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Gorakhpur News: खेल-खेल में जिंदगी ने ली करवट, पानी में बह गए डॉक्टर और अफसर बनने के सपने

Wed, 27 May 2026 02:51 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 27 May 2026 02:51 AM IST
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The deaths of three teenagers cast a pall of gloom over the neighborhood, extinguishing the only hope for two families.
राप्ती नदी में दर्दनाक हादसा ...
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तीन किशोरों की मौत से मोहल्ले में मातम, दो परिवारों के बुझ गए इकलौते चिराग
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। राजघाट थानाक्षेत्र के राप्ती नदी के किनारे सोमवार को हुए हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। खेलते-खेलते नदी में नहाने पहुंचे तीन किशोर गहरे पानी में चले गए और डूबने से उनकी मौत हो गई। मृतकों में दो परिवारों के इकलौते बेटे भी शामिल हैं, जिससे घरों में कोहराम मच गया। डॉक्टर और अफसर बनने के सपने देखते इन मासूमों की जिंदगी अचानक खत्म हो गई।
सुधीर का बेटा अंश उर्फ निक्कू घर का इकलौता बेटा था। वह एक निजी स्कूल में 10वीं कक्षा का छात्र था। परिवार में मां रेखा, बाबा रामदरश और एक बहन अंशिका हैं। पिता मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। मां रेखा ने रोते हुए बताया कि उनका बेटा बड़ा होकर डॉक्टर बनना चाहता था। इसी तरह शक्ति कुमार गौतम, जो 9वीं कक्षा का छात्र था, भी इस हादसे का शिकार हो गया। उसके परिवार में मां सुभावती, पिता मोहन कुमार गौतम, एक बहन मोनिका और मझला भाई सागर हैं। पिता दिहाड़ी मजदूर हैं, जबकि मां घरों में चौका-बर्तन कर परिवार चलाती हैं। मां के अनुसार शक्ति सुबह से कुछ नहीं खाया था और शाम करीब पांच बजे मैगी लेने घर आया था। वह अक्सर कहता था कि मां, मैं कुछ बनकर दिखाऊंगा। ये बोलते हुए मां की आंशू छलक उठे। इधर, फखरुद्दीन का बेटा इरफान भी 10वीं का छात्र था और घर का इकलौता बेटा था। पिता हलवाई का काम करते हैं, जबकि मां सोना घरों में काम करती हैं। परिवार में एक छोटी बहन खुशी भी है। परिजनों के मुताबिक इरफान का सपना आईपीएस बनकर परिवार का नाम रोशन करना था। लेकिन वह कब और कैसे राप्ती नदी तक पहुंच गया, किसी को अंदाजा नहीं था।
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राप्ती नदी में नहाने गए थे सभी किशोर
स्थानीय लोगों के अनुसार मोहल्ले के करीब 12 बच्चे पहले मोहल्ले में खेल रहे थे। कुछ देर बाद सभी क्रिकेट खेलने की बात करते हुए नार्मल क्षेत्र की ओर चले गए और फिर राप्ती नदी पहुंच गए। वहां नहाने के दौरान अचानक तीन किशोर गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बाकी बच्चे यह देखकर घबरा गए और वहां से भाग खड़े हुए। वहीं एक किशोर किसी तरह घर पहुंचा और परिजनों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
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घंटों की तलाश, फिर मिली दर्दनाक खबर
सूचना मिलते ही परिजन और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। नदी किनारे चीख-पुकार मच गई। किसी को उम्मीद नहीं थी कि कुछ ही मिनटों की लापरवाही इतनी बड़ी त्रासदी बन जाएगी।मौके पर पहुंचे एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम ने तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तीनों के शव को बाहर निकाल सकी। कुछ ही देर में तीनों किशोरों के डूबने की पुष्टि हो गई।
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मोहल्ले में मातम, हर आंख नम
एक ही मोहल्ले के तीन मासूमों की मौत से पूरा इलाका शोक में डूब गया। घरों में मातम पसरा है। कहीं मां छाती पीटकर रो रही है तो कहीं लोग बेहोश होकर गिर पड़े। रिश्तेदारों और मोहल्लेवासियों का तांता लगा हुआ है। हर कोई एक-दूसरे को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन दर्द इतना गहरा है कि शब्द भी कम पड़ रहे हैं।
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आपदा प्रबंधन टीम और गोताखोर मौजूद, फिर भी हादसे
प्रशासन की ओर से राजघाट पर आपदा प्रबंधन टीम की तैनाती की गई है। इसके अलावा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित गोताखोरों को भी तैयार रखा जाता है। स्थानीय स्तर पर चेतावनी बोर्ड और संकेतक (साइन बोर्ड) भी लगाए गए हैं, जिन पर स्पष्ट रूप से नदी में गहराई और खतरों की जानकारी दी गई है। इसके बावजूद नहाने या खेलते समय बच्चे इन चेतावनियों को नजरअंदाज कर देते हैं और हादसों का शिकार हो जाते हैं।



हाल की घटनाएं बढ़ा रहीं चिंता
पिछले 15 दिन में जिले में राप्ती नदी और आसपास के क्षेत्रों में कई घटनाएं सामने आई हैं। अधिकतर मामलों में बच्चे या किशोर बिना जानकारी के गहरे पानी में उतर गए और डूब गए। कई घटनाओं में तो साथ मौजूद अन्य बच्चे डरकर मौके से भाग निकले, जिससे समय पर बचाव कार्य शुरू करने में देरी हुई। पुलिस रिकार्ड के अनुसार अब तक 11 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। ये घटनाएं बड़हलगंज, सिकरीगंज, खोराबार, झंगहा, गोला, सहजनवां में हुई हैं।
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इसलिए नहीं रूक रहे हादसे
- बच्चों में नदी के बहाव और गहराई का अंदाजा न होना
- चेतावनी संकेतकों की अनदेखी करना
- अभिभावकों की निगरानी में कमी
- नदी किनारे खुले और असुरक्षित पहुंच मार्ग
- गर्मी और खेल-खेल में नहाने की प्रवृत्ति
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