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Gorakhpur News: रेलवे स्टेशन रोड पर मिले नेपाली बच्चे, साझा प्रयास से मिले परिजन
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गोरखपुर। रेलवे स्टेशन रोड पर भटकते मिले नेपाली मूल के दो बच्चों को सामाजिक प्रयासों से सुरक्षित उनके परिजनों तक पहुंचा दिया गया। बच्चों की सुरक्षित वापसी के लिए ओलंपिक खिलाड़ी रहीं प्रेम माया ने विशेष पहल की।
बच्चों को कुछ समय पहले एक मां-बेटी ने अपने पास रख लिया था। उनका कहना था कि उन्होंने पुलिस को सूचना दी थी लेकिन कोई मदद न मिलने पर सुरक्षा की दृष्टि से बच्चों को अपने पास रखा। हालांकि लावारिस बच्चों को अपने पास रखना कानूनी प्रक्रिया के तहत मान्य नहीं है और ऐसे मामलों में चाइल्ड लाइन जैसी संस्थाओं की भूमिका होती है।
बताया जा रहा है कि इस मामले की जानकारी होने पर प्रेम माया ने भारत-नेपाल मैत्री समाज से संपर्क कर बच्चों की काउंसिलिंग कराई और उनकी पहचान व घर का पता लगाने में मदद की। भारत-नेपाल मैत्री समाज के अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्त ने भी नेपाली मीडिया से संपर्क साधा। इसके बाद वहां के स्थानीय पत्रकार माधव ढुंगाना के सहयोग से बच्चों के परिजनों की जानकारी प्रकाशित की गई, जिससे बच्चों के चाचा तक सूचना पहुंच गई।
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सूचना मिलते ही बच्चों के चाचा गोरखपुर पहुंचे और दोनों बच्चों को सुरक्षित प्राप्त किया। उन्होंने बच्चों की देखभाल करने वालों और मैत्री समाज के प्रयासों के लिए आभार जताया। बच्चों को साथ लेकर वे नेपाल के प्यूठान जिले के लिए रवाना हुए।
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बच्चों को कुछ समय पहले एक मां-बेटी ने अपने पास रख लिया था। उनका कहना था कि उन्होंने पुलिस को सूचना दी थी लेकिन कोई मदद न मिलने पर सुरक्षा की दृष्टि से बच्चों को अपने पास रखा। हालांकि लावारिस बच्चों को अपने पास रखना कानूनी प्रक्रिया के तहत मान्य नहीं है और ऐसे मामलों में चाइल्ड लाइन जैसी संस्थाओं की भूमिका होती है।
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बताया जा रहा है कि इस मामले की जानकारी होने पर प्रेम माया ने भारत-नेपाल मैत्री समाज से संपर्क कर बच्चों की काउंसिलिंग कराई और उनकी पहचान व घर का पता लगाने में मदद की। भारत-नेपाल मैत्री समाज के अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्त ने भी नेपाली मीडिया से संपर्क साधा। इसके बाद वहां के स्थानीय पत्रकार माधव ढुंगाना के सहयोग से बच्चों के परिजनों की जानकारी प्रकाशित की गई, जिससे बच्चों के चाचा तक सूचना पहुंच गई।
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सूचना मिलते ही बच्चों के चाचा गोरखपुर पहुंचे और दोनों बच्चों को सुरक्षित प्राप्त किया। उन्होंने बच्चों की देखभाल करने वालों और मैत्री समाज के प्रयासों के लिए आभार जताया। बच्चों को साथ लेकर वे नेपाल के प्यूठान जिले के लिए रवाना हुए।