Gorakhpur News: बैंक से फर्जी ऋण का मामला घोषित होगा एसआर केस, अब तक सामने आए तीन मामले
एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए केस को एसआर घोषित करने का निर्णय लिया गया है। पूरे प्रकरण की एसआईटी गंभीरता से जांच कर रही है। जांच और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विस्तार
फर्जी दस्तावेज पर आईसीआईसीआई बैंक से करोड़ों का ऋण लेनेवाले मामले को स्पेशल रिपोर्ट (एसआर) केस घोषित किया गया है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए इसे एसआर श्रेणी में डाला है। अब इसकी माॅनिटरिंग पुलिस ऑफिस से होगी। साथ ही प्रगति और की गई हर कार्रवाई की जानकारी डीजी ऑफिस को भी भेजनी होगी।
मकसद है कि आने वाले अफसरों को यह मालूम रहे कि परंपरागत हत्या, दुष्कर्म, लूट के अलावा जिले में फर्जी स्टांप जैसा गंभीर अपराध भी हो चुका है। परंपरागत केस को छोड़ दें तो जिले का यह दूसरा एसआर केस है। इसके पहले स्टांप केस को एसआर श्रेणी में डाला गया था।
जानकारी के मुताबिक, बांसगांव इलाक़े का रहने वाले रुद्रांश ने आईसीआईसीआई बैंक से फर्जी दस्तावेज पर ऋण लिया। बैंक से आई तहरीर पर शाहपुर थाने में केस दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की तो सामने आया कि उसने शशिभूसण की जमीन को अपनी दिखाकर अपने और अपने ट्रक चालक के नाम करोड़ों रुपया का ऋण ले लिया। जांच के दौरान ही टाटा फ़ाइनेंस की ओर से भी फ़र्ज़ी दस्तावेज़ पर ट्रक फाइनेंस कराने का केस दर्ज कराया गया।
इसके बाद ही शशिभूषण ने भी केस दर्ज कराया। मामला की गंभीरता को देखते हुए ही एसएसपी ने एसआईटी गठित कर दी तो जांच बैंक तक पहुंच गई। हालांकि, अभी बैंक की ओर से कोई सटीक जवाब न आने की वजह से संदिग्ध पाए गए तीनों कर्मचारियों का नाम केस में नहीं बढ़ पाया है।
क्या होता है एसआर केस
स्पेशल रिपोर्ट (एसआर) केस में हिंसक अपराध की एक श्रेणी है, जैसे हत्या, दुष्कर्म, लूट, डकैती आदि। इस केस की माॅनिटरिंग जिला पुलिस ऑफिस के अलावा सभी आला अफसर यहां तक की डीजीपी तक से होती है। समय-समय पर इसकी समीक्षा भी की जाती है। कोई भी नया अफसर आता है तो जिले में होने वाले अपराध को जानने के लिए एसआर फाइल को जरूर देखता है। अभी सिर्फ परंपरागत केस ही इसमें दर्ज किए जाते थे, लेकिन एसएसपी ने पहली बार अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर पहले केस को एसआर घोषित कर दिया है।
रुद्रांश ने फर्जी बैनामा से नगर निगम में दर्ज कराया था नाम
गोरखपुर। रुद्रांश ने नगर निगम में फर्जी बैनामा के आधार पर अपना नाम दर्ज कराया है। अपर नगर आयुक्त निरंकार सिंह ने बताया है कि रुद्रांश की नगर निगम में कोई गहरी पैठ नहीं है, बल्कि पंजीकृत बैनामा के आधार पर क्रेता नगर निगम एसेसमेन्ट रजिस्टर में अपना नाम अंकित करा सकता है। जब तक पंजीकृत बैनामा किसी सक्षम न्यायालय से निरस्त नही किया जाता, जब तक पंजीकृत बैनामे के कानूनी प्रभाव से इन्कार नहीं किया जा सकता।
इसके अतिरिक्त नगर निगम में सिर्फ टैक्स की अदायगी के लिए असेसमेन्ट रजिस्टर में क्रेता का नाम अंकित किया जाता है, एसेसमेन्ट रजिस्टर में नाम दर्ज होने से स्वामित्व की पुष्टि नहीं होती है। यदि पंजीकृत बैनामा कूट रचित है तो क्षुब्ध पक्ष, सक्षम न्यायालय से उक्त बैनामे को निरस्त कराकर, नगर निगम को साक्ष्य सहित सूचित करें, तब नगर निगम उक्त निरस्त बैनामे के आधार पर नगर निगम में अंकित नाम को खारिज करने की कार्रवाई करेगा, जब तक पंजीकृत बैनामा निरस्त नहीं हो जाता जब तक उसका कानूनी प्रभाव बरकरार रहता है।
एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए केस को एसआर घोषित करने का निर्णय लिया गया है। पूरे प्रकरण की एसआईटी गंभीरता से जांच कर रही है। जांच और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।