
बताया जा रहा है कि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन को दो अलग-अलग शिकायतें मिली थीं। उनमें बताया गया था कि कॉलेज के 30 शिक्षकों और कर्मचारियों को धर्मांतरण के लिए विवश किया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामला क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी (आरएचईओ) डॉ. उदयभान को रेफर कर दिया था। आरएचईओ ने मामले में दो सदस्यीय समिति गठित कर दी।
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बताया जा रहा है कि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन को दो अलग-अलग शिकायतें मिली थीं। उनमें बताया गया था कि कॉलेज के 30 शिक्षकों और कर्मचारियों को धर्मांतरण के लिए विवश किया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामला क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी (आरएचईओ) डॉ. उदयभान को रेफर कर दिया था। आरएचईओ ने मामले में दो सदस्यीय समिति गठित कर दी।
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समिति के सदस्य सोमवार को सुबह करीब 10:30 बजे कॉलेज परिसर में पहुंचे। कॉलेज के अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी गई। इसके बाद कॉलेज में हड़कंप की स्थिति बन गई। पहली शिकायत पर जो मोबाइल नंबर दर्ज था, उससे संपर्क किया। तब पता चला कि वह नंबर एक महिला कर्मचारी का है।
उस महिला कर्मचारी ने जांच समिति को बताया कि उसके नाम और मोबाइल नंबर का दुरुपयोग किया गया है। दूसरे पत्र में शिकायतकर्ता का नाम समाजसेवी लिखा था। उस नंबर पर फोन करने पर पता चला कि कॉलेज की ही एक शिक्षिका का मोबाइल नंबर है। उन्होंने भी किसी शिकायत से इनकार किया।
उस महिला कर्मचारी ने जांच समिति को बताया कि उसके नाम और मोबाइल नंबर का दुरुपयोग किया गया है। दूसरे पत्र में शिकायतकर्ता का नाम समाजसेवी लिखा था। उस नंबर पर फोन करने पर पता चला कि कॉलेज की ही एक शिक्षिका का मोबाइल नंबर है। उन्होंने भी किसी शिकायत से इनकार किया।
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शिकायत पत्र में जिन 30 शिक्षकों को मतांतरण के लिए विवश किए जाने की बात कही गई थी, वे भी समिति के समक्ष पेश हुए। उन्होंने आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने फर्जी नामों से शिकायत करने वालों की पहचान कर कॉलेज प्रशासन की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराए जाने की मांग की। सभी 30 शिक्षकों व कर्मचारियों ने कहा कि वे मुख्यमंत्री से मिलकर उच्च स्तरीय जांच की मांग करेंगे।
इस बाबत प्राचार्य प्रो. एसडी राजकुमार ने कहा कि जान बूझकर कॉलेज की छवि धूमिल करने की हुई कोशिश की गई है। जांच में शिकायत फर्जी पाई गई है। इस मामले में कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।
इस संबंध में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डाॅ. उदयभान ने बताया कि आरोपों की बाबत दो सदस्यीय समिति गठित की गई है। आरोपों के सभी बिंदुओं पर टीम ने जांच की। सभी आरोप निराधार पाए गए। छद्म नाम से किसी ने शिकायत की थी। शिकायतकर्ता के रूप में मोबाइल नंबर का भी दुरुपयोग किया गया है।
इस बाबत प्राचार्य प्रो. एसडी राजकुमार ने कहा कि जान बूझकर कॉलेज की छवि धूमिल करने की हुई कोशिश की गई है। जांच में शिकायत फर्जी पाई गई है। इस मामले में कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।
इस संबंध में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डाॅ. उदयभान ने बताया कि आरोपों की बाबत दो सदस्यीय समिति गठित की गई है। आरोपों के सभी बिंदुओं पर टीम ने जांच की। सभी आरोप निराधार पाए गए। छद्म नाम से किसी ने शिकायत की थी। शिकायतकर्ता के रूप में मोबाइल नंबर का भी दुरुपयोग किया गया है।