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Gorakhpur News: महुआचाफी कांड का आरोपी और फर्जी आईएएस की बदलेगी जेल, रिपोर्ट भेजी

Wed, 24 Dec 2025 12:18 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 24 Dec 2025 12:18 AM IST
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The accused in the Mahuachapi incident and the fake IAS officer will be transferred to a different jail; a report has been sent.
- अनुशासनहीन गतिविधियों व संदिग्ध संपर्कों पर जेल प्रशासन सख्त, स्थानांतरण की तैयारी
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- पशु तस्करी गिरोह के सरगना जवाहिर यादव और फर्जी आईएएस गौरव कुमार पर बढ़ी निगरानी
अमर उजाला ब्यूरो

गोरखपुर। जिला जेल में बंद महुआचाफी कांड के मुख्य आरोपी व पशु तस्करी गिरोह के सरगना जवाहिर यादव और फर्जी आईएएस गौरव कुमार की जेल बदले जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जेल प्रशासन ने दोनों आरोपियों की अनुशासनहीन गतिविधियों पर उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी है। रिपोर्ट पर स्वीकृति मिलते ही दोनों को किसी दूसरी जेल में स्थानांतरित किया जा सकता है।
जेल सूत्रों के अनुसार, दोनों ही आरोपियों की गतिविधियां सामान्य बंदियों से अलग पाई गईं। मुलाकातों, बाहरी संपर्कों और अन्य बंदियों पर प्रभाव जमाने की कोशिशों को लेकर जेल प्रशासन सतर्क हुआ। इसके बाद दोनों की कड़ी निगरानी शुरू की गई। निगरानी के दौरान प्रशासन इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि उनकी मौजूदगी से जेल की सुरक्षा व्यवस्था और अनुशासन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
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कुशीनगर जिले का रहने वाला जवाहिर यादव महुआचाफी कांड में मुख्य आरोपी है। उस पर संगठित पशु तस्करी नेटवर्क चलाने का गंभीर आरोप है। जांच में सामने आया था कि वह बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय गिरोह के जरिये पशुओं की अवैध ढुलाई और तस्करी कराता था। उसके नेटवर्क में कई जिलों के तस्कर, वाहन चालक और स्थानीय मददगार शामिल बताए गए हैं। पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में उसे गिरफ्तार कर जेल भिजवाया गया था। जेल में रहते हुए उसकी गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
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वहीं, बिहार के सीतामढ़ी जिले के मेहसौल वार्ड नंबर 37 निवासी ललित कुमार उर्फ गौरव कुमार लंबे समय तक खुद को आईएएस अधिकारी बताकर लोगों को ठगता रहा। वह सरकारी अफसरों जैसी भाषा, पहनावा और व्यवहार अपनाकर लोगों को भरोसे में लेता था। जांच में सामने आया कि वह नौकरी लगवाने, तबादले कराने और सरकारी कामों में मदद दिलाने के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूलता था। उसके खिलाफ पुलिस को कई शिकायतें मिली थीं। दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर पुलिस ने उसे करीब दस दिन पहले गिरफ्तार कर जेल भिजवाया था।

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वर्जन
दोनों ही आरोपी खुद को प्रभावशाली दिखाने और अन्य बंदियों पर दबदबा बनाने की कोशिश कर रहे थे। कुछ मामलों में बाहरी संपर्कों को लेकर भी प्रशासन को संदेह हुआ। इन्हीं तथ्यों के आधार पर जेल प्रशासन ने दोनों को संवेदनशील मानते हुए उनकी जेल बदलने की संस्तुति उच्चाधिकारियों को भेज दी है।

- दिलीप कुमार पांडेय, जेल अधीक्षक
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