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Gorakhpur News: कार्निया ट्रांसप्लांट के बाद महिला अब देख सकेगी दुनिया
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बीआरडी के नेत्र रोग विभाग ने महिला व एक बच्चे को लगाई पुतली
लायंस आई क्लब वाराणसी ने उपलब्ध कराई कार्निया
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल काॅलेज के नेत्र रोग विभाग के डाॅक्टरों ने नौ साल के बच्चे समेत दो लोगों के जीवन में उजाले का रंग भर दिया है। लायंस आई क्लब वाराणसी के प्रयास से दो मरीजों को कार्निया (आंख की पुतली) दी गई है। डॉक्टरों ने दोनों मरीजों के एक-एक आंख में लगाई गई है। अब वे आसानी से देख सकेंगे।
विभागाध्यक्ष डाॅ. रामयश ने देवरिया के सलेमपुर की 46 वर्षीय किसमावती देवी की आंख का आपरेशन किया। बताया कि काफी पहले चोट लगने से किसमावती की दोनों आंखें खराब हो गई थीं। इसकी वजह से वह देख नहीं पा रही थीं। इस बीच उन्होंने संपर्क किया तो बाएं आंख में कार्निया को ट्रांसप्लांट किया गया।
पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रामकुमार जायसवाल ने कुशीनगर के मठिया के नौ वर्षीय बच्चे का ऑपरेशन कर कार्निया को ट्रांसप्लांट किया है। बताया कि बच्चे की दाईं आंख ठीक थी। काफी पहले चोट लगने से बाईं आंख की पुतली और लेंस खराब हो गई थी। आंख में पुतली के साथ ही लेंस भी लगाया गया। बताया कि कार्निया मिलते ही दोनों मरीजों को बुलाकर ऑपरेशन किया गया। अब वह देख सकेंगे।
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लायंस आई क्लब वाराणसी ने उपलब्ध कराई कार्निया
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल काॅलेज के नेत्र रोग विभाग के डाॅक्टरों ने नौ साल के बच्चे समेत दो लोगों के जीवन में उजाले का रंग भर दिया है। लायंस आई क्लब वाराणसी के प्रयास से दो मरीजों को कार्निया (आंख की पुतली) दी गई है। डॉक्टरों ने दोनों मरीजों के एक-एक आंख में लगाई गई है। अब वे आसानी से देख सकेंगे।
विभागाध्यक्ष डाॅ. रामयश ने देवरिया के सलेमपुर की 46 वर्षीय किसमावती देवी की आंख का आपरेशन किया। बताया कि काफी पहले चोट लगने से किसमावती की दोनों आंखें खराब हो गई थीं। इसकी वजह से वह देख नहीं पा रही थीं। इस बीच उन्होंने संपर्क किया तो बाएं आंख में कार्निया को ट्रांसप्लांट किया गया।
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पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रामकुमार जायसवाल ने कुशीनगर के मठिया के नौ वर्षीय बच्चे का ऑपरेशन कर कार्निया को ट्रांसप्लांट किया है। बताया कि बच्चे की दाईं आंख ठीक थी। काफी पहले चोट लगने से बाईं आंख की पुतली और लेंस खराब हो गई थी। आंख में पुतली के साथ ही लेंस भी लगाया गया। बताया कि कार्निया मिलते ही दोनों मरीजों को बुलाकर ऑपरेशन किया गया। अब वह देख सकेंगे।
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